प्राथमिक चिकित्सा और खेल चोटों का प्रबंधन
मुख्य तथ्य
- 1863 में जेनेवा में अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति बनी; इससे पूरी चिकित्सा-सेवा मिलने से पहले घायल व्यक्ति को तेज मानवीय सहायता देने की आधुनिक सोच को आ...
- 7 अप्रैल 1948 को विश्व स्वास्थ्य संगठन का संविधान प्रभावी हुआ; इससे चोट-निवारण और आपात देखभाल व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे का हिस्सा बनी।
- 1978 में डॉ. गेब मिर्किन ने अपनी खेल-चिकित्सा पुस्तक में RICE शब्द दिया;
- 2006 में FIFA के F-MARC समूह ने FIFA 11+ वार्म-अप कार्यक्रम बनाया;
- 2012 में ब्लीकली, ग्लासगो और मैकॉली ने ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में POLICE सुझाया;
मुख्य बिंदु
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1863 में जेनेवा में अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति बनी; इससे पूरी चिकित्सा-सेवा मिलने से पहले घायल व्यक्ति को तेज मानवीय सहायता देने की आधुनिक सोच को आधार मिला।
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7 अप्रैल 1948 को विश्व स्वास्थ्य संगठन का संविधान प्रभावी हुआ; इससे चोट-निवारण और आपात देखभाल व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे का हिस्सा बनी।
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1978 में डॉ. गेब मिर्किन ने अपनी खेल-चिकित्सा पुस्तक में RICE शब्द दिया; आराम, बर्फ, दबाव और ऊँचाई तीव्र नरम-ऊतक चोटों के मानक स्मरण-सूत्र के रूप में प्रसिद्ध हुए।
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2006 में FIFA के F-MARC समूह ने FIFA 11+ वार्म-अप कार्यक्रम बनाया; इसे फुटबॉल में खास तौर पर निचले अंगों की चोटें घटाने वाली संरचित दिनचर्या माना जाता है।
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2012 में ब्लीकली, ग्लासगो और मैकॉली ने ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में POLICE सुझाया; इसमें पूर्ण विश्राम की जगह सुरक्षा और उचित भार पर जोर दिया गया।
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2016 के बर्न सहमति-वक्तव्य ने खेल में वापसी को एक निरंतर प्रक्रिया माना; चोट के बाद यह केवल आखिरी अनुमति-पत्र नहीं है।
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2020 में ILCOR ने CPR और ECC पर अपना सहमति-सार प्रकाशित किया; इसमें साक्ष्य-समीक्षा, छाती-दबाव और डिफिब्रिलेशन हृदय-रुकावट की मदद के केंद्रीय बिंदु रहे।
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खेल मैदान में प्राथमिक चिकित्सा का अर्थ और भूमिका क्या है?
खेल मैदान में प्राथमिक चिकित्सा का अर्थ चोट, बीमारी या दुर्घटना के तुरंत बाद डॉक्टर या अस्पताल मिलने तक दी जाने वाली तात्कालिक, सीमित और व्यवस्थित सहायता है, जिसकी भूमिका जीवन बचाना और चोट को बढ़ने से रोकना है। प्राथमिक चिकित्सा वह तात्कालिक, सीमित और व्यवस्थित सहायता है जो चोट, बीमारी या दुर्घटना के तुरंत बाद डॉक्टर या अस्पताल की सुविधा मिलने तक दी जाती है। खेलों में इसका महत्व अधिक है, क्योंकि चोट अचानक, भीड़ के सामने और अक्सर उच्च गति की गतिविधि में होती है। पीटीआई के लिए प्राथमिक चिकित्सा का लक्ष्य इलाज करने का दावा करना नहीं, बल्कि जीवन बचाना, चोट को बढ़ने से रोकना, दर्द और घबराहट कम करना तथा घायल खिलाड़ी को सुरक्षित चिकित्सा-सेवा तक पहुँचाना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार चोटें और हिंसा हर साल दुनिया में लगभग 44 लाख लोगों की जान लेती हैं, इसलिए मैदान पर शुरुआती सहायता को छोटी औपचारिकता नहीं माना जा सकता। इसलिए मैदान पर मौजूद शिक्षक या प्रशिक्षक को स्थिति पहचानने, जोखिम हटाने, सहायता बुलाने और सही क्रम में कदम उठाने की आदत होनी चाहिए।
प्राथमिक चिकित्सा के मूल सिद्धांत हैं: पहले अपनी और आसपास की सुरक्षा, फिर घायल की प्रतिक्रिया और सांस की जाँच, गंभीर रक्तस्राव पर नियंत्रण, हड्डी या जोड़ की चोट में अनावश्यक हरकत रोकना, और आवश्यकता पड़ने पर आपात सहायता बुलाना। भीड़ हटाना, खिलाड़ी को शांत रखना, चोट के बारे में सरल प्रश्न पूछना और माता-पिता या संस्था को सूचना देना भी प्रबंधन का हिस्सा है। राजस्थान के विद्यालयी खेल मैदानों में भी प्रशिक्षक का यही व्यावहारिक दायित्व है कि सीमित साधनों में सही निर्णय करे।
याद रखने योग्य बात: प्राथमिक चिकित्सा का केंद्र तेज निर्णय, सुरक्षा और उचित रेफरल है, न कि मैदान में पूरा उपचार।
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