व्यायाम क्रिया विज्ञान — शरीर तंत्रों पर व्यायाम और प्रशिक्षण के प्रभाव
मुख्य तथ्य
- 1922 में आर्चिबाल्ड विवियन हिल और ओटो मेयरहॉफ को मांसपेशी कार्य, ऊष्मा उत्पादन, ऑक्सीजन उपभोग और लैक्टिक अम्ल चयापचय पर शोध के लिए शरीर क्रिया विज्ञान...
- 1870 में एडॉल्फ फिक ने फिक सिद्धांत बताया, जिसमें ऑक्सीजन ग्रहण को कार्डियक आउटपुट और धमनी-शिरा ऑक्सीजन अंतर के गुणनफल से समझाया जाता है।
- 1954 में हक्सले-हैनसन और हक्सले-नीडरगर्के शोध-पत्रों ने स्लाइडिंग फिलामेंट सिद्धांत दिया, जिसमें एक्टिन और मायोसिन की परस्पर क्रिया से मांसपेशी संकुचन...
- 1954 में अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन बना; व्यायाम परीक्षण, प्रशिक्षण और खेल-चिकित्सा दिशानिर्देशों में यह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था है।
- 1968 में केनेथ एच. कूपर ने 12-मिनट दौड़ परीक्षण को लोकप्रिय किया, जिसमें तय दूरी को हृदय-श्वसन सहनशक्ति से जोड़ा जाता है।
मुख्य बिंदु
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1922 में आर्चिबाल्ड विवियन हिल और ओटो मेयरहॉफ को मांसपेशी कार्य, ऊष्मा उत्पादन, ऑक्सीजन उपभोग और लैक्टिक अम्ल चयापचय पर शोध के लिए शरीर क्रिया विज्ञान या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला।
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1870 में एडॉल्फ फिक ने फिक सिद्धांत बताया, जिसमें ऑक्सीजन ग्रहण को कार्डियक आउटपुट और धमनी-शिरा ऑक्सीजन अंतर के गुणनफल से समझाया जाता है।
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1954 में हक्सले-हैनसन और हक्सले-नीडरगर्के शोध-पत्रों ने स्लाइडिंग फिलामेंट सिद्धांत दिया, जिसमें एक्टिन और मायोसिन की परस्पर क्रिया से मांसपेशी संकुचन समझाया जाता है।
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1954 में अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन बना; व्यायाम परीक्षण, प्रशिक्षण और खेल-चिकित्सा दिशानिर्देशों में यह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था है।
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1968 में केनेथ एच. कूपर ने 12-मिनट दौड़ परीक्षण को लोकप्रिय किया, जिसमें तय दूरी को हृदय-श्वसन सहनशक्ति से जोड़ा जाता है।
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2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वयस्कों के लिए प्रति सप्ताह 150-300 मिनट मध्यम एरोबिक गतिविधि या 75-150 मिनट तीव्र गतिविधि और मांसपेशी-मजबूती गतिविधि की सिफारिश की।
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फिट सिद्धांत का अर्थ आवृत्ति, तीव्रता, समय और प्रकार है; सुरक्षित और क्रमिक व्यायाम-निर्धारण में यह मानक ढांचा है।
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व्यायाम क्रिया विज्ञान का अर्थ और पीटीआई परीक्षा में इसका दायरा क्या है?
व्यायाम क्रिया विज्ञान शरीर पर शारीरिक गतिविधि के तात्कालिक और दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन है, और पीटीआई परीक्षा में इसका दायरा शरीर-तंत्रों की प्रतिक्रिया, प्रशिक्षण-जनित अनुकूलन और पुनर्प्राप्ति को समझने तक जाता है। आरपीएससी के फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर कॉलेज शिक्षा विभाग पाठ्यक्रम में पेपर एक को 5 इकाइयों में बांटा गया है, जिनमें स्वास्थ्य-संबंधी शारीरिक फिटनेस, फिटनेस घटकों के परीक्षण, रक्तचाप, श्वास आवृत्ति, फेफड़ों की जीवनी क्षमता, हृदय गति, नाड़ी दर, शरीर तापमान और शरीर संरचना जैसे शारीरिक माप भी आते हैं। इसमें यह देखा जाता है कि कंकाल मांसपेशी, हृदय, फेफड़े, रक्त, तंत्रिका तंत्र, हार्मोन और ताप-नियंत्रण तंत्र मिलकर काम की मांग कैसे पूरी करते हैं। पीटीआई परीक्षा के स्तर पर इसका उद्देश्य शोध-स्तर की बारीकी नहीं, बल्कि यह समझना है कि दौड़, खेल, शक्ति-अभ्यास, लचक-अभ्यास और विश्राम के दौरान शरीर किस क्रम से प्रतिक्रिया करता है।
तीन शब्द बार-बार काम आते हैं: तात्कालिक प्रभाव, दीर्घकालिक अनुकूलन और पुनर्प्राप्ति। तात्कालिक प्रभाव वे हैं जो एक अभ्यास सत्र के दौरान या तुरंत बाद दिखते हैं, जैसे हृदय गति बढ़ना, सांस तेज होना और पसीना आना। दीर्घकालिक अनुकूलन नियमित प्रशिक्षण से बनते हैं, जैसे आराम की हृदय गति घटना, स्ट्रोक आयतन बढ़ना और मांसपेशी शक्ति सुधरना। पुनर्प्राप्ति वह अवस्था है जिसमें शरीर ऑक्सीजन ऋण, ऊर्जा भंडार, तापमान और अम्ल-क्षार संतुलन को सामान्य करता है।
याद रखें: परीक्षा में प्रश्न प्रायः परिभाषा, कारण-परिणाम और तात्कालिक बनाम प्रशिक्षण-जनित प्रभाव के अंतर पर आते हैं। इसलिए उत्तर लिखते समय केवल परिभाषा नहीं, बल्कि शरीर-तंत्र, उदाहरण और प्रशिक्षण के बाद बनने वाले बदलाव को साथ जोड़ना चाहिए।
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