शिक्षा मनोविज्ञान — वृद्धि, विकास, अधिगम और अभिप्रेरणा
मुख्य तथ्य
- रूसो की एमिल 1762 में प्रकाशित हुई और उसने बचपन को वयस्कता का छोटा रूप नहीं, शिक्षा की अलग अवस्था मानने पर बल दिया।
- फ्रॉएबेल ने 1837 में पहला किंडरगार्टन खोला और खेल, क्रिया तथा प्रारंभिक बाल-शिक्षा को संगठित महत्त्व दिया।
- मारिया मोंटेसरी ने 1907 में कासा देई बाम्बिनी खोला और स्व-निर्देशित गतिविधि, तैयार वातावरण तथा इंद्रिय-प्रशिक्षण को जोड़ा।
- पियाजे के 1936 के बाल-बुद्धि संबंधी कार्य ने बाल-मनोविज्ञान में प्रयुक्त संज्ञानात्मक विकास के चार-अवस्था सिद्धांत को आकार दिया।
- बी. एफ. स्किनर के 1938 के क्रियाप्रसूत अनुबंधन संबंधी कार्य ने पुनर्बलन, दंड और व्यवहार-आकारण से अधिगम को समझाया।
मुख्य बिंदु
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रूसो की एमिल 1762 में प्रकाशित हुई और उसने बचपन को वयस्कता का छोटा रूप नहीं, शिक्षा की अलग अवस्था मानने पर बल दिया।
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फ्रॉएबेल ने 1837 में पहला किंडरगार्टन खोला और खेल, क्रिया तथा प्रारंभिक बाल-शिक्षा को संगठित महत्त्व दिया।
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मारिया मोंटेसरी ने 1907 में कासा देई बाम्बिनी खोला और स्व-निर्देशित गतिविधि, तैयार वातावरण तथा इंद्रिय-प्रशिक्षण को जोड़ा।
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पियाजे के 1936 के बाल-बुद्धि संबंधी कार्य ने बाल-मनोविज्ञान में प्रयुक्त संज्ञानात्मक विकास के चार-अवस्था सिद्धांत को आकार दिया।
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बी. एफ. स्किनर के 1938 के क्रियाप्रसूत अनुबंधन संबंधी कार्य ने पुनर्बलन, दंड और व्यवहार-आकारण से अधिगम को समझाया।
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1956 में ब्लूम के शैक्षिक उद्देश्यों के वर्गीकरण ने ज्ञान से मूल्यांकन तक संज्ञानात्मक स्तरों को व्यवस्थित किया।
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2009 के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम ने भारत में बाल-केंद्रित, भय-मुक्त प्राथमिक शिक्षा को कानूनी दायित्व बनाया।
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शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ क्या है और पीटीआई परीक्षा में इसका उपयोग कैसे होता है?
शिक्षा मनोविज्ञान वह व्यावहारिक विज्ञान है जो मनोविज्ञान के सिद्धांतों को शिक्षण, अधिगम, कक्षा-व्यवहार और बाल-विकास में लागू करके यह समझाता है कि विद्यार्थी कैसे सीखता है और शिक्षक सीखने को कैसे प्रभावी बना सकता है। शिक्षा मनोविज्ञान मनोविज्ञान के सिद्धांतों को शिक्षण, अधिगम, कक्षा-व्यवहार और बाल-विकास पर लागू करता है। इसका केंद्र यह है कि विद्यार्थी कैसे सीखता है, क्यों भूलता है, किस स्थिति में प्रेरित होता है और शिक्षक किस विधि से सीखने को अधिक प्रभावी बना सकता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग के आधिकारिक पीटीआई पाठ्यक्रम में पेपर प्रथम के कुल 200 अंकों में शिक्षा मनोविज्ञान के लिए 40 अंक निर्धारित हैं। पीटीआई जैसे भर्ती-पेपर में यह विषय गहरे शोध-विवाद से अधिक बुनियादी परिभाषाओं, प्रमुख सिद्धांतकारों और स्कूल-स्थितियों के व्यावहारिक प्रयोग पर आधारित रहता है।
शिक्षक के लिए शिक्षा मनोविज्ञान केवल सिद्धांत नहीं है। खेल-मैदान में टीम चयन, अभ्यास का क्रम, अनुशासन, रुचि, थकान, पुरस्कार, आत्मविश्वास और व्यक्तिगत अंतर सीधे इसी से जुड़ते हैं। उदाहरण के लिए राजस्थान के ग्रामीण विद्यालय में अलग-अलग शारीरिक क्षमता वाले विद्यार्थियों को एक ही दौड़-अभ्यास देना उचित नहीं होगा; शिक्षक को विकास-स्तर, स्वास्थ्य और प्रेरणा को साथ देखकर गतिविधि चुननी चाहिए। परीक्षा में परिभाषा, क्षेत्र, उद्देश्य, विधि और शिक्षण में उपयोग जैसे बिंदु सीधे पूछे जा सकते हैं।
सार यही है: शिक्षा मनोविज्ञान विद्यार्थी, शिक्षक और अधिगम-परिस्थिति के संबंध को समझने का व्यावहारिक विज्ञान है।
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