मुख्य तथ्य

  • यह विषय घरेलू अनुभवों को गति, विद्युत, अम्ल-क्षार, ईंधन, पोषण, प्रकाश, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा के नियमों से जोड़ता है।
  • सी.वी. रमन, होमी भाभा, विक्रम साराभाई, एस.एन. बोस, मेघनाद साहा और सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर भारतीय वैज्ञानिक आधार बनाते हैं।
  • न्यूटन के नियम, ओम का नियम, पीएच पैमाना और प्रकाश की चाल रोजमर्रा उदाहरणों को मापनीय संबंध में बदलते हैं।
  • एलपीजी, विटामिन, इंसुलिन और रक्त समूह स्वास्थ्य तथा रसायन विज्ञान के बेहद अहम व्यावहारिक उपयोग हैं।
  • चंद्रयान-3, आदित्य-एल1, एक्सपोसैट, गगनयान टीवी-डी1, पीएफबीआर और एएनआरएफ मूल विज्ञान को समकालीन भारतीय संस्थाओं से जोड़ते हैं।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    यह विषय घरेलू अनुभवों को गति, विद्युत, अम्ल-क्षार, ईंधन, पोषण, प्रकाश, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा के नियमों से जोड़ता है।

  2. 2

    सी.वी. रमन, होमी भाभा, विक्रम साराभाई, एस.एन. बोस, मेघनाद साहा और सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर भारतीय वैज्ञानिक आधार बनाते हैं।

  3. 3

    न्यूटन के नियम, ओम का नियम, पीएच पैमाना और प्रकाश की चाल रोजमर्रा उदाहरणों को मापनीय संबंध में बदलते हैं।

  4. 4

    एलपीजी, विटामिन, इंसुलिन और रक्त समूह स्वास्थ्य तथा रसायन विज्ञान के बेहद अहम व्यावहारिक उपयोग हैं।

  5. 5

    चंद्रयान-3, आदित्य-एल1, एक्सपोसैट, गगनयान टीवी-डी1, पीएफबीआर और एएनआरएफ मूल विज्ञान को समकालीन भारतीय संस्थाओं से जोड़ते हैं।

  6. 6

    राजस्थान संदर्भों में काजरी जोधपुर, भड़ला सौर पार्क, राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन और एनआरएससी का जोधपुर केंद्र आते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि और भारतीय खोजें कैसे जुड़ती हैं?

वैज्ञानिक दृष्टि और भारतीय खोजें इस तरह जुड़ती हैं कि कोई देखी हुई घटना पहले मापी जाती है, फिर दोहराए जा सकने वाले प्रयोग, गणना और संस्था के सहारे टिकाऊ वैज्ञानिक ज्ञान बनता है। रोजमर्रा विज्ञान उस अवलोकन से शुरू होता है जिसे मापा और दोहराया जा सके।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 1987 से हर साल 28 फरवरी को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1928 में सी.वी. रमन ने रमन प्रभाव की खोज की थी।

भारतीय खोजें और सिद्धांत

वैज्ञानिकखोज/सिद्धांततिथि/वर्षयोगदान
सी.वी. रमनरमन प्रभाव28 फरवरी 1928रमन ने पहचाना कि अणुओं से अंतःक्रिया के बाद प्रकीर्णित प्रकाश का एक छोटा भाग अपनी तरंगदैर्घ्य बदलता है। इसे प्रकाश का अप्रत्यास्थ प्रकीर्णन कहा जाता है।
सी.वी. रमनभौतिकी का नोबेल पुरस्कार1930इसी खोज पर उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।
सी.वी. रमनराष्ट्रीय विज्ञान दिवस28 फरवरीबाद में 28 फरवरी राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में स्थापित हुआ।
मेघनाद साहासाहा आयनीकरण समीकरण1920तारकीय वर्णक्रमों में तापीय आयनीकरण को समझाता है।
सत्येंद्र नाथ बोसबोस-आइंस्टीन सांख्यिकी1924समान कणों की क्वांटम गिनती बदलती है।
सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखरचंद्रशेखर सीमा1930 से जुड़ता विकासश्वेत बौने तारे की स्थिरता के लिए लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान की सीमा बताती है।

साझा वैज्ञानिक पद्धति

  • इन खोजों में साझा पद्धति दिखाई देती है:
  • पहले दृश्य घटना;
  • फिर मापनीय पैटर्न;
  • उसके बाद गणितीय संबंध;
  • अंत में शोध को टिकाऊ बनाने वाली संस्था।

राजस्थान और संस्थागत रेखा

  • राजस्थान में यह संस्थागत रेखा जोधपुर के काजरी से जुड़ती है।
  • इसे 1959 में केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान नाम मिला।
  • यहाँ शुष्क क्षेत्र का विज्ञान जल, मिट्टी, पवन अपरदन और मरुस्थलीय खेती का अध्ययन करता है।
  • पिलानी की विज्ञान-शिक्षा और पीआरएल के अधीन उदयपुर सौर वेधशाला भी बताती है कि वैज्ञानिक कार्य वेधशालाओं, क्षेत्रीय केंद्रों और विश्वविद्यालयों से बढ़ता है।

खोज, सिद्धांत और अनुप्रयोग

उदाहरणपहचान
रमनप्रयोगशाला का प्रकाशीय प्रभाव।
साहा और बोसगणितीय व्याख्याएँ।
चंद्रशेखरतारकीय संरचना से जुड़े।
काजरीकठिन जलवायु में क्षेत्र-अनुसंधान का उदाहरण।
  • इन सबको जोड़ने वाला सूत्र परीक्षणयोग्यता है।
  • कोई दावा तभी विज्ञान बनता है जब दूसरा पर्यवेक्षक उसे उपकरण, गणना या क्षेत्र-साक्ष्य से जाँच सके।
  • इस तरह भारतीय वैज्ञानिक नाम अपनी-अपनी अलग घटना से स्पष्ट रूप से जुड़े रहते हैं।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

9 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें