मुख्य तथ्य

  • 2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई ICDS योजना ने 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को एक ही...
  • 2013 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने आंगनवाड़ी सेवाओं के पूरक पोषण और मातृत्व लाभ को अधिकार-आधारित दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाया।
  • 8 मार्च 2018 को झुंझुनूं, राजस्थान से शुरू हुए POSHAN अभियान ने पोषण सुधार में अभिसरण, तकनीक और जन-भागीदारी को केंद्रीय साधन बनाया।
  • 2021-22 से 2025-26 की 15वें वित्त आयोग अवधि में सक्षम आंगनवाड़ी और POSHAN 2.0 को एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम के रूप में लागू किया गया।
  • 2022 में जारी संचालन दिशानिर्देशों ने सक्षम आंगनवाड़ी और POSHAN 2.0 में गुणवत्ता, पोषण-विविधता, निगरानी और डिजिटल रिपोर्टिंग पर जोर दिया।

मुख्य बिंदु

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    2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई ICDS योजना ने 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को एक ही सेवा-ढांचे में जोड़ा।

  2. 2

    2013 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने आंगनवाड़ी सेवाओं के पूरक पोषण और मातृत्व लाभ को अधिकार-आधारित दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाया।

  3. 3

    8 मार्च 2018 को झुंझुनूं, राजस्थान से शुरू हुए POSHAN अभियान ने पोषण सुधार में अभिसरण, तकनीक और जन-भागीदारी को केंद्रीय साधन बनाया।

  4. 4

    2021-22 से 2025-26 की 15वें वित्त आयोग अवधि में सक्षम आंगनवाड़ी और POSHAN 2.0 को एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम के रूप में लागू किया गया।

  5. 5

    2022 में जारी संचालन दिशानिर्देशों ने सक्षम आंगनवाड़ी और POSHAN 2.0 में गुणवत्ता, पोषण-विविधता, निगरानी और डिजिटल रिपोर्टिंग पर जोर दिया।

  6. 6

    Poshan Tracker आंगनवाड़ी केंद्र, कार्यकर्ता और लाभार्थी-स्तर की सेवा-डिलीवरी को वास्तविक समय के निकट निगरानी से जोड़ने वाला डिजिटल शासन साधन है।

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    ICDS की 6 सेवाओं में पूरक पोषण, अनौपचारिक पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और रेफरल सेवाएं शामिल हैं।

आंगनवाड़ी में पर्यवेक्षण का अर्थ और उद्देश्य क्या है?

आंगनवाड़ी में पर्यवेक्षण का अर्थ सेवा की गुणवत्ता, समयबद्धता, रिकॉर्ड और लाभार्थी तक वास्तविक पहुंच को लगातार सुधारना है, ताकि केंद्र केवल कागज पर नहीं बल्कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के जीवन में काम करे। आंगनवाड़ी व्यवस्था में पर्यवेक्षण का अर्थ केवल गलती पकड़ना नहीं है, बल्कि सेवा की गुणवत्ता, समयबद्धता और लाभार्थी तक पहुंच को सुधारना है। पर्यवेक्षक को केंद्र की दैनिक गतिविधियों, रिकॉर्ड, बच्चों की उपस्थिति, पूरक पोषण वितरण, वृद्धि निगरानी, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, गृह-भेंट और सामुदायिक बैठकों को एक साथ देखना होता है। इसलिए पर्यवेक्षण प्रशासन, प्रशिक्षण, समस्या-समाधान और प्रेरणा का मिला-जुला कार्य है। भर्ती परीक्षा में यह समझना जरूरी है कि अच्छा पर्यवेक्षण नियंत्रक से अधिक सहयोगी होता है, पर नियमों और जवाबदेही को कमजोर नहीं करता। प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार जून 2024 में पोषण ट्रैकर पर 10.26 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत थे, इसलिए पर्यवेक्षण का दायरा बहुत बड़े लाभार्थी-आधार तक फैला हुआ है।

आंगनवाड़ी केंद्र पर पर्यवेक्षण के मुख्य उद्देश्य हैं: सेवाओं की नियमितता, पात्र लाभार्थियों का कवरेज, रिकॉर्ड की शुद्धता, सरकारी पोषण मानकों का पालन, जोखिमग्रस्त बच्चों और माताओं की पहचान, और विभागीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता। पर्यवेक्षक को स्थानीय संदर्भ भी समझना होता है; जैसे राजस्थान के रेगिस्तानी या बिखरी आबादी वाले क्षेत्रों में गृह-भेंट और समुदाय-संपर्क की योजना अलग ढंग से बन सकती है। पर्यवेक्षण का अंतिम लक्ष्य यह है कि योजना कागज पर नहीं, वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचे।

सार यही है: पर्यवेक्षण सेवा-सुधार, जवाबदेही और मार्गदर्शन की सतत प्रक्रिया है।

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