मानव शरीर, स्वास्थ्य, पोषण और सामान्य रोग (सामान्य विज्ञान)
मुख्य तथ्य
- स्वास्थ्य-नीति का आधार पीएमजेएवाई 2018, एबीडीएम 2021, वय वंदना 2024, राजस्थान की चिरंजीवी योजना और राजस्थान स्वास्थ्य अधिकार अधिनियम, 2023 हैं।
- खाद्य-सुरक्षा ढाँचा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के 2006 अधिनियम, झुंझुनूं से शुरू पोषण अभियान और एनए...
- संस्थागत आधार में 1911 की भारतीय अनुसंधान निधि संघ से विकसित आईसीएमआर और आयुर्विज्ञान आयोग का महत्व है।
- 2023 का अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष और श्री अन्न नामकरण मोटे अनाज को पोषण-नीति से जोड़ते हैं।
मुख्य बिंदु
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स्वास्थ्य-नीति का आधार पीएमजेएवाई 2018, एबीडीएम 2021, वय वंदना 2024, राजस्थान की चिरंजीवी योजना और राजस्थान स्वास्थ्य अधिकार अधिनियम, 2023 हैं।
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खाद्य-सुरक्षा ढाँचा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के 2006 अधिनियम, झुंझुनूं से शुरू पोषण अभियान और एनएफएचएस-5 संकेतकों से बनता है।
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पोषण में ऊर्जा-मान, विटामिन-अभाव युग्म और प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण को अलग-अलग समझना जरूरी है।
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रोग-वर्गीकरण में वाहक-रोग-रोगजनक युग्म, जलजनित तथा रक्तजनित मार्ग और मलेरिया प्रजाति प्रमुख रहते हैं।
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संस्थागत आधार में 1911 की भारतीय अनुसंधान निधि संघ से विकसित आईसीएमआर और आयुर्विज्ञान आयोग का महत्व है।
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2023 का अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष और श्री अन्न नामकरण मोटे अनाज को पोषण-नीति से जोड़ते हैं।
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कोवैक्सिन, आईसीएमआर-एनआईवी पुणे और भारत बायोटेक जैव-प्रौद्योगिकी, जनस्वास्थ्य और टीका-नियमन को जोड़ते हैं।
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झुंझुनूं, चिरंजीवी, स्वास्थ्य अधिकार, एम्स जोधपुर, सवाई मानसिंह अस्पताल और राजस्थान का बाजरा राज्य-स्तर के स्वास्थ्य-पोषण उदाहरण देते हैं।
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राजस्थान में स्वास्थ्य-वित्त, पात्रता और अधिकार कैसे जुड़े हैं?
राजस्थान में स्वास्थ्य-वित्त, पात्रता और अधिकार का ढाँचा केंद्र की आयुष्मान भारत योजना, वृद्धजन कवर, राज्य बीमा और स्वास्थ्य-अधिकार कानून को मिलाकर बनता है, इसलिए इसे खर्च-सुरक्षा और इलाज-अधिकार की संयुक्त व्यवस्था की तरह पढ़ना चाहिए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण से जुड़े संसदीय उत्तर के अनुसार एबी-पीएमजेएवाई लगभग 55 करोड़ लाभार्थियों से जुड़े 12.37 करोड़ परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य-कवर देता है।
आयुष्मान भारत — प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना
आयुष्मान भारत — प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) द्वितीयक और तृतीयक अस्पताल-देखभाल का केंद्रीय बीमा आधार है। परीक्षा में इसे केवल “बीमा योजना” कहकर छोड़ना अधूरा रहेगा, क्योंकि इसकी असली प्रशासनिक बात पात्रता, सूचीबद्ध अस्पताल, नकदरहित उपचार, पोर्टेबिलिटी और दावा-निपटान है। राजस्थान के उत्तर में यही बिंदु दिखाता है कि गरीब और कमजोर परिवार के लिए बीमारी केवल चिकित्सा समस्या नहीं, बल्कि घर की बचत और कर्ज से भी जुड़ी समस्या है।
| घटक | विवरण |
|---|---|
| राष्ट्रीय शुभारंभ | 23 सितंबर 2018 को रांची से हुआ |
| पात्रता लाभ | पात्र परिवार को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक नकदरहित अस्पताल-उपचार मिलता है |
| कार्यान्वयन संस्था | राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण |
| मात्रा | 12 करोड़ से अधिक परिवार और लगभग 55 करोड़ लाभार्थी |
| प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से अंतर | प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल पैकेज नहीं बल्कि प्राथमिक देखभाल को मजबूत करते हैं |
पोर्टेबिलिटी और दावा-निपटान
- पोर्टेबिलिटी: पात्र श्रमिक घर-राज्य से बाहर सूचीबद्ध अस्पताल में भी उपचार ले सकता है।
- दावा-निपटान: दावा-निपटान अस्पताल पैकेज, ई-कार्ड और धोखाधड़ी नियंत्रण से जुड़ता है।
आयुष्मान वय वंदना योजना
आयुष्मान वय वंदना योजना (पीएमजेएवाई 70+ विस्तार) 2024 की वृद्धजन-नीति कड़ी है। यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पात्रता उम्र से तय होती है, आय-श्रेणी से नहीं। इससे उत्तर में यह बात साफ होती है कि वृद्धजन स्वास्थ्य में नीति का आधार केवल गरीबी-रेखा नहीं, बल्कि उम्र से आने वाला चिकित्सा-जोखिम भी है।
| घटक | विवरण |
|---|---|
| शुभारंभ | 29 अक्तूबर 2024 |
| पात्रता | 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिक |
| आय-श्रेणी | आय-श्रेणी से अलग |
| परिवार-कवर | ₹5 लाख |
| नीति-दायरा | लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक और 4.5 करोड़ परिवार |
राजस्थान की स्वास्थ्य-वित्त कड़ी
राजस्थान में केंद्रीय बीमा और राज्य कानून साथ-साथ पढ़ने चाहिए, क्योंकि परीक्षा में खर्च-सुरक्षा और उपचार-अधिकार को अलग-अलग भी पूछा जा सकता है। राज्य स्तर पर बीमा योजना अस्पताल खर्च का झटका घटाती है, जबकि अधिकार-कानून आपात स्थिति में उपचार की वैधानिक मांग को मजबूत करता है।
| व्यवस्था | विवरण |
|---|---|
| मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (राजस्थान) | 1 मई 2021 से चली और बजट में ₹25 लाख तक पहुँची |
| राजस्थान स्वास्थ्य अधिकार अधिनियम, 2023 | बीमा से आगे जाकर अग्रिम भुगतान के बिना आपात उपचार का विधिक आधार देता है |
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