मुख्य तथ्य

  • 2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई ICDS योजना में पूरक पोषण, वृद्धि निगरानी, स्वास्थ्य-जांच और पोषण-स्वास्थ्य शिक्षा आंगनवाड़ी सेवाओं के मूल घटक हैं।
  • 2006 में WHO ने बाल वृद्धि मानक जारी किए; शिशु और छोटे बच्चों की लंबाई, वजन और वजन-लंबाई की तुलना के लिए ये व्यापक संदर्भ हैं।
  • 2013 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने 6 माह से 6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण अधिकारों को कानूनी आधार दिया।
  • 2018 में शुरू हुए पोषण अभियान ने बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं में कुपोषण घटाने के लिए अभिसरण और निगरानी पर जोर दिया।
  • SAM की पहचान सामान्यतः वजन-लंबाई Z-स्कोर -3 से कम, MUAC 11.5 सेमी से कम, स्पष्ट गंभीर क्षय या दोनों पैरों में पोषण-सूजन से जुड़ती है।

मुख्य बिंदु

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    2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई ICDS योजना में पूरक पोषण, वृद्धि निगरानी, स्वास्थ्य-जांच और पोषण-स्वास्थ्य शिक्षा आंगनवाड़ी सेवाओं के मूल घटक हैं।

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    2006 में WHO ने बाल वृद्धि मानक जारी किए; शिशु और छोटे बच्चों की लंबाई, वजन और वजन-लंबाई की तुलना के लिए ये व्यापक संदर्भ हैं।

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    2013 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने 6 माह से 6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण अधिकारों को कानूनी आधार दिया।

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    2018 में शुरू हुए पोषण अभियान ने बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं में कुपोषण घटाने के लिए अभिसरण और निगरानी पर जोर दिया।

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    SAM की पहचान सामान्यतः वजन-लंबाई Z-स्कोर -3 से कम, MUAC 11.5 सेमी से कम, स्पष्ट गंभीर क्षय या दोनों पैरों में पोषण-सूजन से जुड़ती है।

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    MAM में बच्चा गंभीर श्रेणी से ऊपर पर सामान्य से नीचे होता है; MUAC 11.5 सेमी या अधिक और 12.5 सेमी से कम या वजन-लंबाई Z-स्कोर -3 से -2 के बीच हो सकता है।

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    NRC और CMTC जैसी उपचार इकाइयां जटिल गंभीर कुपोषण में चिकित्सकीय देखभाल, आहार-उपचार और माता को परामर्श देने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

कुपोषण असल में क्या होता है?

कुपोषण वह स्थिति है जिसमें शरीर को ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज और जरूरी पोषक तत्व सही मात्रा-संतुलन में नहीं मिलते, या मिले हुए पोषक तत्वों का शरीर ठीक से उपयोग नहीं कर पाता। कुपोषण का अर्थ केवल भोजन की कमी नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे ऊर्जा या पोषक तत्वों के सेवन में कमी, अधिकता या असंतुलन से जुड़ी स्थिति मानता है। इसमें शरीर को ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज या अन्य जरूरी तत्व सही मात्रा और अनुपात में नहीं मिलते, या भोजन मिलते हुए भी शरीर उनका उपयोग ठीक से नहीं कर पाता। इसलिए कुपोषण के दो बड़े रूप याद रखने चाहिए: अल्पपोषण और अतिपोषण। अल्पपोषण में ऊर्जा या पोषक तत्व कम पड़ते हैं; अतिपोषण में ऊर्जा, वसा, चीनी या नमक की अधिकता से मोटापा और गैर-संचारी रोगों का जोखिम बढ़ता है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, जैसे आयरन की कमी से एनीमिया या विटामिन ए की कमी से रतौंधी, सामान्य वजन वाले व्यक्ति में भी हो सकती है; इसे छिपी भूख कहा जाता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार राजस्थान में पाँच वर्ष से कम आयु के 31.8% बच्चे स्टंटिंग की श्रेणी में थे, इसलिए कुपोषण को केवल दुबलापन मानना अधूरी समझ है।

बाल, मातृ और किशोरी स्वास्थ्य में कुपोषण विशेष रूप से गंभीर है, क्योंकि यह वृद्धि, सीखने की क्षमता, प्रतिरक्षा, प्रसव-जोखिम और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। महिला पर्यवेक्षक के काम में यह समझ व्यवहार से जुड़ती है: केवल राशन बाँटना पर्याप्त नहीं, बल्कि वृद्धि-चार्ट पढ़ना, जोखिम पहचानना, परिवार को सही भोजन व्यवहार समझाना और जरूरत पड़ने पर बच्चे को स्वास्थ्य केंद्र तक जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।

मुख्य समझ: कुपोषण कमी और अधिकता दोनों का नाम है, इसलिए आकलन हमेशा भोजन, वृद्धि और स्वास्थ्य को साथ देखकर करना चाहिए।

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