मुख्य तथ्य

  • ICDS की शुरुआत 2 अक्टूबर 1975 को हुई; पूरक पोषण, स्वास्थ्य-जांच और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा ने इसे 6 वर्ष से कम बच्चों और गर्भवती या स्तनपान कराने वाली म...
  • पोषण अभियान 8 मार्च 2018 को झुंझुनूं, राजस्थान में शुरू हुआ; इसने निगरानी, समन्वय और व्यवहार-बदलाव को ठिगनापन, अल्पपोषण, एनीमिया और कम जन्म-वजन घटाने...
  • ICMR-NIN ने 2020 में भारतीयों के लिए पोषक तत्व आवश्यकताएं प्रकाशित कीं;
  • ICMR-NIN के 2024 आहार-निर्देश विविध भोजन, कम चीनी, कम नमक और वसा के सावधानीपूर्ण उपयोग पर जोर देते हैं।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 खाद्यान्न अधिकारों को कानूनी आधार देता है और गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के लिए पोषण-सह...

मुख्य बिंदु

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    ICDS की शुरुआत 2 अक्टूबर 1975 को हुई; पूरक पोषण, स्वास्थ्य-जांच और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा ने इसे 6 वर्ष से कम बच्चों और गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए मुख्य सेवा-मंच बनाया।

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    पोषण अभियान 8 मार्च 2018 को झुंझुनूं, राजस्थान में शुरू हुआ; इसने निगरानी, समन्वय और व्यवहार-बदलाव को ठिगनापन, अल्पपोषण, एनीमिया और कम जन्म-वजन घटाने से जोड़ा।

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    ICMR-NIN ने 2020 में भारतीयों के लिए पोषक तत्व आवश्यकताएं प्रकाशित कीं; ये सिफारिशें संतुलित आहार, ऊर्जा-जरूरत और सूक्ष्म पोषक तत्व सेवन का मार्गदर्शन करती हैं।

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    ICMR-NIN के 2024 आहार-निर्देश विविध भोजन, कम चीनी, कम नमक और वसा के सावधानीपूर्ण उपयोग पर जोर देते हैं।

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    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 खाद्यान्न अधिकारों को कानूनी आधार देता है और गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के लिए पोषण-सहायता शामिल करता है।

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    विटामिन A रतौंधी से बचाता है और उपकला ऊतकों की रक्षा करता है; इसकी कमी बचपन में आंखों की क्षति का बड़ा रोके जाने योग्य कारण है।

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    आयोडीन थायरॉयड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी है; आयोडीन-युक्त नमक घेंघा और मानसिक विकास में बाधा रोकने का सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय है।

पोषक तत्वों की मूल समझ क्या है?

पोषक तत्वों की मूल समझ यह है कि भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि ऊर्जा, वृद्धि, ऊतक-मरम्मत, प्रतिरक्षा और शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी तत्व देने के लिए होता है। पोषण का अर्थ केवल पेट भरना नहीं, बल्कि शरीर को ऊर्जा, वृद्धि, ऊतक-मरम्मत, प्रतिरक्षा और सामान्य कार्यों के लिए जरूरी तत्व देना है। पोषक तत्व सामान्यतः दो बड़े समूहों में पढ़े जाते हैं। स्थूल पोषक तत्व वे हैं जिनकी जरूरत अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में होती है: कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और जल। सूक्ष्म पोषक तत्व कम मात्रा में चाहिए, पर उनका असर बहुत बड़ा होता है: विटामिन और खनिज। आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान की आहार-निर्देशिका 2024 के अनुसार संतुलित थाली में न्यूनतम 10 खाद्य-समूहों से स्थूल और सूक्ष्म पोषक तत्व लेने की सलाह दी गई है। वस्तुनिष्ठ परीक्षा में इनका वर्गीकरण, प्रमुख स्रोत, कमी के लक्षण और अधिकता से होने वाले प्रभाव सीधे पूछे जाते हैं।

संतुलित आहार में अनाज, दालें, दूध या उसके विकल्प, अंडा-मांस-मछली जैसे पशु-आधारित स्रोत, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, मेवे, बीज और पर्याप्त जल का उचित मेल होता है। राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में बाजरा, मोठ, मूंग, चना, छाछ, गुड़-तिल और मौसमी साग स्थानीय भोजन के पोषण-मूल्य को बढ़ा सकते हैं। महिला पर्यवेक्षक के काम में पोषण का व्यावहारिक अर्थ यह है कि वह परिवार को स्थानीय, सस्ते और उपलब्ध खाद्य पदार्थों से बेहतर थाली बनाना समझा सके।

मुख्य बात: पोषक तत्वों को रटने के बजाय उनके कार्य, स्रोत और कमी-लक्षण की तिकड़ी में याद करें।

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