संतुलित आहार, भोजन समूह और जीवन की विभिन्न अवस्थाओं में पोषण आवश्यकताएँ
मुख्य तथ्य
- 1911 में स्थापित ICMR भारत की शीर्ष जैव-चिकित्सा अनुसंधान संस्था है;
- 2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई ICDS योजना 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-विद्यालय सेवाओं से जुड़ी प्रमुख...
- 2006 के खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम ने FSSAI को वैधानिक आधार दिया; पैक खाद्य पदार्थों की सुरक्षा, लेबल और मानक इसी ढांचे से नियंत्रित होते हैं।
- 2013 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने लक्षित सार्वजनिक वितरण, मातृत्व लाभ और बच्चों के पोषण अधिकारों को कानूनी आधार दिया।
- 2018 में शुरू हुआ पोषण अभियान कुपोषण, एनीमिया, कम जन्म वजन और वृद्धि निगरानी जैसे सूचकों पर अभिसरण आधारित राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
मुख्य बिंदु
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1911 में स्थापित ICMR भारत की शीर्ष जैव-चिकित्सा अनुसंधान संस्था है; NIN 1918 में कूनूर की बेरी-बेरी जांच इकाई से शुरू हुआ और भारत में आहार-मानकों का प्रमुख स्रोत है।
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2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई ICDS योजना 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-विद्यालय सेवाओं से जुड़ी प्रमुख सामुदायिक व्यवस्था है।
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2006 के खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम ने FSSAI को वैधानिक आधार दिया; पैक खाद्य पदार्थों की सुरक्षा, लेबल और मानक इसी ढांचे से नियंत्रित होते हैं।
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2013 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने लक्षित सार्वजनिक वितरण, मातृत्व लाभ और बच्चों के पोषण अधिकारों को कानूनी आधार दिया।
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2018 में शुरू हुआ पोषण अभियान कुपोषण, एनीमिया, कम जन्म वजन और वृद्धि निगरानी जैसे सूचकों पर अभिसरण आधारित राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
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2021 में विद्यालयी भोजन कार्यक्रम को PM POSHAN नाम से आगे बढ़ाया गया; इसका महत्व बच्चों की उपस्थिति, सीखने और पोषण सुरक्षा से जुड़ा है।
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2024 में ICMR-NIN ने भारतीयों के लिए अद्यतन आहार दिशा-निर्देश जारी किए; इनमें विविध भोजन, कम नमक-चीनी-वसा और जीवन-चक्र आधारित पोषण पर बल है।
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संतुलित आहार क्या होता है?
संतुलित आहार वह भोजन है जिसमें ऊर्जा, वृद्धि, शरीर की मरम्मत, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और रोजमर्रा के कामों के लिए सभी जरूरी पोषक तत्व सही मात्रा और सही अनुपात में मिलते हैं। इसका अर्थ केवल पेट भरना नहीं है। भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज, रेशा और पर्याप्त पानी शामिल होने चाहिए। किसी एक अनाज या एक ही प्रकार के भोजन पर निर्भर रहने से ऊर्जा तो मिल सकती है, पर सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी बनी रहती है। इसलिए आहार की विविधता परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण शब्द है। आईसीएमआर-एनआईएन 2020 के अनुसार स्वस्थ वयस्कों के लिए सुरक्षित प्रोटीन आवश्यकता 0.83 ग्राम प्रति किलोग्राम प्रतिदिन मानी गई है।
भारतीय संदर्भ में संतुलित आहार स्थानीय उपलब्धता, आय, उम्र, काम की तीव्रता, गर्भावस्था, स्तनपान और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बदलता है। खेत में श्रम करने वाली महिला, विद्यालय जाने वाला बच्चा, गर्भवती महिला और वृद्ध व्यक्ति सभी के लिए एक जैसी मात्रा उचित नहीं होगी। फिर भी सिद्धांत समान रहता है: अनाज के साथ दालें या अन्य प्रोटीन स्रोत, पर्याप्त सब्जियां और फल, सीमित तेल, कम चीनी और कम नमक। राजस्थान के ग्रामीण आहार में बाजरा, दाल, छाछ, हरी सब्जी और मौसमी फल को सही अनुपात में मिलाना इसी सिद्धांत का सरल उदाहरण है।
सार यह है: संतुलन का मतलब हर थाली में विविधता, पर्याप्तता और संयम का मेल है। परीक्षा में इसे केवल “क्या खाना है” के रूप में नहीं, बल्कि “कितना, किसके साथ और किस अवस्था में” के रूप में पढ़ना चाहिए।
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