मातृ स्वास्थ्य — प्रसवपूर्व, प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल
मुख्य तथ्य
- 12 अप्रैल 2005 को शुरू हुई जननी सुरक्षा योजना मातृ और नवजात मृत्यु घटाने के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने वाली प्रमुख सुरक्षित मातृत्व योजना है।
- 1 जून 2011 को शुरू हुए जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं और बीमार नवजातों के लिए निःशुल्क दवा, जांच, भोजन,...
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में हर माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं, विशेषकर उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाओं की निश्चित-दिवस एएनसी जांच प...
- सुरक्षित मातृत्व आश्वासन, यानी SUMAN, 2019 में शुरू पहल है, जिसका लक्ष्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा में गर्भवती महिला और नवजात को सम्मानजनक, गुणवत्ताप...
- मातृ मृत्यु वह मृत्यु है जो गर्भावस्था के दौरान या गर्भसमापन के 42 दिन के भीतर गर्भावस्था या उसके प्रबंधन से संबंधित कारणों से हो, दुर्घटनात्मक कारणों...
मुख्य बिंदु
- 1
12 अप्रैल 2005 को शुरू हुई जननी सुरक्षा योजना मातृ और नवजात मृत्यु घटाने के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने वाली प्रमुख सुरक्षित मातृत्व योजना है।
- 2
1 जून 2011 को शुरू हुए जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं और बीमार नवजातों के लिए निःशुल्क दवा, जांच, भोजन, रक्त और परिवहन जैसी सुविधाओं पर जोर दिया।
- 3
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में हर माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं, विशेषकर उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाओं की निश्चित-दिवस एएनसी जांच पर बल दिया जाता है।
- 4
सुरक्षित मातृत्व आश्वासन, यानी SUMAN, 2019 में शुरू पहल है, जिसका लक्ष्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा में गर्भवती महिला और नवजात को सम्मानजनक, गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क सेवा देना है।
- 5
मातृ मृत्यु वह मृत्यु है जो गर्भावस्था के दौरान या गर्भसमापन के 42 दिन के भीतर गर्भावस्था या उसके प्रबंधन से संबंधित कारणों से हो, दुर्घटनात्मक कारणों से नहीं।
- 6
मातृ मृत्यु अनुपात प्रति 100000 जीवित जन्मों पर मातृ मौतों की संख्या बताता है और स्वास्थ्य व्यवस्था की पहुंच, गुणवत्ता और समय पर रेफरल का महत्वपूर्ण संकेतक है।
- 7
मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड गर्भावस्था पंजीकरण, प्रसवपूर्व जांच, टीकाकरण, प्रसवोत्तर देखभाल और शिशु वृद्धि की निगरानी का रिकॉर्ड तथा परामर्श साधन है।
- 8
एनीमिया मुक्त भारत 2018 में शुरू हुआ और 6x6x6 रणनीति के तहत 6 लाभार्थी समूह, 6 हस्तक्षेप और 6 संस्थागत तंत्र पर काम करता है।
आगे पढ़ें
मातृ स्वास्थ्य क्या है और परीक्षा में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
मातृ स्वास्थ्य गर्भधारण से लेकर प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि तक महिला के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य की सुरक्षा है, और परीक्षा में यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे आंगनवाड़ी, आशा, एएनएम, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पोषण, टीकाकरण, रेफरल और सरकारी योजनाओं की पूरी सेवा-श्रृंखला जुड़ती है। मातृ स्वास्थ्य का अर्थ गर्भधारण से लेकर प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि तक महिला के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य की सुरक्षा से है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की महिला सुपरवाइजर जैसी परीक्षा में यह विषय केवल चिकित्सा शब्दावली तक सीमित नहीं रहता; इसमें आंगनवाड़ी, आशा, एएनएम, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पोषण, टीकाकरण, रेफरल और सरकारी योजनाओं की परस्पर भूमिका भी पूछी जा सकती है। इसलिए उम्मीदवार को रोगों के नाम याद करने के साथ सेवा-श्रृंखला समझनी चाहिए: समुदाय में पहचान, समय पर पंजीकरण, नियमित जांच, सुरक्षित प्रसव, नवजात देखभाल और प्रसवोत्तर निगरानी। एनएफएचएस-5 के अनुसार राजस्थान में अंतिम जन्म के लिए पहली तिमाही में प्रसवपूर्व जांच कराने वाली माताओं का अनुपात 2019-21 में 76.3 प्रतिशत था, इसलिए शीघ्र पंजीकरण परीक्षा और फील्ड-वर्क दोनों में केंद्रीय बिंदु बनता है।
भारत में मातृ स्वास्थ्य को प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य की व्यापक व्यवस्था से जोड़ा गया है। गर्भवती महिला के लिए आयरन-फोलिक एसिड, कैल्शियम, टेटनस-डिप्थीरिया से सुरक्षा, रक्तचाप और हीमोग्लोबिन जांच, वजन निगरानी तथा खतरे के संकेतों की पहचान बुनियादी तत्व हैं। राजस्थान जैसे बड़े और भौगोलिक रूप से विविध राज्य में दूरस्थ गांवों तक सेवा पहुंचाने में आंगनवाड़ी केंद्र और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस व्यावहारिक कड़ी बनते हैं।
सार यही है: मातृ स्वास्थ्य में “जांच, पोषण, सुरक्षित प्रसव और रेफरल” चार स्थायी परीक्षा-धुरी हैं।
पूरा नोट खोलें
यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।
7 और खंड पूरे नोट में हैं
स्टडी पैक खोलें