मुख्य तथ्य

  • भारतीय वन सर्वेक्षण की 2021 रिपोर्ट के अनुसार भारत का वन और वृक्ष आवरण 8,09,537 वर्ग किमी, यानी कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24.62% है।
  • राष्ट्रीय वन नीति 1988 का सामान्य लक्ष्य देश के 33% क्षेत्र पर वन आवरण रखना है।
  • जलोढ़ मृदा लगभग 43% कृषि भूमि पर फैली है और गंगा-सिंधु मैदान की सबसे उपजाऊ मृदा मानी जाती है।
  • काली या रेगुर मृदा लगभग 15% कृषि क्षेत्र में मिलती है और कपास के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।
  • भारत की उपयोग योग्य जल उपलब्धता लगभग 1,123 अरब घन मीटर है, जिसमें 690 अरब घन मीटर सतही जल और 433 अरब घन मीटर भूजल शामिल है।

मुख्य बिंदु

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    भारतीय वन सर्वेक्षण की 2021 रिपोर्ट के अनुसार भारत का वन और वृक्ष आवरण 8,09,537 वर्ग किमी, यानी कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24.62% है।

  2. 2

    राष्ट्रीय वन नीति 1988 का सामान्य लक्ष्य देश के 33% क्षेत्र पर वन आवरण रखना है।

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    भारत में प्रमुख वन प्रकार उष्णकटिबंधीय सदाबहार, उष्णकटिबंधीय पर्णपाती, कंटीली झाड़ी, पर्वतीय और मैंग्रोव वन हैं।

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    जलोढ़ मृदा लगभग 43% कृषि भूमि पर फैली है और गंगा-सिंधु मैदान की सबसे उपजाऊ मृदा मानी जाती है।

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    काली या रेगुर मृदा लगभग 15% कृषि क्षेत्र में मिलती है और कपास के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।

  6. 6

    भारत की उपयोग योग्य जल उपलब्धता लगभग 1,123 अरब घन मीटर है, जिसमें 690 अरब घन मीटर सतही जल और 433 अरब घन मीटर भूजल शामिल है।

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    1 अप्रैल 2025 तक भारत के कोयला संसाधन लगभग 400.72 अरब टन हैं और दामोदर घाटी के झरिया-रानीगंज क्षेत्र प्रमुख कोयला पट्टी में आते हैं।

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    कॉप-26 प्रतिबद्धता के अनुसार भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट अ-जीवाश्म ईंधन विद्युत क्षमता का लक्ष्य रखा है।

भारत का प्राकृतिक संसाधन आधार किन भौगोलिक क्षेत्रों से बनता है?

भारत का प्राकृतिक संसाधन आधार हिमालय, सिंधु-गंगा मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, मरुस्थल, तटीय क्षेत्र और द्वीपों की भौगोलिक विविधता से बनता है। भारत सरकार के राष्ट्रीय पोर्टल के अनुसार भारत का कुल क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी है, और इसी बड़े भू-फैलाव में अलग-अलग संसाधन-क्षेत्र बनते हैं। हिमालय, सिंधु-गंगा मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, मरुस्थल, तटीय क्षेत्र और द्वीप अलग-अलग प्रकार के संसाधन देते हैं। प्रायद्वीपीय भारत की पुरानी चट्टानी संरचनाएँ कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अभ्रक जैसे खनिजों से जुड़ी हैं। सिंधु-गंगा मैदान में जलोढ़ निक्षेप, उपजाऊ मृदा और भूजल कृषि को आधार देते हैं। हिमालय और तटीय क्षेत्र जल, जैव विविधता, मत्स्य संसाधन, जलविद्युत और अपतटीय तेल से जुड़े हैं।

संसाधनों को सामान्य रूप से नवीकरणीय और अनवीकरणीय वर्गों में रखा जाता है। वन, जल, मृदा, सौर और पवन नवीकरणीय संसाधन हैं, जबकि कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और खनिज अनवीकरणीय संसाधन हैं। वस्तुनिष्ठ परीक्षा में इस वर्गीकरण से सीधे प्रश्न बन सकते हैं, इसलिए उदाहरणों को संसाधन-प्रकार के साथ याद रखना उपयोगी है।

सार यह है कि भारत की संसाधन-भूगोल को मैदान, पठार, हिमालय और तट के आधार पर समझना चाहिए।

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