भौतिक स्वरूप, जलवायु, अपवाह तंत्र और प्राकृतिक वनस्पति
मुख्य तथ्य
- भारत की प्रमुख भौगोलिक इकाइयां उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप हैं।
- हिमालय में हिमाद्रि, हिमाचल और शिवालिक को भीतर से बाहर की समानांतर पट्टियों के रूप में पढ़ना उपयोगी है।
- उत्तरी मैदान में भाबर, तराई, बांगर और खादर का क्रम कंकरीले पाद-क्षेत्र से नई बाढ़भूमि तक का बदलाव दिखाता है।
- प्रायद्वीपीय पठार भारत का पुराना कठोर भाग है; इसमें मध्य उच्चभूमि, दक्कन पठार, विंध्य-सतपुड़ा और नर्मदा-ताप्ती गर्त महत्त्वपूर्ण हैं।
- पश्चिमी घाट ऊंचे और अधिक सतत हैं, जबकि पूर्वी घाट महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियों से अधिक कटे हुए हैं।
मुख्य बिंदु
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भारत की प्रमुख भौगोलिक इकाइयां उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप हैं।
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हिमालय में हिमाद्रि, हिमाचल और शिवालिक को भीतर से बाहर की समानांतर पट्टियों के रूप में पढ़ना उपयोगी है।
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उत्तरी मैदान में भाबर, तराई, बांगर और खादर का क्रम कंकरीले पाद-क्षेत्र से नई बाढ़भूमि तक का बदलाव दिखाता है।
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प्रायद्वीपीय पठार भारत का पुराना कठोर भाग है; इसमें मध्य उच्चभूमि, दक्कन पठार, विंध्य-सतपुड़ा और नर्मदा-ताप्ती गर्त महत्त्वपूर्ण हैं।
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पश्चिमी घाट ऊंचे और अधिक सतत हैं, जबकि पूर्वी घाट महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियों से अधिक कटे हुए हैं।
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पश्चिमी राजस्थान का थार मरुस्थल शुष्क जलवायु, विरल वनस्पति, टीले, लूणी और अंतर्देशीय अपवाह का प्रमुख उदाहरण है।
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पश्चिमी तट अपेक्षाकृत संकरा है, पूर्वी तट डेल्टाई है, और अंडमान-निकोबार तथा लक्षद्वीप की उत्पत्ति अलग-अलग भौगोलिक प्रक्रियाओं से जुड़ी है।
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भारत का भौतिक ढांचा किन बड़े भागों में बंटा है?
भारत का भौतिक ढांचा सामान्यतः उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप इन छह बड़े भागों में समझा जाता है। भारत का भौतिक स्वरूप एक समान मैदान नहीं है। जनगणना 2011 की आधिकारिक तालिकाओं में भारत का भौगोलिक क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर दर्ज है, इसलिए इतने बड़े देश में ऊंचाई, ढाल, चट्टान, जलवायु, नदियां और वनस्पति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। इसे सामान्यतः छह बड़े भागों में पढ़ा जाता है: उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप। इतने बड़े देश में ऊंचाई, ढाल, चट्टान, जलवायु, नदियां और वनस्पति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में केवल नाम याद करना पर्याप्त नहीं है; यह भी समझना होता है कि कौन-सा भाग पर्वतीय है, कौन-सा जलोढ़ है, कौन-सा पुरानी चट्टानों वाला है और कौन-सा शुष्क या तटीय प्रकृति का है।
हिमालय युवा, ऊंचा और विवर्तनिक रूप से सक्रिय पर्वतीय भाग है। इसके विपरीत प्रायद्वीपीय पठार पुराना, कठोर और अपेक्षाकृत स्थिर भाग है। सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान नदी-अवसाद से बना बड़ा जलोढ़ क्षेत्र है। भारतीय मरुस्थल में जल-अभाव, पवन-कार्य और लवणीय अवसाद दिखाई देते हैं। तटीय मैदान समुद्र और नदियों की संयुक्त क्रिया से बनते हैं, जबकि द्वीप समुद्रतल, ज्वालामुखीय और प्रवाल इतिहास से जुड़े हैं।
याद रखने की बात: भारत के भौतिक भागों को राहत, अपवाह और जलवायु के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए।
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