टीकाकरण — समय-सारणी, टीके और सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम
मुख्य तथ्य
- 1978 में विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हुआ और 1985 में ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार के साथ इसका नाम सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम रखा गया।
- राष्ट्रीय टीकाकरण समय-सारणी में जन्म पर बीसीजी, ओपीवी-0 और हेपेटाइटिस बी जन्म-खुराक दी जाती है;
- 6, 10 और 14 सप्ताह की आयु टीकाकरण की सबसे महत्त्वपूर्ण शिशु-खिड़कियां हैं, जिनमें ओपीवी, पेंटावेलेंट और रोटावायरस टीके की क्रमिक खुराकें दी जाती हैं।
- 9-12 माह पर एमआर-1, पीसीवी बूस्टर, विटामिन ए की पहली खुराक और चयनित क्षेत्रों में जेई-1 दिया जाता है;
- मिशन इंद्रधनुष दिसंबर 2014 में कम टीकाकरण कवरेज वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए शुरू किया गया।
मुख्य बिंदु
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1978 में विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हुआ और 1985 में ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार के साथ इसका नाम सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम रखा गया।
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सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम गर्भवती महिलाओं और बच्चों को सरकारी व्यवस्था में निशुल्क टीके देता है तथा यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का मुख्य घटक है।
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राष्ट्रीय टीकाकरण समय-सारणी में जन्म पर बीसीजी, ओपीवी-0 और हेपेटाइटिस बी जन्म-खुराक दी जाती है; हेपेटाइटिस बी जन्म-खुराक आदर्श रूप से 24 घंटे के भीतर दी जाती है।
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6, 10 और 14 सप्ताह की आयु टीकाकरण की सबसे महत्त्वपूर्ण शिशु-खिड़कियां हैं, जिनमें ओपीवी, पेंटावेलेंट और रोटावायरस टीके की क्रमिक खुराकें दी जाती हैं।
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9-12 माह पर एमआर-1, पीसीवी बूस्टर, विटामिन ए की पहली खुराक और चयनित क्षेत्रों में जेई-1 दिया जाता है; 16-24 माह पर एमआर-2, डीपीटी बूस्टर-1 और ओपीवी बूस्टर आते हैं।
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मिशन इंद्रधनुष दिसंबर 2014 में कम टीकाकरण कवरेज वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए शुरू किया गया।
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भारत को 2014 में पोलियो-मुक्त प्रमाणन मिला और 2015 में मातृ एवं नवजात टिटनेस उन्मूलन की उपलब्धि दर्ज हुई।
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टीकाकरण का मतलब क्या है और परीक्षा में इससे कैसे प्रश्न आते हैं?
टीकाकरण का मतलब है शरीर में किसी खास रोग के विरुद्ध सुरक्षित प्रतिरक्षा बनाना, और परीक्षा में इससे उम्र, खुराक-क्रम, रोग-टीका मिलान, कार्यक्रमों के वर्ष तथा क्षेत्र-विशेष टीकों पर सीधे प्रश्न बनते हैं। टीकाकरण का सीधा अर्थ है शरीर में किसी रोग के विरुद्ध सुरक्षित प्रतिरक्षा बनाना। वैक्सीन रोग पैदा करने वाले जीव या उसके अंश को सुरक्षित रूप में शरीर के सामने रखती है, जिससे प्रतिरक्षा-तंत्र भविष्य में असली संक्रमण को जल्दी पहचान सके। मातृ एवं बाल स्वास्थ्य में इसका महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि शिशु, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं संक्रमण से होने वाली मृत्यु और जटिलताओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के निष्कर्षों पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की प्रेस सूचना ब्यूरो विज्ञप्ति के अनुसार, भारत में 12-23 माह के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कवरेज 62 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हुआ। वस्तुनिष्ठ परीक्षा में टीकाकरण से प्रश्न प्रायः उम्र, खुराक-क्रम, रोग-टीका मिलान, कार्यक्रमों के वर्ष, और क्षेत्र-विशेष लागू टीकों पर आते हैं।
टीकाकरण व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ सामुदायिक सुरक्षा भी देता है। जब अधिकतर बच्चों को टीका लग जाता है तो रोग का फैलाव घटता है और कमजोर बच्चों की अप्रत्यक्ष रक्षा होती है। फिर भी यह याद रखना चाहिए कि हर टीका हर रोग को जीवनभर पूरी तरह रोक दे, ऐसा नहीं है; कुछ टीकों में बूस्टर खुराक इसलिए दी जाती है कि प्रतिरक्षा टिकाऊ बनी रहे। महिला पर्यवेक्षक स्तर पर आंगनवाड़ी, आशा और एएनएम के साथ समन्वय, लाभार्थी सूची, छूटी खुराकों की पहचान और अभिभावक परामर्श बहुत उपयोगी काम हैं।
सार यह है: टीकाकरण को केवल इंजेक्शन नहीं, बल्कि समय पर पहचान, लाभार्थी ट्रैकिंग और सुरक्षित सेवा-प्रदाय की पूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रक्रिया के रूप में समझें।
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