मुख्य तथ्य

  • 2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई ICDS भारत सरकार की केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका आधार बाल पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक विकास का समेकित दृष्टिकोण है।
  • ICDS का मुख्य लक्ष्य 0-6 वर्ष के बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य स्तर को सुधारना तथा उनके मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक विकास की नींव रखना है।
  • पूरक पोषण के मुख्य लाभार्थी 6 माह से 6 वर्ष के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं हैं; उद्देश्य घर के भोजन का विकल्प नहीं, पोषण-अंतर कम करना है।
  • पूर्व-प्राथमिक शिक्षा 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्र पर दी जाती है और इसका लक्ष्य औपचारिक स्कूल से पहले तैयारी, भाषा, सामाजिक व्यवहार और ख...
  • 8 मार्च 2018 को शुरू हुआ पोषण अभियान अभिसरण, तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार-परिवर्तन के जरिए कुपोषण घटाने पर केंद्रित है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई ICDS भारत सरकार की केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका आधार बाल पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक विकास का समेकित दृष्टिकोण है।

  2. 2

    ICDS का मुख्य लक्ष्य 0-6 वर्ष के बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य स्तर को सुधारना तथा उनके मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक विकास की नींव रखना है।

  3. 3

    ICDS के छह सेवा घटक हैं: पूरक पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य-जांच, रेफरल सेवा, अनौपचारिक पूर्व-प्राथमिक शिक्षा और पोषण-स्वास्थ्य शिक्षा।

  4. 4

    टीकाकरण, स्वास्थ्य-जांच और रेफरल सेवा स्वास्थ्य-संबंधी घटक हैं; इनका क्रियान्वयन NHM और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे के सहयोग से होता है।

  5. 5

    पूरक पोषण के मुख्य लाभार्थी 6 माह से 6 वर्ष के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं हैं; उद्देश्य घर के भोजन का विकल्प नहीं, पोषण-अंतर कम करना है।

  6. 6

    पूर्व-प्राथमिक शिक्षा 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्र पर दी जाती है और इसका लक्ष्य औपचारिक स्कूल से पहले तैयारी, भाषा, सामाजिक व्यवहार और खेल-आधारित सीखना है।

  7. 7

    8 मार्च 2018 को शुरू हुआ पोषण अभियान अभिसरण, तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार-परिवर्तन के जरिए कुपोषण घटाने पर केंद्रित है।

  8. 8

    मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 ने आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान, किशोरी बालिका योजना, ECCE और सक्षम आंगनवाड़ी ढांचे को व्यापक पोषण मिशन में जोड़ा।

समेकित बाल विकास सेवा योजना की पृष्ठभूमि क्या है और परीक्षा में इसका महत्व क्यों है?

समेकित बाल विकास सेवा योजना भारत की प्रमुख बाल और मातृ कल्याण योजना है, इसलिए महिला पर्यवेक्षक परीक्षा में इसे आंगनवाड़ी सेवा, पोषण, स्वास्थ्य, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा और निगरानी की आधारभूत योजना के रूप में समझना जरूरी है। समेकित बाल विकास सेवा योजना भारत की सबसे महत्वपूर्ण बाल और मातृ कल्याण योजनाओं में गिनी जाती है। यह योजना 2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई और इसका मूल विचार यह था कि छोटे बच्चे की समस्या केवल भोजन की नहीं होती; पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण, देखभाल, सीखने का वातावरण और माता की जानकारी, ये सभी साथ चलें तभी बच्चे का विकास ठीक होता है। इसी कारण इसे समेकित सेवा कहा गया। राष्ट्रीय पोषण नीति में दर्ज है कि समेकित बाल विकास सेवा योजना 1975-76 में 33 प्रायोगिक परियोजनाओं से शुरू हुई थी। महिला पर्यवेक्षक परीक्षा के लिए यह योजना इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आंगनवाड़ी केंद्र, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, लाभार्थी सूची, वृद्धि निगरानी, गृह-भेंट और विभागीय समन्वय इसी ढांचे से जुड़े हैं।

इस योजना का लक्ष्य केवल बीमारी या कुपोषण दिखने पर कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि शुरुआती उम्र में रोकथाम, पहचान और सहायता देना है। 0-6 वर्ष की उम्र में मस्तिष्क, शरीर, भाषा और सामाजिक व्यवहार तेज़ी से विकसित होते हैं। गर्भवती और धात्री महिलाओं की पोषण स्थिति भी बच्चे के जन्म वजन, स्तनपान और शुरुआती देखभाल पर असर डालती है। इसलिए समेकित बाल विकास सेवा योजना को जीवन-चक्र दृष्टिकोण से समझना चाहिए: गर्भावस्था, जन्म, स्तनपान, पूरक आहार, टीकाकरण, पूर्व-प्राथमिक तैयारी और परिवार परामर्श एक ही श्रृंखला के हिस्से हैं।

मुख्य समझ: समेकित बाल विकास सेवा योजना बाल विकास की अलग-अलग सेवाओं को आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से एक साथ जोड़ने वाली आधारभूत योजना है।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

7 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें