मुख्य तथ्य

  • वस्तुनिष्ठ परीक्षा में शुद्ध शब्द पहचानने के लिए ह्रस्व-दीर्घ मात्रा, अनुस्वार, चंद्रबिंदु और संयुक्त व्यंजन अक्सर पूछे जाने वाले आधार हैं।
  • तत्सम शब्दों में बोलचाल का रूप लिखना त्रुटि माना जाता है; जैसे अतिथि, अध्ययन, अनुकूल, अनुसूचित और अभ्यर्थी मानक रूप हैं।
  • द्ध, ष्ट, ष्ण, स्थ, र्थ, ज्ज और ज्ज्व जैसे संयुक्त व्यंजन शब्द का पूरा उत्तर बदल सकते हैं।
  • ण और न का अंतर याद रखना जरूरी है; कुपोषण, परिणाम, प्रमाण, स्मरण, निरीक्षण और विश्लेषण में ण आता है।
  • श, ष और स के अंतर से जुड़े प्रश्नों में निष्कर्ष, निष्पक्ष, स्पष्ट, सृष्टि, श्रेष्ठ और भ्रष्टाचार जैसे रूप उच्च-उपयोगी हैं।

मुख्य बिंदु

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    वस्तुनिष्ठ परीक्षा में शुद्ध शब्द पहचानने के लिए ह्रस्व-दीर्घ मात्रा, अनुस्वार, चंद्रबिंदु और संयुक्त व्यंजन अक्सर पूछे जाने वाले आधार हैं।

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    तत्सम शब्दों में बोलचाल का रूप लिखना त्रुटि माना जाता है; जैसे अतिथि, अध्ययन, अनुकूल, अनुसूचित और अभ्यर्थी मानक रूप हैं।

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    द्ध, ष्ट, ष्ण, स्थ, र्थ, ज्ज और ज्ज्व जैसे संयुक्त व्यंजन शब्द का पूरा उत्तर बदल सकते हैं।

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    ण और न का अंतर याद रखना जरूरी है; कुपोषण, परिणाम, प्रमाण, स्मरण, निरीक्षण और विश्लेषण में ण आता है।

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    श, ष और स के अंतर से जुड़े प्रश्नों में निष्कर्ष, निष्पक्ष, स्पष्ट, सृष्टि, श्रेष्ठ और भ्रष्टाचार जैसे रूप उच्च-उपयोगी हैं।

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    अनुस्वार और अनुनासिक में अनुमान से नहीं, मानक वर्तनी से उत्तर दें; आँचल, संविधान, संवाद, प्रशंसा और संन्यासी जैसे रूप ध्यान में रखें।

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    प्रश्न में केवल शुद्ध रूप माँगा जाए तो उत्तर में व्याख्या नहीं, सीधे शुद्ध शब्द लिखना चाहिए।

महिला सुपरवाइजर परीक्षा में हिंदी व्याकरण कितनी गहराई तक पढ़ना चाहिए?

महिला सुपरवाइजर परीक्षा में हिंदी व्याकरण को शोधपरक गहराई तक नहीं, बल्कि सही पहचान, मानक वर्तनी और तुरंत विकल्प-चयन की परीक्षा-योग्य ऊँचाई तक पढ़ना चाहिए। महिला सुपरवाइजर जैसी भर्ती परीक्षाओं में हिंदी व्याकरण का लक्ष्य गहरी शोधपरक चर्चा नहीं, बल्कि सही पहचान और तुरंत चयन है। संधि, समास, शब्द, मुहावरे और लोकोक्तियाँ जैसे शीर्षक पाठ्यक्रम में व्यापक दिखते हैं, पर वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में अक्सर सही रूप, अर्थ, प्रयोग और वर्तनी के छोटे-छोटे अंतर जाँचे जाते हैं। इसलिए अभ्यास का केंद्र यह होना चाहिए कि उम्मीदवार विकल्पों में दिए गए रूपों में मानक हिंदी को पहचान सके।

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के पर्यवेक्षक महिला अधिकारिता पाठ्यक्रम के अनुसार पूरी लिखित परीक्षा में 150 प्रश्न और 300 अंक रखे गए हैं, इसलिए भाषा-भाग की तैयारी भी अंक-उत्पादक पहचान पर टिकनी चाहिए। शब्द-शुद्धि इसी तैयारी का आधार बनती है। इसमें प्रचलित अशुद्ध रूप के स्थान पर मानक शुद्ध शब्द चुनना होता है। अभ्यास में प्रमुख रूप से मात्रा, अनुस्वार-अनुनासिक, संयुक्त व्यंजन, तत्सम वर्तनी, ण-न और श-ष-स के उदाहरण मिलते हैं। यही भाग वस्तुनिष्ठ परीक्षा के लिए सबसे सीधे उपयोगी है, क्योंकि यहाँ उत्तर अक्सर एक शब्द में तय हो जाता है।

याद रखने की बात: लंबा उत्तर नहीं, शुद्ध और मानक रूप ही अंक दिलाता है।

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