प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) — अवधारणा, महत्व और उपागम
मुख्य तथ्य
- 2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई समेकित बाल विकास सेवा योजना में आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की मुख्य सामुदायिक इकाई...
- 2013 की राष्ट्रीय प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा नीति ने 0-6 वर्ष के बच्चों के समग्र विकास को जीवनभर के सीखने की बुनियाद माना।
- 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने 5+3+3+4 ढांचे में 3-8 वर्ष की आयु को आधारभूत चरण माना, जिसमें 3 वर्ष आंगनवाड़ी या पूर्व-विद्यालय और कक्षा 1-2 शामिल ह...
- 20 अक्टूबर 2022 को जारी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा आधारभूत चरण 3-8 वर्ष के बच्चों के लिए भारत का पहला समेकित पाठ्यचर्या ढांचा है।
- 2021 में शुरू निपुण भारत मिशन का लक्ष्य 2026-27 तक कक्षा 3 के अंत तक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु
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2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई समेकित बाल विकास सेवा योजना में आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की मुख्य सामुदायिक इकाई बने।
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2013 की राष्ट्रीय प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा नीति ने 0-6 वर्ष के बच्चों के समग्र विकास को जीवनभर के सीखने की बुनियाद माना।
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2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने 5+3+3+4 ढांचे में 3-8 वर्ष की आयु को आधारभूत चरण माना, जिसमें 3 वर्ष आंगनवाड़ी या पूर्व-विद्यालय और कक्षा 1-2 शामिल हैं।
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20 अक्टूबर 2022 को जारी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा आधारभूत चरण 3-8 वर्ष के बच्चों के लिए भारत का पहला समेकित पाठ्यचर्या ढांचा है।
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2021 में शुरू निपुण भारत मिशन का लक्ष्य 2026-27 तक कक्षा 3 के अंत तक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता सुनिश्चित करना है।
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10 मई 2023 को शुरू पोषण भी पढ़ाई भी पहल आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाकर पोषण और ईसीसीई दोनों को मजबूत करती है।
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ईसीसीई में खेल-आधारित, गतिविधि-आधारित और अनुभव-आधारित सीखना औपचारिक रटंत शिक्षण से अधिक उपयुक्त माना जाता है।
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ईसीसीई की अवधारणा और आयु-सीमा क्या है?
ईसीसीई की अवधारणा छोटे बच्चे की देखभाल, पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा, भावनात्मक सहारा और खेल-आधारित प्रारंभिक सीखने को साथ लेकर चलती है, और इसकी आयु-सीमा देखभाल के लिए सामान्यतः 0-6 वर्ष तथा विद्यालयी आधारभूत चरण के लिए 3-8 वर्ष समझी जाती है। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का अर्थ केवल छोटे बच्चों को अक्षर और गिनती सिखाना नहीं है। इसका दायरा गर्भपूर्व देखभाल, जन्म के बाद पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा, भावनात्मक सहारा, खेल, भाषा, सामाजिक व्यवहार और सीखने की तैयारी तक फैला है। भारतीय नीति-भाषा में ईसीसीई सामान्यतः 0-6 वर्ष के बच्चों से जुड़ी है, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा-ढांचे में 3-8 वर्ष को आधारभूत चरण के रूप में देखा है। इसलिए परीक्षा में दो स्तर याद रखने चाहिए: देखभाल और विकास के लिए 0-6 वर्ष, तथा विद्यालयी पाठ्यचर्या के आधारभूत चरण के लिए 3-8 वर्ष। राष्ट्रीय ईसीसीई नीति 2013 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने जनगणना 2011 के आधार पर भारत में 0-6 वर्ष आयु-वर्ग के बच्चों की संख्या 15.87 करोड़ बताई थी, इसलिए यह क्षेत्र केवल पूर्व-विद्यालय का छोटा विषय नहीं बल्कि बहुत बड़े बाल-वर्ग से जुड़ी सार्वजनिक जिम्मेदारी है।
ईसीसीई का मूल विचार यह है कि छोटे बच्चे शरीर, भाषा, भाव, बुद्धि और सामाजिक संबंधों के स्तर पर एक साथ विकसित होते हैं। इस अवस्था में बच्चा देखकर, छूकर, सुनकर, बोलकर, दौड़कर, चित्र बनाकर और दूसरों के साथ खेलकर सीखता है। इसलिए अच्छी ईसीसीई व्यवस्था में भोजन, स्वास्थ्य-जांच, स्वच्छता, सुरक्षित वातावरण, कहानी, गीत, बातचीत, स्थानीय खेल और सरल गतिविधियां एक-दूसरे से अलग नहीं रखी जातीं। राजस्थान के किसी गांव के आंगनवाड़ी केंद्र में स्थानीय बीज, पत्ते, मिट्टी, चित्र-पुस्तक और लोकगीत सीखने की सामग्री बन सकते हैं।
याद रखें: ईसीसीई देखभाल और शिक्षा का संयुक्त क्षेत्र है, न कि केवल स्कूल से पहले की पढ़ाई।
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