मुख्य तथ्य

  • 1880 में जन्मे आर्नोल्ड गेसल ने परिपक्वता सिद्धांत को मजबूत आधार दिया; इससे यह समझ बनी कि विकास में जैविक तैयारी की अपनी गति होती है।
  • 1896 में जन्मे जाँ पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास की 4 अवस्थाएँ बताईं;
  • 1896 में जन्मे लेव वाइगोत्स्की ने सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत दिया; निकटस्थ विकास क्षेत्र और सहारा देना बाल-अधिगम के महत्त्वपूर्ण विचार हैं।
  • 1902 में जन्मे एरिक एरिकसन ने मनोसामाजिक विकास की 8 अवस्थाएँ बताईं;
  • 1927 में जन्मे लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को पूर्व-परंपरागत, परंपरागत और उत्तर-परंपरागत स्तरों में समझाया।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    1880 में जन्मे आर्नोल्ड गेसल ने परिपक्वता सिद्धांत को मजबूत आधार दिया; इससे यह समझ बनी कि विकास में जैविक तैयारी की अपनी गति होती है।

  2. 2

    1896 में जन्मे जाँ पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास की 4 अवस्थाएँ बताईं; वस्तु स्थायित्व, संरक्षण और अमूर्त चिंतन जैसे बिंदु MCQ में बार-बार पूछे जाते हैं।

  3. 3

    1896 में जन्मे लेव वाइगोत्स्की ने सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत दिया; निकटस्थ विकास क्षेत्र और सहारा देना बाल-अधिगम के महत्त्वपूर्ण विचार हैं।

  4. 4

    1902 में जन्मे एरिक एरिकसन ने मनोसामाजिक विकास की 8 अवस्थाएँ बताईं; विश्वास बनाम अविश्वास से पहचान बनाम भूमिका-द्वंद्व तक की कड़ियाँ परीक्षा में उपयोगी हैं।

  5. 5

    1927 में जन्मे लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को पूर्व-परंपरागत, परंपरागत और उत्तर-परंपरागत स्तरों में समझाया।

  6. 6

    2 अक्टूबर 1975 को भारत में ICDS शुरू हुआ; आंगनवाड़ी के माध्यम से पोषण, स्वास्थ्य-जांच, टीकाकरण और पूर्व-विद्यालय शिक्षा को जोड़ा गया।

  7. 7

    20 नवंबर 1989 को बाल अधिकार अभिसमय संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनाया गया; बाल संरक्षण, भागीदारी और विकास के अधिकारों को वैश्विक मान्यता मिली।

अभिवृद्धि और विकास में क्या अंतर है?

अभिवृद्धि शरीर के आकार, वजन, लंबाई और अंगों में मापी जा सकने वाली मात्रात्मक बढ़ोतरी है, जबकि विकास व्यवहार, भाषा, समझ, सामाजिकता, भावनात्मक नियंत्रण और कार्यक्षमता में होने वाला व्यापक गुणात्मक परिवर्तन है। जनगणना 2011 के अनुसार भारत में 0-6 वर्ष आयु-वर्ग के बच्चों की आबादी 15.88 करोड़ थी, इसलिए बाल-अभिवृद्धि और बाल-विकास को समझना केवल सिद्धांत नहीं, बहुत बड़े बाल-समूह की निगरानी से जुड़ा व्यवहारिक काम भी है। अभिवृद्धि का अर्थ शरीर के आकार, वजन, लंबाई और अंगों की माप में होने वाली मात्रात्मक बढ़ोतरी से है। इसे सेंटीमीटर, किलोग्राम, दंत-विकास, हड्डी की आयु या ऊँचाई-वजन चार्ट से मापा जा सकता है। शिशु का वजन बढ़ना, लंबाई बढ़ना, सिर की परिधि बढ़ना और मांसपेशियों का मजबूत होना अभिवृद्धि के उदाहरण हैं। अभिवृद्धि सामान्यतः शरीर की परिपक्वता से जुड़ी होती है और किशोरावस्था के बाद इसकी गति बहुत कम हो जाती है।

विकास का अर्थ कार्यक्षमता, व्यवहार, समझ, भाषा, सामाजिकता, भावनात्मक नियंत्रण और नैतिक निर्णय में गुणात्मक परिवर्तन से है। बच्चा पहले बिना उद्देश्य हाथ-पैर चलाता है, फिर वस्तु पकड़ता है, फिर खेल में नियम समझता है और बाद में कारण-परिणाम पर विचार कर पाता है। यह विकास है, क्योंकि यहाँ केवल आकार नहीं बदल रहा, बल्कि क्षमता और संगठन बदल रहा है। बाल विकास में अभिवृद्धि शामिल है, पर विकास उससे बड़ा विचार है। आरएसएसबी महिला पर्यवेक्षक जैसी परीक्षा में यह अंतर इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक को बच्चे के पोषण के साथ उसके व्यवहार, भाषा और सीखने की प्रगति भी देखनी होती है।

याद रखने योग्य बात: अभिवृद्धि मापी जाती है, विकास समझा और आंका जाता है।

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