विकासात्मक अवस्थाएँ और उपलब्धियाँ — शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक, संवेगात्मक, भाषाई
मुख्य तथ्य
- 1905 में बिने-साइमन बुद्धि मापनी प्रकाशित हुई; बच्चों की सीखने की कठिनाइयों को मनोवैज्ञानिक परीक्षण से पहचानने का यह शुरुआती आधार बनी।
- 1926 में जीन पियाजे की लैंग्वेज एंड थॉट ऑफ द चाइल्ड का अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित हुआ;
- 1950 में एरिक एरिक्सन की पुस्तक चाइल्डहुड एंड सोसाइटी प्रकाशित हुई; इसमें मनोसामाजिक विकास को जीवन-भर चलने वाली अवस्थाओं के रूप में समझाया गया।
- 1962 में लेव वाइगोत्स्की की थॉट एंड लैंग्वेज अंग्रेजी में प्रकाशित हुई;
- 2 अक्टूबर 1975 को ICDS शुरू हुआ; 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-विद्यालय सेवाओं का यह प्रमुख कार्यक्...
मुख्य बिंदु
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1905 में बिने-साइमन बुद्धि मापनी प्रकाशित हुई; बच्चों की सीखने की कठिनाइयों को मनोवैज्ञानिक परीक्षण से पहचानने का यह शुरुआती आधार बनी।
- 2
1926 में जीन पियाजे की लैंग्वेज एंड थॉट ऑफ द चाइल्ड का अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित हुआ; बाल-संज्ञान को वयस्क सोच की छोटी प्रति नहीं, बल्कि अलग विकास-क्रम माना गया।
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1950 में एरिक एरिक्सन की पुस्तक चाइल्डहुड एंड सोसाइटी प्रकाशित हुई; इसमें मनोसामाजिक विकास को जीवन-भर चलने वाली अवस्थाओं के रूप में समझाया गया।
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1962 में लेव वाइगोत्स्की की थॉट एंड लैंग्वेज अंग्रेजी में प्रकाशित हुई; सामाजिक संपर्क और भाषा को संज्ञानात्मक विकास से जोड़ने का विचार परीक्षा-योग्य बना।
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2 अक्टूबर 1975 को ICDS शुरू हुआ; 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-विद्यालय सेवाओं का यह प्रमुख कार्यक्रम है।
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20 नवंबर 1989 को संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय अपनाया गया; बालक के अस्तित्व, विकास, संरक्षण और भागीदारी को अधिकार के रूप में मान्यता मिली।
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2006 में WHO ने बाल वृद्धि मानक जारी किए; 0-5 वर्ष के बच्चों की वृद्धि निगरानी में आयु, वजन, लंबाई और वृद्धि-वक्र को मानक संदर्भ मिला।
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वृद्धि, विकास और परिपक्वता में क्या अंतर है?
वृद्धि शरीर के माप में बदलाव है, विकास बच्चे की कार्यक्षमता और व्यवहार का फैलाव है, और परिपक्वता शरीर-मन की जैविक तैयारी है। बाल विकास का अर्थ केवल शरीर के आकार का बढ़ना नहीं है। वृद्धि सामान्यतः लंबाई, वजन, सिर की परिधि और शरीर के अनुपात जैसे मापनीय बदलावों से जुड़ी होती है, जबकि विकास में शारीरिक, संज्ञानात्मक, भाषाई, सामाजिक और संवेगात्मक कार्यक्षमता का क्रमिक विस्तार शामिल है। परिपक्वता जैविक तैयारी है; जैसे तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों का तैयार होना। सीखना अनुभव, अभ्यास और वातावरण से आता है। इसलिए कोई बच्चा चलना केवल सिखाने से नहीं सीखता; शरीर की तैयारी और अभ्यास, दोनों चाहिए। नीति आयोग के आईसीडीएस मूल्यांकन के अनुसार आंगनवाड़ी सेवा बच्चों और माताओं के लिए छह मुख्य सेवाएँ देती है, इसलिए विकास को केवल वजन या लंबाई तक सीमित करके नहीं पढ़ा जा सकता।
विकास के कुछ सामान्य सिद्धांत वस्तुनिष्ठ परीक्षा में बार-बार उपयोगी होते हैं। विकास सिर से पैर की ओर और शरीर के केंद्र से बाहरी अंगों की ओर बढ़ता है। सामान्य से विशिष्ट क्रिया की दिशा भी दिखती है; बच्चा पहले पूरे हाथ से वस्तु पकड़ता है, फिर अंगूठे और तर्जनी से छोटी वस्तु उठाता है। विकास सतत भी है और अवस्थात्मक भी; गति बच्चों में अलग हो सकती है, पर क्रम सामान्यतः समान रहता है। आनुवंशिकता और वातावरण दोनों की भूमिका रहती है।
मुख्य सूत्र: वृद्धि शरीर का माप बताती है, विकास बच्चे की कार्यक्षमता और व्यवहार का फैलाव बताता है। परीक्षा में जब वृद्धि, विकास, परिपक्वता और सीखने को साथ पूछा जाए, तो उत्तर में माप, कार्यक्षमता, जैविक तैयारी और अनुभव-आधारित अभ्यास को अलग-अलग पहचानना चाहिए।
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