आंगनवाड़ी केंद्र का संचालन और पर्यवेक्षक की भूमिका
मुख्य तथ्य
- समेकित बाल विकास सेवाएं 2 अक्टूबर 1975 को 33 परियोजनाओं से शुरू हुईं;
- आंगनवाड़ी केंद्र इस कार्यक्रम की ग्राम और वार्ड स्तर की सेवा इकाई है, जहां पूरक पोषण, वृद्धि निगरानी, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण में सहयोग, रेफरल और पोषण...
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समुदाय और विभाग के बीच मुख्य कड़ी है; सहायिका केंद्र की स्वच्छता, भोजन वितरण, बच्चों की देखभाल और दैनिक व्यवस्था में सहयोग करती ह...
- आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की संयुक्त भूमिका मातृ-शिशु स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण है;
- पर्यवेक्षक या मुख्य सेविका सेक्टर स्तर पर कई आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी करती है;
मुख्य बिंदु
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समेकित बाल विकास सेवाएं 2 अक्टूबर 1975 को 33 परियोजनाओं से शुरू हुईं; इसका केंद्र बिंदु 0 से 6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा से जोड़ना है।
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आंगनवाड़ी केंद्र इस कार्यक्रम की ग्राम और वार्ड स्तर की सेवा इकाई है, जहां पूरक पोषण, वृद्धि निगरानी, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण में सहयोग, रेफरल और पोषण-स्वास्थ्य शिक्षा दी जाती है।
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आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समुदाय और विभाग के बीच मुख्य कड़ी है; सहायिका केंद्र की स्वच्छता, भोजन वितरण, बच्चों की देखभाल और दैनिक व्यवस्था में सहयोग करती है।
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आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की संयुक्त भूमिका मातृ-शिशु स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण है; टीकाकरण, प्रसवपूर्व देखभाल, पोषण परामर्श और रेफरल इन्हीं के समन्वय से मजबूत होते हैं।
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पर्यवेक्षक या मुख्य सेविका सेक्टर स्तर पर कई आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी करती है; उसका कार्य रिकॉर्ड जांच, गृह भ्रमण सत्यापन, प्रशिक्षण, समस्या समाधान और रिपोर्टिंग है।
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पोषण ट्रैकर 1 मार्च 2021 से मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के अंतर्गत वास्तविक समय के करीब निगरानी का डिजिटल साधन है।
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ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण दिवस में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और समुदाय एक मंच पर आते हैं; यह टीकाकरण, जांच, परामर्श और सेवा-संतृप्ति का प्रमुख अवसर है।
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आंगनवाड़ी केंद्र क्या है और उसका मुख्य काम क्या होता है?
आंगनवाड़ी केंद्र समेकित बाल विकास सेवाओं की स्थानीय सेवा इकाई है, जो बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक सीखने और मातृ देखभाल को गांव या वार्ड के स्तर पर एक जगह जोड़ती है। आंगनवाड़ी केंद्र भारत में समेकित बाल विकास सेवाओं की सबसे निचली और सबसे दिखाई देने वाली इकाई है। इसका उद्देश्य केवल बच्चों को भोजन देना नहीं है, बल्कि छोटे बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक सीखने और माताओं की देखभाल को एक ही स्थानीय मंच पर लाना है। 0 से 6 वर्ष के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं और कई स्थितियों में किशोरियां इसके मुख्य लाभार्थी समूह माने जाते हैं। भर्ती परीक्षा में यह याद रखना उपयोगी है कि आंगनवाड़ी केंद्र को स्वास्थ्य उपकेंद्र, विद्यालय, पंचायत और परिवार के बीच जोड़ने वाली सेवा इकाई माना जाता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पीआईबी सूचना के अनुसार मार्च 2026 तक पोषण ट्रैकर में लगभग 14,03,170 आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी हो रही थी।
समेकित बाल विकास सेवाओं के प्रमुख उद्देश्यों में बच्चों की पोषण और स्वास्थ्य स्थिति सुधारना, शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास की नींव रखना, मृत्यु, बीमारी, कुपोषण और स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति घटाना, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और माताओं की देखभाल क्षमता को मजबूत करना शामिल है। इसलिए आंगनवाड़ी केंद्र को केवल कल्याण योजना का वितरण बिंदु समझना अधूरा है; यह बाल विकास, मातृ स्वास्थ्य और सामुदायिक व्यवहार-परिवर्तन का स्थानीय केंद्र भी है।
सार यह है कि आंगनवाड़ी केंद्र सेवा वितरण, निगरानी और समुदाय से सीधा संपर्क रखने वाली आधारभूत संस्था है।
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