किशोर स्वास्थ्य और पोषण
मुख्य तथ्य
- WHO और भारत की स्वास्थ्य कार्यक्रम भाषा में किशोरावस्था सामान्यतः 10-19 वर्ष की आयु मानी जाती है;
- 2012-13 में शुरू WIFS कार्यक्रम किशोरों में एनीमिया घटाने के लिए साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड सेवन और साल में 2 बार कृमिनाशन पर आधारित है।
- 7 जनवरी 2014 को शुरू RKSK ने किशोर स्वास्थ्य को केवल प्रजनन स्वास्थ्य से आगे बढ़ाकर पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, नशा-निवारण, गैर-संचारी रोग, चोट-हिंसा और ल...
- 2011 में शुरू मासिक धर्म स्वच्छता योजना ग्रामीण किशोरियों में जागरूकता, सस्ती स्वच्छ सामग्री की उपलब्धता और सुरक्षित निपटान से जुड़ी है।
- 2010 में SABLA किशोरियों के सशक्तीकरण के लिए शुरू हुई; वर्तमान SAG मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और POSHAN 2.0 के तहत आकांक्षी जिलों और पूर्वोत्तर में 14-18 वर...
मुख्य बिंदु
- 1
WHO और भारत की स्वास्थ्य कार्यक्रम भाषा में किशोरावस्था सामान्यतः 10-19 वर्ष की आयु मानी जाती है; यह बाल्यावस्था से वयस्कता तक तेज शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बदलाव की अवधि है।
- 2
2012-13 में शुरू WIFS कार्यक्रम किशोरों में एनीमिया घटाने के लिए साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड सेवन और साल में 2 बार कृमिनाशन पर आधारित है।
- 3
7 जनवरी 2014 को शुरू RKSK ने किशोर स्वास्थ्य को केवल प्रजनन स्वास्थ्य से आगे बढ़ाकर पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, नशा-निवारण, गैर-संचारी रोग, चोट-हिंसा और लैंगिक स्वास्थ्य तक फैलाया।
- 4
2011 में शुरू मासिक धर्म स्वच्छता योजना ग्रामीण किशोरियों में जागरूकता, सस्ती स्वच्छ सामग्री की उपलब्धता और सुरक्षित निपटान से जुड़ी है।
- 5
2010 में SABLA किशोरियों के सशक्तीकरण के लिए शुरू हुई; वर्तमान SAG मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और POSHAN 2.0 के तहत आकांक्षी जिलों और पूर्वोत्तर में 14-18 वर्ष की किशोरियों से जुड़ी है।
- 6
2018 में शुरू एनीमिया मुक्त भारत रणनीति में 6 लक्षित लाभार्थी समूह और 6 प्रमुख हस्तक्षेप रखे गए; किशोर लड़के-लड़कियां इसके महत्वपूर्ण समूह हैं।
- 7
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार लड़की की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष है; किशोर स्वास्थ्य में यह अधिकार और सुरक्षा का बुनियादी तथ्य है।
आगे पढ़ें
किशोरावस्था में कौन-कौन से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बदलाव होते हैं?
किशोरावस्था में 10-19 वर्ष के लड़के-लड़कियों के शरीर, सोच, भावनाओं और सामाजिक भूमिका में तेज बदलाव होते हैं, इसलिए इसे केवल उम्र का पड़ाव नहीं बल्कि स्वास्थ्य, पहचान और सहारे की संवेदनशील अवस्था माना जाता है। किशोरावस्था 10-19 वर्ष की वह अवस्था है जिसमें शरीर, सोच, भावनाओं और सामाजिक भूमिका में तेजी से परिवर्तन होते हैं। इस उम्र में लंबाई और वजन तेजी से बढ़ते हैं, मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं, जननांगों का विकास होता है और द्वितीयक लैंगिक लक्षण दिखाई देते हैं। लड़कियों में स्तन-विकास, कूल्हों का फैलना और मासिक धर्म शुरू होना सामान्य बदलाव हैं, जबकि लड़कों में आवाज भारी होना, चेहरे पर बाल आना और मांसपेशी वृद्धि प्रमुख है। इन बदलावों की उम्र हर बच्चे में समान नहीं होती, इसलिए जल्दी या देर से यौवन आने पर बिना मजाक और डर के सही सलाह देना जरूरी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम मार्गदर्शिका के अनुसार भारत में किशोरों की संख्या 25.3 करोड़ है, इसलिए यह विषय जनसंख्या के बहुत बड़े हिस्से से जुड़ा है।
मानसिक स्तर पर किशोर अपनी पहचान, मित्रता, शरीर-छवि, स्वतंत्र निर्णय और भविष्य को लेकर संवेदनशील होते हैं। परिवार और समुदाय का कठोर नियंत्रण, लिंग-भेद, स्कूल छोड़ना, बाल विवाह, कुपोषण और जानकारी की कमी स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाते हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की महिला पर्यवेक्षक परीक्षा के लिए यह समझना जरूरी है कि आंगनवाड़ी, स्कूल, आशा, एएनएम और परिवार मिलकर किशोरों को पोषण, स्वच्छता, परामर्श और सुरक्षा से जोड़ते हैं। राजस्थान जैसे बड़े ग्रामीण राज्य में दूरी, पानी की कमी और सामाजिक संकोच भी सेवा-प्राप्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
मुख्य सीख: किशोर स्वास्थ्य को केवल बीमारी नहीं, बल्कि वृद्धि, व्यवहार, अधिकार और सामाजिक सहारे के संयुक्त विषय के रूप में पढ़ें।
पूरा नोट खोलें
यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।
7 और खंड पूरे नोट में हैं
स्टडी पैक खोलें