मुख्य तथ्य

  • भौतिक परिवर्तन में अवस्था, आकार, आकृति या घुलनशीलता बदल सकती है, पर नया पदार्थ नहीं बनता।
  • रासायनिक परिवर्तन में एक या अधिक नए पदार्थ बनते हैं, जिनके गुण आरंभिक पदार्थों से भिन्न होते हैं।
  • पिघलना, जमना, वाष्पीकरण, संघनन, घुलना और क्रिस्टलीकरण आमतौर पर भौतिक परिवर्तन हैं।
  • जलना, जंग लगना, दही बनना, पाचन, खाना पकना और खट्टा होना रासायनिक परिवर्तन हैं।
  • रासायनिक परिवर्तन के सामान्य संकेत रंग-परिवर्तन, गैस निकलना, अवक्षेप बनना, ऊष्मा, प्रकाश, गंध या स्वाद में बदलाव हैं।

मुख्य बिंदु

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    भौतिक परिवर्तन में अवस्था, आकार, आकृति या घुलनशीलता बदल सकती है, पर नया पदार्थ नहीं बनता।

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    रासायनिक परिवर्तन में एक या अधिक नए पदार्थ बनते हैं, जिनके गुण आरंभिक पदार्थों से भिन्न होते हैं।

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    पिघलना, जमना, वाष्पीकरण, संघनन, घुलना और क्रिस्टलीकरण आमतौर पर भौतिक परिवर्तन हैं।

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    जलना, जंग लगना, दही बनना, पाचन, खाना पकना और खट्टा होना रासायनिक परिवर्तन हैं।

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    रासायनिक परिवर्तन के सामान्य संकेत रंग-परिवर्तन, गैस निकलना, अवक्षेप बनना, ऊष्मा, प्रकाश, गंध या स्वाद में बदलाव हैं।

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    परिवर्तन को उलटा जा सकता है या नहीं, यह केवल एक संकेत है; असली कसौटी यह है कि नया पदार्थ बना या नहीं।

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    ऑक्सीकरण का अर्थ ऑक्सीजन जुड़ना, हाइड्रोजन हटना या इलेक्ट्रॉन खोना है।

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    अपचयन का अर्थ ऑक्सीजन हटना, हाइड्रोजन जुड़ना या इलेक्ट्रॉन पाना है।

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    ऑक्सीकारक दूसरे पदार्थ का ऑक्सीकरण कराता है और स्वयं अपचयित होता है।

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    अपचायक दूसरे पदार्थ का अपचयन कराता है और स्वयं ऑक्सीकृत होता है।

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    जंग लगना, दहन, वसा और तेलों का बासी होना, श्वसन, रंग उड़ना और धातु-विस्थापन रेडॉक्स से जुड़े आम उदाहरण हैं।

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    उत्प्रेरक अभिक्रिया की गति बदलता है और अभिक्रिया के आखिर में फिर मिल जाता है।

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    धनात्मक उत्प्रेरक अभिक्रिया को तेज करता है; अवरोधक अभिक्रिया को धीमा करता है, लेकिन वह उत्प्रेरक नहीं है।

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    एंजाइम जैविक उत्प्रेरक हैं, जो पाचन जैसी जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं को हल्की परिस्थितियों में तेज करते हैं।

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    कैटेलिटिक कन्वर्टर उत्प्रेरक धातुओं की मदद से गाड़ियों के धुएँ में मौजूद हानिकारक गैसों को कम हानिकारक गैसों में बदलता है।

पदार्थ में भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों में अंतर कैसे पहचानें?

पदार्थ में परिवर्तन पहचानने की सबसे भरोसेमंद कसौटी यह है कि पहले और बाद में नया पदार्थ बना है या केवल रूप, दशा, आकार या व्यवस्था बदली है। पदार्थ में परिवर्तन का अर्थ है कि किसी वस्तु या पदार्थ की पहले वाली स्थिति में कोई दिखाई देने वाला या मापा जा सकने वाला अंतर आ गया है। स्कूली विज्ञान और एलडीसी के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में पहला काम कोई कठिन समीकरण लगाना नहीं, बल्कि एक सीधा सवाल पूछना है: क्या नया पदार्थ बना है? यदि नया पदार्थ नहीं बना, तो परिवर्तन आमतौर पर भौतिक माना जाएगा। यदि नया पदार्थ बना है, तो परिवर्तन रासायनिक होगा। यही कसौटी बर्फ के पिघलने, कागज फाड़ने, कागज जलाने, लोहे में जंग लगने, भोजन पकने और दूध से दही बनने जैसे उदाहरणों को समझाती है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के एलडीसी 2018 पाठ्यक्रम में रोजमर्रा विज्ञान की सूची का पहला बिंदु भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन, ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाएँ और उत्प्रेरक है।

पदार्थ की अवस्था, आकार, आकृति, रंग, तापमान, गंध, स्वाद, घुलनशीलता, कठोरता या रासायनिक संरचना बदल सकती है। भौतिक परिवर्तन मुख्य रूप से भौतिक गुणों को प्रभावित करते हैं। भौतिक गुण वह गुण है जिसे पदार्थ की पहचान बदले बिना देखा या मापा जा सके, जैसे अवस्था, आकृति, आकार, द्रव्यमान, आयतन, रंग, घनत्व या घुलनशीलता। बर्फ पिघलती है तो ठोस जल द्रव जल बन जाता है। जल जमता है तो द्रव जल फिर बर्फ बन जाता है। दोनों स्थितियों में पदार्थ जल ही रहता है, इसलिए यह भौतिक परिवर्तन है। चीनी पानी में घुलती है तो चीनी पूरे पानी में विलयन के रूप में फैल जाती है; वह कोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनती। यदि पानी को सावधानी से वाष्पित किया जाए, तो चीनी फिर मिल सकती है। इसीलिए चीनी को फिर प्राप्त कर पाना उसके घुलने को भौतिक परिवर्तन मानने का आधार है।

रासायनिक परिवर्तन अलग होते हैं, क्योंकि इनमें मूल पदार्थ एक या अधिक नए पदार्थों में बदल जाते हैं। नए पदार्थ के गुण प्रारंभिक पदार्थ से भिन्न होते हैं। लोहे में जंग लगने पर सतह पर भूरी-लाल जंग बनती है। लोहा और जंग एक ही पदार्थ नहीं हैं। भोजन के पाचन में जटिल खाद्य पदार्थ सरल पदार्थों में टूटते हैं जिन्हें शरीर सोख सकता है। दूध दही बनता है तो सूक्ष्मजीवों की क्रिया से स्वाद, गंध और बनावट बदल जाती है, क्योंकि नए पदार्थ बनते हैं। ये सभी रासायनिक परिवर्तन हैं।

परिवर्तन को उलटा जा सकता है या नहीं, यह उपयोगी संकेत है, लेकिन पक्का नियम नहीं। कई भौतिक परिवर्तन उलटे किए जा सकते हैं: पिघलने को जमाने से, वाष्पीकरण को संघनन से, और घुलने को क्रिस्टलीकरण या विलायक के वाष्पीकरण से उलटा किया जा सकता है। कई रासायनिक परिवर्तन सरल भौतिक तरीकों से उलटना कठिन होता है: जला हुआ कागज फिर कागज नहीं बनता, दही को ठंडा करके दूध नहीं बनाया जा सकता, और जंग केवल पोंछ देने से साफ लोहा नहीं बन जाती। फिर भी परीक्षा में उत्तर केवल इस बात पर आधारित नहीं होना चाहिए कि परिवर्तन उलटा जा सकता है या नहीं। निर्णायक बात नए पदार्थ का बनना है। कुछ भौतिक परिवर्तन व्यवहार में उलटने कठिन हो सकते हैं, जैसे अनाज को पीसकर आटा बनाना, पर केवल पीसने से नया पदार्थ नहीं बनता। कुछ रासायनिक परिवर्तन प्रयोगशाला में दूसरी रासायनिक अभिक्रिया से उलटे भी जा सकते हैं, फिर भी वे रासायनिक परिवर्तन ही रहेंगे क्योंकि उनमें नए पदार्थ शामिल हैं।

त्वरित वर्गीकरण के लिए दो चरण अपनाएँ। पहले देखें कि क्या बदला: अवस्था, आकार, आकृति, घुलनशीलता, रंग, गंध, गैस, ऊष्मा, प्रकाश या अवक्षेप। फिर पूछें कि पदार्थ की रासायनिक पहचान बदली या नहीं। पिघलना, जमना, वाष्पीकरण, संघनन, ऊर्ध्वपातन, कुचलना, काटना, मोड़ना, खींचना, घुलना और क्रिस्टलीकरण आमतौर पर भौतिक परिवर्तन हैं, जब तक उनके साथ कोई अभिक्रिया न हो। जलना, जंग लगना, पाचन, पकना, दही बनना, भोजन का खट्टा होना, किण्वन और संक्षारण रासायनिक परिवर्तन हैं, क्योंकि इनमें नए पदार्थ बनते हैं।

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