राजस्थान की अर्थव्यवस्था — कृषि, उद्योग, अवसंरचना और कल्याणकारी योजनाएँ
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आर्थिक रूपरेखा और परीक्षा दृष्टि
राजस्थान की अर्थव्यवस्था को उसकी भौगोलिक बनावट के साथ पढ़ना चाहिए: बड़ा शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्र, अलग-अलग खनिज पट्टियाँ, पर्यटन नगर, बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा प्रशासन से जुड़ा सेवा क्षेत्र। LDC स्तर की GK में सबसे सुरक्षित तरीका है कि हर क्षेत्र को उसके स्थान-तर्क से जोड़ा जाए। पश्चिमी जिले सूखा-सहिष्णु खेती, पशुपालन और सौर ऊर्जा से जुड़े हैं; अरावली पट्टी और दक्षिण-पूर्वी पठार खनन, पत्थर, सीमेंट, जस्ता, बिजली और सिंचाई-आधारित खेती से जुड़े हैं; जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर और बीकानेर सेवा, शिक्षा, पर्यटन, रक्षा, कोचिंग या व्यापार केंद्र के रूप में याद रखने योग्य हैं। परीक्षा में सामान्यतः लंबे आंकड़ों के बजाय व्यापक वर्गीकरण पूछा जाता है: प्राथमिक क्षेत्र में कृषि, पशुधन, वानिकी और मत्स्य आते हैं; द्वितीयक क्षेत्र में विनिर्माण, खनन, निर्माण और बिजली आते हैं; तृतीयक क्षेत्र में सेवाएँ आती हैं। राजस्थान की अर्थव्यवस्था समान रूप से फैली हुई नहीं है। मरुस्थलीय जिलों में विरल आबादी, चुनी हुई पट्टियों में खनिज-सघनता और बाजारों के बीच बड़ी दूरी सड़क, बिजली और पानी की आपूर्ति को विकास के केंद्र में रखती है। कल्याणकारी योजनाएँ पहचान, DBT, विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से अर्थव्यवस्था को मानव विकास से जोड़ती हैं। उत्पादन और कल्याण को एक जैसा न मानें। सकल राज्य घरेलू उत्पाद राजस्थान के भीतर हुए उत्पादन को मापता है, जबकि प्रति व्यक्ति आय, रोजगार, पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल पहुँच यह दिखाते हैं कि वह उत्पादन रोजमर्रा के जीवन को बेहतर बना रहा है या नहीं। इसी कारण अर्थव्यवस्था के प्रश्नों में फसल, खदान, बिजलीघर, पर्यटन और योजनाएँ एक ही पेपर में साथ आ सकती हैं।
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