राजस्थान की राजव्यवस्था — राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा, उच्च न्यायालय और स्थानीय स्वशासन
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राज्यपाल, मुख्यमंत्री और राज्य कार्यपालिका
राजस्थान में राज्य कार्यपालिका संसदीय पद्धति पर चलती है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जबकि वास्तविक कार्यकारी अधिकार मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास रहते हैं, जब तक वे विधानसभा का विश्वास बनाए रखते हैं। अनुच्छेद 153 हर राज्य के लिए राज्यपाल का प्रावधान करता है, अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित करता है और अनुच्छेद 163 मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद को राज्यपाल की सामान्य सलाह देने वाली संस्था बनाता है। परीक्षा के लिए मूल बात साफ है: काम राज्यपाल के नाम से होता है, पर राजनीतिक जवाबदेही निर्वाचित मंत्रिपरिषद की होती है।
अनुच्छेद 164 नियुक्ति की कड़ी बताता है। राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है और मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। अनुच्छेद 164(1A) के अनुसार मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती और 12 से कम भी नहीं हो सकती। राजस्थान विधानसभा में 200 सदस्य हैं, इसलिए मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या 30 है। राज्यपाल विधानसभा को बुला सकता है, उसे संबोधित कर सकता है, संविधान में दी स्थितियों में कुछ विधेयक सुरक्षित रख सकता है और संवैधानिक तंत्र टूटने की रिपोर्ट भेज सकता है। मुख्यमंत्री विभागों के बंटवारे, मंत्रिमंडल के काम, राज्यपाल को दी जाने वाली सलाह और सरकार की विधायी रणनीति का समन्वय करता है। मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, इसलिए अविश्वास प्रस्ताव या किसी प्रमुख धन संबंधी मामले में हार बहुमत समर्थन का प्रश्न है, केवल किसी एक विभाग के कामकाज का नहीं।
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