राजस्थान की स्थापत्य, चित्रकला, हस्तशिल्प; मेले, त्योहार, लोक संगीत और नृत्य
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किले, महल और राजधानी स्थापत्य
राजस्थान की स्थापत्य को राजवंश, राजधानी और रक्षा-जरूरत के साथ जोड़कर पढ़ना सबसे उपयोगी है। चित्तौड़ मेवाड़ का प्रतीकात्मक किला है और 1303, 1535 तथा 1567-68 के तीन प्रमुख घेरे बार-बार कालक्रम-जाल बनते हैं। कुम्भलगढ़ राणा कुम्भा से जुड़ा है; कुम्भा को दुर्ग-निर्माता के साथ संगीत और साहित्य के संरक्षक के रूप में भी याद रखना चाहिए। जैसलमेर भाटी शासकों की मरुस्थलीय दुर्ग-राजधानी है, जिसकी स्थापना रावल जैसल ने 1156 में की। उदयपुर को उदय सिंह द्वितीय ने 1559 में बसाया, जब चित्तौड़ की सामरिक असुरक्षा स्पष्ट हो चुकी थी। जयपुर सवाई जयसिंह द्वितीय, 1727 और विद्याधर की योजना-परंपरा से जुड़ता है, इसलिए वह केवल महलों का नगर नहीं, बल्कि नियोजित और वैज्ञानिक राजधानी भी है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में रूप के साथ काम भी पढ़ें। पहाड़ी किले दर्रों और सत्ता-केंद्रों की रक्षा करते हैं; मरुस्थलीय किले बस्तियों और व्यापार-पथों को सँभालते हैं; महल दरबारी अधिकार दिखाते हैं; जयपुर में वेधशाला-राजमहल संबंध वैज्ञानिक शासन-दृष्टि का संकेत देते हैं। शुष्क क्षेत्र के किलों और महलों में जल-व्यवस्था विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण होती है। द्वार, परकोटे, जल-संग्रह, मंदिर और भीतर के महल-क्षेत्र कई बार स्मारक-पहचान के संकेत बनते हैं। संस्थापकों को न मिलाएँ: रावल जैसल जैसलमेर से, उदय सिंह द्वितीय उदयपुर से और सवाई जयसिंह द्वितीय जयपुर से जुड़ते हैं।
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