गुर्जर-प्रतिहार और चौहान: आरंभिक शक्ति-केंद्र

लिपिक भर्ती परीक्षा की राजस्थान सामान्य ज्ञान की तैयारी में गुर्जर-प्रतिहारों को उस आरंभिक मध्यकालीन शक्ति के रूप में याद रखें, जिसने राजस्थान, मालवा और गंगा के मैदान को जोड़ा। नागभट्ट प्रथम को 712 में सिंध पर अरब विजय के बाद पश्चिमी सीमा के प्रतिरोध से जोड़ा जाता है, जबकि वत्सराज और नागभट्ट द्वितीय पालों और राष्ट्रकूटों के साथ त्रिपक्षीय संघर्ष में आते हैं। मिहिर भोज, जिनका शासन लगभग 836 से 885 तक माना जाता है, ने कन्नौज को मजबूत प्रतिहार राजसत्ता की प्रतिष्ठा का प्रमुख केंद्र बनाया। मंडोर, जालौर और ओसियां राजस्थान में प्रतिहारों के प्रभाव के प्रमुख प्रमाण हैं; ओसियां 8वीं से 11वीं शताब्दी की हिंदू और जैन मंदिर-कला के लिए खास तौर पर महत्त्वपूर्ण है। बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए लंबी वंशावली के बजाय तीन बातें याद रखें—पश्चिमी सीमा की रक्षा, कन्नौज की प्रतिष्ठा और मंदिरों का संरक्षण।

चौहान शक्ति साकंभरी-सांभर क्षेत्र से विकसित हुई और बाद में अजमेर उसका प्रमुख केंद्र बना। अजयराज को अजमेर से, तारागढ़ को नगर की रक्षा से और अर्णोराज को आनासागर से जोड़ा जाता है। विग्रहराज चतुर्थ, जिन्हें वीसलदेव भी कहा जाता है, ने चौहान प्रभाव को दिल्ली की ओर बढ़ाया। परीक्षा की दृष्टि से पृथ्वीराज चौहान तृतीय सबसे महत्त्वपूर्ण हैं: उन्होंने 1191 में तराइन के प्रथम युद्ध में मुहम्मद गोरी को हराया, पर 1192 में तराइन के द्वितीय युद्ध में पराजित हुए। तराइन (तरावड़ी) हरियाणा के करनाल के पास है; इसलिए राजस्थान इतिहास के प्रश्न में इसकी जगह को लेकर भ्रम हो सकता है। उनके बाद रणथंभौर की चौहान शाखा 1301 में अलाउद्दीन खिलजी की विजय तक बनी रही।

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