राजस्थान का भौतिक ढाँचा

राजस्थान को याद करने का सबसे आसान तरीका चार भौतिक विभागों से शुरू करना है: पश्चिमी मरुस्थल, अरावली पर्वतमाला, पूर्वी मैदान और दक्षिण-पूर्वी पठार। पश्चिमी मरुस्थल जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, नागौर और आसपास के जिलों में फैला रेतीला और शुष्क क्षेत्र है। यहाँ बालू के टीले, कमजोर सतही अपवाह, खारे अवसाद और विरल वनस्पति मिलती है। परीक्षा में इसी पट्टी को कम वर्षा, रेतीली मिट्टी, खारी झीलों और मौसमी धाराओं से जोड़ा जाता है। मरुस्थल एक जैसा नहीं है: उत्तर के नहर-सिंचित हिस्से शुष्क मरुस्थली के मुख्य क्षेत्र से साफ अलग हैं।

अरावली उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में फैली है और राज्य का प्रमुख जल-विभाजक मानी जाती है। यह पश्चिमी और आन्तरिक अपवाह को चम्बल-बनास तथा दक्षिणी नदी तंत्रों से अलग करती है। इसके पूर्व में बनास, बाणगंगा, चम्बल और उनकी सहायक नदियों के जलोढ़ निक्षेपों से बना पूर्वी मैदान है। दक्षिण-पूर्वी पठार का प्रमुख क्षेत्र हाड़ौती है, जिसमें कोटा, बूँदी, बाराँ और झालावाड़ आते हैं। यह क्षेत्र चम्बल घाटी, काली कपास मिट्टी तथा बाँधों और नहरों के मजबूत तंत्र से जुड़ा है। जिलों पर आधारित प्रश्नों में हाड़ौती को मेवाड़ से अलग रखें: दोनों मानचित्र के दक्षिण-पूर्वी आधे में हैं, लेकिन उनकी मिट्टियाँ और नदियों से जुड़ाव अलग हैं। इस क्षेत्रीय अंतर को समझ लेने से मानचित्र में दिए गए भ्रामक विकल्पों से बचना आसान होता है। तथ्यों को याद करने से पहले यह अंतर समझें।

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