मुख्य तथ्य

  • राजस्थान पर्यटन के चार मुख्य आधार हैं: यूनेस्को स्थल, दुर्ग-महल, धार्मिक परिपथ और मरु या वन्यजीव अनुभव।
  • राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग (यूनेस्को विश्व धरोहर) चित्तौड़गढ़, राजसमंद, सवाई माधोपुर, झालावाड़, जयपुर और जैसलमेर को जोड़ते हैं।
  • जयपुर को जयपुर का परकोटा शहर (यूनेस्को विश्व धरोहर) और जंतर मंतर, जयपुर (यूनेस्को विश्व धरोहर) से दोहरा महत्व मिलता है।
  • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (यूनेस्को विश्व धरोहर + रामसर) और रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ अभयारण्य पर्यटन को पर्यावरण भूगोल से जोड़ते हैं।
  • पुष्कर मेला (ऊँट मेला), मरु महोत्सव, जैसलमेर और 'पधारो म्हारे देश' (राजस्थान पर्यटन ब्रांड) जीवंत संस्कृति और ब्रांडिंग को दिखाते हैं।

मुख्य बिंदु

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    राजस्थान पर्यटन के चार मुख्य आधार हैं: यूनेस्को स्थल, दुर्ग-महल, धार्मिक परिपथ और मरु या वन्यजीव अनुभव।

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    राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग (यूनेस्को विश्व धरोहर) चित्तौड़गढ़, राजसमंद, सवाई माधोपुर, झालावाड़, जयपुर और जैसलमेर को जोड़ते हैं।

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    जयपुर को जयपुर का परकोटा शहर (यूनेस्को विश्व धरोहर) और जंतर मंतर, जयपुर (यूनेस्को विश्व धरोहर) से दोहरा महत्व मिलता है।

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    केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (यूनेस्को विश्व धरोहर + रामसर) और रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ अभयारण्य पर्यटन को पर्यावरण भूगोल से जोड़ते हैं।

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    पुष्कर मेला (ऊँट मेला), मरु महोत्सव, जैसलमेर और 'पधारो म्हारे देश' (राजस्थान पर्यटन ब्रांड) जीवंत संस्कृति और ब्रांडिंग को दिखाते हैं।

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    राजस्थान पर्यटन आगमन 2023 में लगभग 17.905 करोड़ घरेलू और 17.0 लाख विदेशी पर्यटक यात्राएँ दर्ज हैं।

राजस्थान का पर्यटन यूनेस्को धरोहर से कैसे समझना चाहिए?

राजस्थान का पर्यटन यूनेस्को धरोहर से इसलिए समझना चाहिए क्योंकि यहाँ दुर्ग, नियोजित नगर, वेधशाला और आर्द्रभूमि, चार अलग धरोहर आधार एक ही राज्य में मिलते हैं। राजस्थान का पर्यटन नक्शा किसी एक स्मारक से नहीं, बल्कि छोटे और सघन यूनेस्को समूह से शुरू होता है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार राजस्थान के पर्वतीय दुर्गों की क्रमिक संपदा में 6 दुर्ग शामिल हैं।

राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग

  • राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग 2013 में यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में अंकित हुए।
  • इसमें चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, रणथंभौर, गागरोन, आमेर और जैसलमेर शामिल हैं।
  • यह समूह अलग-अलग स्थलरूपों में फैला है, इसलिए स्थान भी सिखाता है।
दुर्गस्थान-संकेत
चित्तौड़गढ़पठार पर है
कुम्भलगढ़राजसमंद की अरावली पहाड़ियों में है
रणथंभौरसवाई माधोपुर में है
गागरोनझालावाड़ में नदी-संगम के पास है
आमेरजयपुर के निकट है
जैसलमेरथार में है
  • इस क्रमिक संपदा का महत्व इसलिए है कि राजस्थान के दुर्ग सैन्य स्थापत्य, जल-संचयन, मंदिर, महल और बसावट-रूपों को साथ रखते हैं।
  • संस्कृति मंत्रालय इस शृंखला के लिए 736 हेक्टेयर संपत्ति क्षेत्र और 3,460 हेक्टेयर बफर क्षेत्र भी दर्ज करता है।
  • इसका अर्थ है कि धरोहर इकाई का प्रबंधन केवल छह अलग इमारतों की तरह नहीं, बल्कि परिदृश्य की तरह होता है।

अन्य यूनेस्को आधार

स्थलधरोहर परतमुख्य तथ्य
जंतर मंतर, जयपुरविज्ञान-धरोहरयह सवाई जय सिंह द्वितीय से जुड़ा 18वीं सदी का प्रारंभिक खगोलीय वेध स्थल है और 2010 में यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में अंकित हुआ।
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यानभरतपुर की आर्द्रभूमि पारिस्थितिकीयह यूनेस्को विश्व धरोहर और रामसर स्थल दोनों है; यूनेस्को इसमें 1985 का अंकन, 2,873 हेक्टेयर संपत्ति क्षेत्र और मानदंड 10 दर्ज करता है, जबकि रामसर दर्जा इसे प्रवासी जलपक्षियों से जोड़ता है।
जयपुर का परकोटा शहरनियोजित नगरयह 1727 में सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा बसाया गया नियोजित नगर है और 2019 में यूनेस्को विश्व धरोहर बना।

पर्यटन भूगोल में महत्व

  • ये 4 आधार मिलकर राजस्थान को अलग बनाते हैं।
  • एक ही राज्य में दुर्ग, नगर, वेधशाला और आर्द्रभूमि धरोहर एक ही पाठ्य इकाई में आती है।
  • पर्यटन भूगोल में सांस्कृतिक क्रमिक स्थलों, विज्ञान-स्मारकों, प्राकृतिक आर्द्रभूमियों और नियोजित नगर-धरोहर को अलग-अलग पढ़ना चाहिए।
  • सभी आकर्षणों को महलों की एक जैसी सूची मानना गलत है।

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