पर्यायवाची, विलोम, एक-शब्द, मुहावरे और लोकोक्तियाँ
मुख्य तथ्य
- CET वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के वर्तमान सामान्य हिंदी पाठ्यक्रम में पर्यायवाची, विलोम, वाक्यांश के लिए एक सार्थक शब्द, मुहावरे और लोकोक्तियां साफ-साफ शामि...
- पर्यायवाची में लक्ष्य शब्द का सबसे निकट मानक अर्थ चुनना होता है; अमिय जैसे शब्द में अमृत या सुधा का भाव है, केवल कोई भी अच्छा या मीठा अर्थ नहीं।
- विलोम में अर्थ का उलटा चाहिए; अगम जैसे शब्द में पहुंच से बाहर या कठिन पहुंच का भाव है, इसलिए उत्तर सुगमता की दिशा में जाएगा।
- एक-शब्द प्रश्नों में वाक्यांश को छोटे, स्वीकृत और लिखित हिंदी के शब्द में बदलना होता है।
- मुहावरे का अर्थ शब्दशः नहीं लिया जाता; अंधा होना जैसे मुहावरे में विवेक खोने या मोह में पड़ने का भाव आ सकता है।
मुख्य बिंदु
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CET वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के वर्तमान सामान्य हिंदी पाठ्यक्रम में पर्यायवाची, विलोम, वाक्यांश के लिए एक सार्थक शब्द, मुहावरे और लोकोक्तियां साफ-साफ शामिल हैं।
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पर्यायवाची में लक्ष्य शब्द का सबसे निकट मानक अर्थ चुनना होता है; अमिय जैसे शब्द में अमृत या सुधा का भाव है, केवल कोई भी अच्छा या मीठा अर्थ नहीं।
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विलोम में अर्थ का उलटा चाहिए; अगम जैसे शब्द में पहुंच से बाहर या कठिन पहुंच का भाव है, इसलिए उत्तर सुगमता की दिशा में जाएगा।
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एक-शब्द प्रश्नों में वाक्यांश को छोटे, स्वीकृत और लिखित हिंदी के शब्द में बदलना होता है।
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मुहावरे का अर्थ शब्दशः नहीं लिया जाता; अंधा होना जैसे मुहावरे में विवेक खोने या मोह में पड़ने का भाव आ सकता है।
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जिन मुहावरों के अर्थ अलग-अलग स्रोतों में अलग मिलते हैं, उन्हें पक्के उत्तर का आधार न बनाएं; खुशी के लिए फूला न समाना और घबराहट के लिए हाथ-पाँव फूलना जैसे साफ उदाहरण बेहतर हैं।
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लोकोक्ति प्रायः पूरा लोकवाक्य होती है, जबकि मुहावरा वाक्य के भीतर आने वाला स्थिर पदबंध होता है।
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अंतिम दोहराव सूची पढ़ने से नहीं, अर्थ ढककर याद करने और निकट विकल्पों की तुलना करने से मजबूत होता है।
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परीक्षा में इस अध्याय की भूमिका
सामान्य हिंदी का यह भाग 10+2 स्तर के अभ्यर्थी से भारी साहित्यिक ज्ञान नहीं मांगता। वर्तमान वरिष्ठ माध्यमिक पाठ्यक्रम में पर्यायवाची, विपरीतार्थक या विलोम शब्द, वाक्यांश के लिए एक सार्थक शब्द, मुहावरे और लोकोक्तियां साफ-साफ दिए गए हैं। यहां मुख्य काम यह है कि दिया हुआ शब्द किस अर्थ-क्षेत्र का है, उसका निकट समानार्थी कौन-सा है, उसका सही विपरीत क्या होगा, और किसी मुहावरे या लोकोक्ति का स्वीकृत अर्थ क्या है। CET जैसे एकल योग्यता-पत्र में समय सीमित होता है, इसलिए प्रश्न प्रायः सीधे और विकल्प-आधारित होते हैं। तैयारी भी इसी हिसाब से होनी चाहिए: छोटे शब्द-समूह, सामान्य उदाहरण, और गलत विकल्प हटाने की पक्की आदत।
वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर बहुत दुर्लभ, काव्य-प्रधान या विवादित शब्दों में उलझना उपयोगी नहीं है। फिर भी मानक लिखित हिंदी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अमिय जैसे शब्द में अमृत या सुधा का भाव है; उसे केवल मीठा या अच्छा मानकर उत्तर लगाने से गलती हो सकती है। इसी तरह अगम का संबंध कठिन पहुंच या कठिन समझ से है, इसलिए उसका विलोम सुगम दिशा में जाएगा, किसी समान ध्वनि वाले शब्द की ओर नहीं।
ध्यान रखने की बात: इस अध्याय में सफलता का आधार रटंत सूची नहीं, अर्थ की सही दिशा पहचानना है।
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