मुख्य तथ्य

  • पर्यावरण जीवों का व्यापक परिवेश है, जबकि पारितंत्र वह कार्यशील इकाई है जहाँ जैव और अजैव घटक आपस में क्रिया करते हैं।
  • CET वरिष्ठ माध्यमिक तैयारी में यह विषय पर्यावरण अध्ययन के रूप में पढ़ें: पारितंत्र की संरचना, जैव कारक, ऊर्जा प्रवाह और जैव-भू-रासायनिक चक्र।
  • जैव कारकों में उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक आते हैं; अजैव कारकों में प्रकाश, तापमान, जल, वायु, मिट्टी, खनिज और अम्लता-क्षारीयता की दशाएँ आती हैं।
  • ऊर्जा प्रवाह एक दिशा में होता है: सूर्य की ऊर्जा उत्पादक पकड़ते हैं, वह उपभोक्ताओं तक जाती है और अंत में ऊष्मा के रूप में निकल जाती है;
  • खाद्य-श्रृंखला भोजन संबंध का सरल रास्ता दिखाती है, पर खाद्य-जाल अधिक वास्तविक है क्योंकि एक जीव के कई भोजन स्रोत और कई शिकारी हो सकते हैं।

मुख्य बिंदु

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    पर्यावरण जीवों का व्यापक परिवेश है, जबकि पारितंत्र वह कार्यशील इकाई है जहाँ जैव और अजैव घटक आपस में क्रिया करते हैं।

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    CET वरिष्ठ माध्यमिक तैयारी में यह विषय पर्यावरण अध्ययन के रूप में पढ़ें: पारितंत्र की संरचना, जैव कारक, ऊर्जा प्रवाह और जैव-भू-रासायनिक चक्र।

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    जैव कारकों में उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक आते हैं; अजैव कारकों में प्रकाश, तापमान, जल, वायु, मिट्टी, खनिज और अम्लता-क्षारीयता की दशाएँ आती हैं।

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    ऊर्जा प्रवाह एक दिशा में होता है: सूर्य की ऊर्जा उत्पादक पकड़ते हैं, वह उपभोक्ताओं तक जाती है और अंत में ऊष्मा के रूप में निकल जाती है; पोषक पदार्थ चक्रों में घूमते रहते हैं।

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    खाद्य-श्रृंखला भोजन संबंध का सरल रास्ता दिखाती है, पर खाद्य-जाल अधिक वास्तविक है क्योंकि एक जीव के कई भोजन स्रोत और कई शिकारी हो सकते हैं।

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    जैव-भू-रासायनिक चक्र जीव, भूमि, वायुमंडल और जल को जोड़ते हैं; जल, कार्बन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और फॉस्फोरस चक्र परीक्षा के सबसे उपयोगी उदाहरण हैं।

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    पारिस्थितिक संतुलन का अर्थ यह है कि परागण, अपघटन, पोषक चक्र, जल प्रवाह और शिकारी-शिकार नियंत्रण जैसे मुख्य काम बिना टूटे चलते रहें।

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    यहाँ लागू भाग आर्थिक महत्व है: पौधे और पशु भोजन, औषधि, रेशा, ईंधन, खाद, परागण, मिट्टी की उर्वरता और आजीविका में मदद करते हैं।

पर्यावरण, पारिस्थितिकी और पारितंत्र की बुनियाद

पर्यावरण वह पूरा परिवेश है जिसमें जीव और मानव-समाज रहते हैं। इसमें वायु, जल, मिट्टी, जलवायु, वन, खनिज, बस्तियाँ, सड़कें, खेत और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बदलने वाली मानवीय गतिविधियाँ शामिल हैं। पारिस्थितिकी इससे अधिक विशिष्ट अध्ययन है। यह जीवों के आपसी संबंध और जीवों तथा उनके भौतिक परिवेश के संबंध को समझती है। पारितंत्र प्रकृति की वह कार्यशील इकाई है जहाँ ये संबंध सचमुच काम करते हैं।

CET वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर पैमाना साफ रखें। तालाब, खेत, घासभूमि, मरुस्थलीय टुकड़ा, वन-किनारा, आर्द्रभूमि या शहरी झील पारितंत्र हो सकते हैं, यदि जीवित और निर्जीव भागों में परस्पर क्रिया हो। जीवित भाग में पौधे, पशु, सूक्ष्मजीव और अपघटक आते हैं। निर्जीव भाग में सूर्य का प्रकाश, तापमान, वर्षा, जल, वायु, मिट्टी, खनिज और अम्लता-क्षारीयता की दशाएँ आती हैं। ऊर्जा सामान्यतः सूर्य से आती है, उत्पादक उसे भोजन में बदलते हैं, फिर वह उपभोक्ताओं तक जाती है और अंत में ऊष्मा के रूप में निकल जाती है। कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और जल जैसे पोषक पदार्थ वायु, मिट्टी, जल और जीवों के बीच घूमते रहते हैं।

मुख्य पकड़: पर्यावरण व्यापक परिवेश है, पारिस्थितिकी उस परिवेश के संबंधों को समझाती है, और पारितंत्र वह कार्यशील इकाई है जहाँ ये संबंध चलते हैं।

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