मुख्य तथ्य

  • 2026 वरिष्ठ माध्यमिक CET में दैनिक विज्ञान का दायरा तय है: रसायन, प्रकाश, अंतरिक्ष और सूचना तकनीक, आनुवंशिकी, पारितंत्र, जैव तकनीक, उपयोगी पौधे-जन्तु...
  • भौतिक परिवर्तन में पदार्थ का रूप या अवस्था बदलती है, जबकि रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है;
  • धातु, अधातु, लवण, कार्बन यौगिक, हाइड्रोकार्बन, CNG, पॉलिमर, साबुन, डिटर्जेंट और Freon को रोजमर्रा उपयोग और पर्यावरणीय असर से जोड़कर याद करें।
  • प्रकाश में परावर्तन के नियम, वर्ण-विक्षेप, लेंसों के प्रकार और निकटदृष्टि-दूरदृष्टि के सुधार सबसे जरूरी क्षेत्र हैं।
  • अंतरिक्ष और सूचना तकनीक में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम, उपग्रह, लॉन्च वाहन, रिमोट सेंसिंग, संचार और नेविगेशन सेवाएं शामिल हैं।

मुख्य बिंदु

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    2026 वरिष्ठ माध्यमिक CET में दैनिक विज्ञान का दायरा तय है: रसायन, प्रकाश, अंतरिक्ष और सूचना तकनीक, आनुवंशिकी, पारितंत्र, जैव तकनीक, उपयोगी पौधे-जन्तु और मानव स्वास्थ्य को साथ पढ़ना होगा।

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    भौतिक परिवर्तन में पदार्थ का रूप या अवस्था बदलती है, जबकि रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है; ऑक्सीकरण, अपचयन और उत्प्रेरक से अक्सर प्रश्न बनते हैं।

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    धातु, अधातु, लवण, कार्बन यौगिक, हाइड्रोकार्बन, CNG, पॉलिमर, साबुन, डिटर्जेंट और Freon को रोजमर्रा उपयोग और पर्यावरणीय असर से जोड़कर याद करें।

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    प्रकाश में परावर्तन के नियम, वर्ण-विक्षेप, लेंसों के प्रकार और निकटदृष्टि-दूरदृष्टि के सुधार सबसे जरूरी क्षेत्र हैं।

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    अंतरिक्ष और सूचना तकनीक में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम, उपग्रह, लॉन्च वाहन, रिमोट सेंसिंग, संचार और नेविगेशन सेवाएं शामिल हैं।

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    आनुवंशिकी में जीन, एलील, गुणसूत्र, DNA, RNA, मेंडल के नियम, प्रोटीन संश्लेषण का केंद्रीय सिद्धांत और मानव लिंग-निर्धारण पढ़ना जरूरी है।

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    पर्यावरण अध्ययन में पारितंत्र की रचना, जैविक-अजैविक घटक, खाद्य शृंखला, ऊर्जा प्रवाह और जैव-भू-रासायनिक चक्र पूछे जा सकते हैं।

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    जैव तकनीक, जैव पेटेंट, नई पौध किस्मों और ट्रांसजेनिक जीवों को कृषि, स्वास्थ्य, नैतिकता और रेगुलेशन के संदर्भ में समझें।

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    पौधों और जन्तुओं का आर्थिक महत्व भोजन, रेशा, औषधि, परागण, पशुपालन, मत्स्य, लाख, शहद और स्थानीय आजीविका से जुड़ता है।

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    रक्त समूह, Rh कारक, सुरक्षित रक्ताधान, रोगजनक, मानव रोग और कुपोषण को कारण-रोकथाम-उपचार के ढंग से दोहराएं।

भौतिक-रासायनिक परिवर्तन, धातु और रोजमर्रा यौगिक

भौतिक परिवर्तन में पदार्थ का रूप, आकार या अवस्था बदलती है, पर नया पदार्थ नहीं बनता। बर्फ का पिघलना, चीनी का घुलना, कागज काटना और पानी का वाष्प बनना इसके सीधे उदाहरण हैं। रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है। गैस निकलना, रंग बदलना, ऊष्मा या प्रकाश निकलना, अवक्षेप बनना या बदलाव का आसानी से वापस न होना इसके संकेत हो सकते हैं। लोहे में जंग लगना, मैग्नीशियम का जलना, दूध का दही बनना और भोजन का पचना रासायनिक परिवर्तन हैं। CET में पहले यही पूछें कि पदार्थ केवल रूप बदल रहा है या नया पदार्थ बन रहा है।

ऑक्सीकरण और अपचयन साथ-साथ समझे जाते हैं। विद्यालय स्तर पर ऑक्सीकरण को ऑक्सीजन जुड़ना या हाइड्रोजन हटना कहा जाता है, और अपचयन को ऑक्सीजन हटना या हाइड्रोजन जुड़ना। व्यापक इलेक्ट्रॉन दृष्टि से ऑक्सीकरण इलेक्ट्रॉन खोना है और अपचयन इलेक्ट्रॉन पाना। दहन, संक्षारण और वसा का बासी होना ऑक्सीकरण से जुड़े सामान्य उदाहरण हैं। उत्प्रेरक अभिक्रिया की दर बदलता है पर स्वयं खर्च नहीं होता। पाचन में एंजाइम जैविक उत्प्रेरक की तरह काम करते हैं और उद्योगों में उत्प्रेरक अभिक्रिया को तेज या किफायती बनाते हैं।

धातुएं सामान्यतः चमकदार, आघातवर्ध्य, तन्य और अच्छी चालक होती हैं। लोहा निर्माण में उपयोगी है पर नमी में जंग खाता है। ऐलुमिनियम पर पतली ऑक्साइड परत बनती है, इसलिए भीतर की धातु बची रहती है। तांबा अच्छी चालकता के कारण तारों में उपयोगी है। गंधक, फॉस्फोरस और कार्बन जैसी अधातुएं सामान्य धात्विक गुण नहीं दिखातीं, हालांकि ग्रेफाइट बिजली चला सकता है। रोजमर्रा यौगिकों में साधारण नमक सोडियम क्लोराइड है, खाने का सोडा सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट है, धुलाई का सोडा सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट है और ब्लीचिंग पाउडर सफाई, कीटाणुनाशन और रंग उड़ाने में काम आता है।

निष्कर्ष: पहले परिवर्तन की श्रेणी पहचानें, फिर पदार्थ को उसके गुण, उपयोग और सावधानी से जोड़ें।

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