ग्रामीण रोजगार गारंटी और कल्याण मिशन: मनरेगा और वीबी-जी राम जी
मुख्य तथ्य
- सीईटी वरिष्ठ माध्यमिक 2026 के राजस्थान अर्थव्यवस्था खंड में मनरेगा और विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों की माँग पर एक वित्त-वर्ष में कम-से-कम 100 दिन अकुशल मजदू...
- मनरेगा में काम की माँग के 15 दिन के भीतर रोजगार देना था; समय पर रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देय होता था।
- पीआईबी ने 21 दिसंबर 2025 को बताया कि राष्ट्रपति ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 को स्वीकृति दे दी;
- पीआईबी ने 30 जून 2026 को बताया कि विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025, 01 जुलाई 2026 से ग्रामीण भारत में...
मुख्य बिंदु
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सीईटी वरिष्ठ माध्यमिक 2026 के राजस्थान अर्थव्यवस्था खंड में मनरेगा और विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन - ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) साफ-साफ दिए गए हैं, इसलिए यह विषय इसी स्तर के पाठ्यक्रम में आता है।
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों की माँग पर एक वित्त-वर्ष में कम-से-कम 100 दिन अकुशल मजदूरी-रोजगार की कानूनी गारंटी देता था।
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मनरेगा में काम की माँग के 15 दिन के भीतर रोजगार देना था; समय पर रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देय होता था।
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मनरेगा में महिलाओं को प्राथमिकता देकर कम-से-कम एक-तिहाई लाभार्थी महिलाएँ रखने का प्रावधान था, और मजदूरी भुगतान बैंक या डाकघर खातों से जोड़कर पारदर्शिता बढ़ाई गई।
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पीआईबी ने 21 दिसंबर 2025 को बताया कि राष्ट्रपति ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 को स्वीकृति दे दी; यह अधिनियम मनरेगा की जगह नया वैधानिक ढाँचा लाता है।
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पीआईबी ने 30 जून 2026 को बताया कि विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025, 01 जुलाई 2026 से ग्रामीण भारत में लागू होगा और पात्र ग्रामीण परिवारों की रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करेगा।
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संक्रमण के दौरान पीआईबी सामग्री के अनुसार ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक वैध रहेंगे और चल रहे कार्यों को पूरा कराने के लिए नई व्यवस्था में ले जाया जाएगा।
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सीईटी के बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सबसे सुरक्षित तुलना है: मनरेगा = 2005 अधिनियम, कम-से-कम 100 दिन, माँग-आधारित कानूनी गारंटी; वीबी-जी राम जी = 2025 अधिनियम, 01 जुलाई 2026 से लागू, 125 दिन और उत्तराधिकारी ढाँचा।
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यह विषय वरिष्ठ माध्यमिक राजस्थान अर्थव्यवस्था पाठ्यक्रम में क्यों है?
वर्तमान सीईटी वरिष्ठ माध्यमिक पाठ्यक्रम में यह विषय राजस्थान की अर्थव्यवस्था के भीतर रखा गया है। पाठ्यक्रम की असली पंक्ति का आशय है: मनरेगा और विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन - ग्रामीण (वीबी-जी राम जी)। इसलिए इसे भारत की पूरी अर्थव्यवस्था के बड़े निबंध की तरह नहीं पढ़ना है और न ही स्नातक-स्तर के राजकोषीय नीति विषय की तरह। इसे राजस्थान अर्थव्यवस्था के कल्याण, ग्रामीण विकास और आजीविका-सुरक्षा वाले हिस्से के रूप में पढ़ना है।
राजस्थान में रोजगार गारंटी खास महत्व रखती है, क्योंकि सूखा, असमान वर्षा, मौसमी खेती, पशुपालन पर निर्भरता और मजदूरी के लिए पलायन कई ग्रामीण परिवारों को साथ-साथ प्रभावित कर सकते हैं। बहुत से गाँवों में कृषि-मजदूरी की माँग कुछ खास मौसमों में ही बढ़ती है। बाकी समय गरीब परिवारों को घर के पास मजदूरी-रोजगार चाहिए, ताकि आय घटते ही पलायन, कर्ज या परिवार की सामान्य व्यवस्था पर दबाव न बने।
सीईटी स्तर पर मुख्य बात यह है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी सामाजिक सुरक्षा को ग्राम-विकास से जोड़ती है। यह ग्रामीण आय को सहारा देती है, स्थानीय सार्वजनिक परिसम्पत्तियाँ बनाती है और योजना तथा क्रियान्वयन में पंचायती राज संस्थाओं का उपयोग करती है। इसलिए प्रश्न कानूनी अधिकार, जॉब कार्ड, 15 दिन का नियम, महिलाओं की भागीदारी, सामाजिक अंकेक्षण और मनरेगा से वीबी-जी राम जी में बदलाव पर बन सकते हैं।
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