राजस्थान के हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग
मुख्य तथ्य
- वरिष्ठ माध्यमिक CET 2026 में यह विषय राजस्थान की अर्थव्यवस्था के भीतर आता है: हस्तशिल्प उद्योग, बेरोजगारी, सूखा और अकाल;
- संविधान का अनुच्छेद 43 राज्य को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत या सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा देता है;
- 1956 के खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम ने खादी और ग्रामोद्योग के लिए वैधानिक ढाँचा दिया;
- 1999 का भौगोलिक संकेतक अधिनियम स्थान-विशेष से जुड़े उत्पादों के पंजीकरण और संरक्षण का आधार देता है;
- RIICO 28 मार्च 1969 को राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल एंड मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के रूप में बना;
मुख्य बिंदु
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वरिष्ठ माध्यमिक CET 2026 में यह विषय राजस्थान की अर्थव्यवस्था के भीतर आता है: हस्तशिल्प उद्योग, बेरोजगारी, सूखा और अकाल; कल्याणकारी योजनाएँ और अधिनियम; विकास संस्थाएँ; छोटे उद्यम; वित्तीय संस्थाएँ; और ग्रामीण विकास में पंचायती राज की भूमिका।
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संविधान का अनुच्छेद 43 राज्य को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत या सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा देता है; इसे कुटीर उद्योग की आजीविका-पृष्ठभूमि के रूप में ही पढ़ें।
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1956 के खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम ने खादी और ग्रामोद्योग के लिए वैधानिक ढाँचा दिया; 1985 का हथकरघा आरक्षण अधिनियम चुनी हुई हथकरघा वस्तुओं की सुरक्षा से जुड़ता है।
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1999 का भौगोलिक संकेतक अधिनियम स्थान-विशेष से जुड़े उत्पादों के पंजीकरण और संरक्षण का आधार देता है; राजस्थान के GI उदाहरणों में कोटा डोरिया, जयपुर ब्लू पॉटरी, मोलेला क्ले वर्क, सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग, बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट, थेवा कला और नाथद्वारा पिछवाई पेंटिंग आते हैं।
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RIICO 28 मार्च 1969 को राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल एंड मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के रूप में बना; 1 जनवरी 1980 के विभाजन में औद्योगिक विकास वाला पक्ष RIICO बना, जबकि खनन पक्ष को आज RSMML यानी राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड से जोड़कर याद करें।
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राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022 के आधिकारिक पाठ में इसकी अवधि 31 मार्च 2026 तक दी गई है; नीति पारंपरिक शिल्प, कारीगर सहायता, विपणन, सामाजिक सुरक्षा और हस्तशिल्प क्षेत्र में रोजगार अवसरों पर केंद्रित है।
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राजस्थान MSME नीति 2024 के आधिकारिक पाठ में इसकी अवधि 31 मार्च 2029 तक दी गई है; नीति MSME प्रोत्साहन, औद्योगिक ढाँचे, उत्पाद मानकीकरण, गुणवत्ता प्रमाणन और ऋण-सुविधा पर केंद्रित है।
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1 अप्रैल 2025 से MSME वर्गीकरण सीमा है: सूक्ष्म के लिए ₹2.5 करोड़ निवेश और ₹10 करोड़ कारोबार, लघु के लिए ₹25 करोड़ और ₹100 करोड़, तथा मध्यम के लिए ₹125 करोड़ और ₹500 करोड़।
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राजस्थान की अर्थव्यवस्था में हस्तशिल्प का स्थान
CET वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर यह विषय राजस्थान की अर्थव्यवस्था के आधिकारिक बिंदुओं के भीतर ही पढ़ना है: राज्य के विकास में उद्योग की भूमिका, हस्तशिल्प उद्योग के साथ बेरोजगारी, सूखा और अकाल, तथा कल्याणकारी योजनाएँ और अधिनियम, विकास संस्थाएँ, छोटे उद्यम, वित्तीय संस्थाएँ और ग्रामीण विकास में पंचायती राज की भूमिका। यह अखिल भारतीय औद्योगिक नीति का अलग अध्याय नहीं है; राष्ट्रीय अधिनियम तभी उपयोगी हैं जब वे राजस्थान के छोटे उद्यम और शिल्प-आजीविका को समझाते हों।
राजस्थान के हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग संस्कृति, रोजगार और छोटे उद्यम के संगम पर खड़े हैं। कोई शिल्प-वस्तु देखने में कला जैसी लग सकती है, पर उसके पीछे कच्चा माल, निर्माण, सज्जा, परिवहन, खुदरा बिक्री, पर्यटन और निर्यात की आय-श्रृंखला चलती है। सूखा-प्रभावित या वर्षा-निर्भर क्षेत्रों में खेती से बाहर का ऐसा काम कृषि पर दबाव घटा सकता है और अतिरिक्त आय दे सकता है।
कुटीर उद्योग का अर्थ ऐसा छोटा उत्पादन है जो घर, गाँव, कस्बे या छोटे कार्यस्थल पर सीमित पूँजी और अधिक कौशल, श्रम तथा स्थानीय सामग्री से चलता है। इसमें उपकरण या छोटी मशीनें लग सकती हैं, पर उसका पैमाना और संगठन बड़े कारखाने जैसा नहीं होता। परीक्षा की मुख्य समझ यह है कि हस्तशिल्प केवल संस्कृति नहीं है; यह राजस्थान के उद्योग, रोजगार, गरीबी-निवारण और स्थानीय बाजार से भी जुड़ा विषय है।
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