राजस्थान अर्थव्यवस्था में राज्य आय और बजट की अवधारणाएँ
मुख्य तथ्य
- राज्य आय का अर्थ एक वित्त वर्ष में राजस्थान के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य से है; इससे जुड़ा सकल-उत्पादन शब्द GSDP है।
- प्रति व्यक्ति राज्य आय, राज्य आय को जनसंख्या से भाग देकर निकाली जाती है; यह औसत संकेतक है, यह नहीं बताती कि हर व्यक्ति उतना ही कमाता है।
- राजस्थान की आय को क्षेत्रवार पढ़ें: कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ, उद्योग और खनन, तथा सेवा क्षेत्र मिलकर राज्य अर्थव्यवस्था की बनावट बताते हैं।
- राजस्थान बजट एक वित्त वर्ष की प्राप्तियों और खर्च का अनुमान देता है और राज्य सरकार की विकास तथा कल्याण प्राथमिकताएँ दिखाता है।
- राजस्व प्राप्तियों में राज्य के अपने कर, कर-भिन्न आय, केंद्रीय करों में हिस्सा और अनुदान आते हैं;
मुख्य बिंदु
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राज्य आय का अर्थ एक वित्त वर्ष में राजस्थान के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य से है; इससे जुड़ा सकल-उत्पादन शब्द GSDP है।
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प्रति व्यक्ति राज्य आय, राज्य आय को जनसंख्या से भाग देकर निकाली जाती है; यह औसत संकेतक है, यह नहीं बताती कि हर व्यक्ति उतना ही कमाता है।
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राजस्थान की आय को क्षेत्रवार पढ़ें: कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ, उद्योग और खनन, तथा सेवा क्षेत्र मिलकर राज्य अर्थव्यवस्था की बनावट बताते हैं।
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राजस्थान बजट एक वित्त वर्ष की प्राप्तियों और खर्च का अनुमान देता है और राज्य सरकार की विकास तथा कल्याण प्राथमिकताएँ दिखाता है।
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राजस्व प्राप्तियों में राज्य के अपने कर, कर-भिन्न आय, केंद्रीय करों में हिस्सा और अनुदान आते हैं; पूंजीगत प्राप्तियों में मुख्य रूप से उधारी, ऋण-वसूली और ऐसी पूंजीगत धाराएँ आती हैं।
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राजस्व व्यय वेतन, पेंशन, ब्याज, अनुदान और कल्याण सेवाएँ चलाता है; पूंजीगत व्यय सड़क, सिंचाई, स्कूल, अस्पताल जैसी परिसंपत्तियाँ बनाता है।
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राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा और प्राथमिक घाटा बजट के अंतर बताने वाले संकेतक हैं; वरिष्ठ माध्यमिक CET में इनके अर्थ, वर्गीकरण और राजस्थान से जुड़े उदाहरण पढ़ें।
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राजस्थान बजट की प्राथमिकताएँ कृषि, पशुपालन, खनिज, पानी, सूखा राहत, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और रोजगार योजनाओं से सीधे जुड़ती हैं।
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राज्य आय: अर्थ और परीक्षा की सीमा
राज्य आय से मतलब एक वित्त वर्ष में राज्य की सीमा के भीतर हुए आर्थिक उत्पादन से है। राजस्थान के लिए इससे जुड़ा सकल-उत्पादन शब्द GSDP है। इसमें खेतों, पशुपालन, खानों, कारखानों, निर्माण, परिवहन, व्यापार, पर्यटन, सरकारी सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्थान में चल रही दूसरी गतिविधियों से जुड़ा मूल्य शामिल होता है। इसे घरेलू इसलिए कहा जाता है क्योंकि ध्यान राज्य की सीमा के भीतर उत्पादन पर रहता है, हर मालिक या कामगार के निवास पर नहीं।
वरिष्ठ माध्यमिक CET में राष्ट्रीय आय लेखांकन के गहरे सूत्र सामान्यतः जरूरी नहीं होते। साफ अर्थ अधिक जरूरी है। अच्छी बारिश से फसल उत्पादन बढ़े, खनन और कारखाने अधिक उत्पादन करें, पर्यटन और परिवहन फैलें, तो राजस्थान का GSDP बढ़ सकता है। यदि कीमतें बढ़ें, तो चालू कीमतों पर GSDP बढ़ सकता है, भले वास्तविक उत्पादन उतना न बढ़ा हो। इसलिए प्रश्न में चालू कीमत और वास्तविक वृद्धि दोनों दिए हों, तो उनका अंतर पहचानें।
यह विषय राजस्थान अर्थव्यवस्था का है, केंद्रीय सार्वजनिक वित्त का नहीं। संघ-स्तर के शब्द केवल जरूरत होने पर पृष्ठभूमि की तरह रखें। मुख्य ढाँचा यह है: राजस्थान क्या पैदा करता है, आय किन क्षेत्रों में बँटी है, बजट सार्वजनिक धन कैसे लगाता है, और ये बातें सूखा, बेरोजगारी, ग्रामीण सेवाओं तथा कल्याण जैसी विकास समस्याओं से कैसे जुड़ती हैं।
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GSDP राजस्थान के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को मापता है; प्रति व्यक्ति आय राज्य आय को जनसंख्या से भाग देकर औसत देती है, समानता नहीं।
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