राजस्थान की अर्थव्यवस्था: क्षेत्र, समस्याएं और विकास कार्यक्रम
मुख्य तथ्य
- सीनियर सेकेंडरी सीईटी में विषय राजस्थान की अर्थव्यवस्था है, भारत की पंचवर्षीय योजनाएं या 1991 के आर्थिक सुधार नहीं।
- 2025-26 में राजस्थान का वर्तमान मूल्य पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद ₹18.75 लाख करोड़ अनुमानित है, जो 2024-25 के ₹17.01 लाख करोड़ से अधिक है।
- 2025-26 में राजस्थान के सकल राज्य मूल्य वर्धन में कृषि क्षेत्र का योगदान 25.74%, उद्योग का 26.55% और सेवाओं का 47.71% है।
मुख्य बिंदु
- 1
सीनियर सेकेंडरी सीईटी में विषय राजस्थान की अर्थव्यवस्था है, भारत की पंचवर्षीय योजनाएं या 1991 के आर्थिक सुधार नहीं।
- 2
आधिकारिक दायरे में राजस्थान के क्षेत्र, राज्य आय और बजट, हस्तशिल्प, बेरोजगारी, सूखा, अकाल, कल्याण संस्थाएं, पंचायती राज, मनरेगा और वीबी-जी राम जी आते हैं।
- 3
2025-26 में राजस्थान का वर्तमान मूल्य पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद ₹18.75 लाख करोड़ अनुमानित है, जो 2024-25 के ₹17.01 लाख करोड़ से अधिक है।
- 4
2025-26 में राजस्थान के सकल राज्य मूल्य वर्धन में कृषि क्षेत्र का योगदान 25.74%, उद्योग का 26.55% और सेवाओं का 47.71% है।
- 5
कृषि, पशुपालन और खनिज इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि ये ग्रामीण आय, कच्चा माल, उद्योग और सूखा-सहनशीलता से जुड़े हैं।
- 6
राजस्थान अर्थव्यवस्था के प्रश्नों में जल-कमी, सूखा-प्रवण क्षेत्र, क्षेत्रीय असमानता, बेरोजगारी और मौसम पर निर्भर आजीविका को जोड़कर पढ़ना चाहिए।
- 7
हस्तशिल्प, पर्यटन, एमएसएमई और छोटे उद्यम परंपरा, निर्यात, स्थानीय रोजगार और महिला आजीविका से जुड़े उच्च-उपयोगी विषय हैं।
- 8
मनरेगा, राजीविका, कल्याण योजनाएं, विकास संस्थाएं, वित्तीय संस्थाएं और पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण विकास के औजार के रूप में पढ़नी चाहिए।
आगे पढ़ें
राजस्थान अर्थव्यवस्था: आधिकारिक दायरा और मुख्य संकेतक
सीनियर सेकेंडरी सीईटी में यह विषय आरएसएसबी 2026 के राजस्थान की अर्थव्यवस्था वाले दायरे में ही रहना चाहिए। आधिकारिक दायरा है: राज्य के विकास में उद्योग, कृषि, पशुपालन और खनिज क्षेत्र की भूमिका; राजस्थान की अर्थव्यवस्था, विशेषताएं और समस्याएं; राज्य आय और बजट की अवधारणाएं; हस्तशिल्प उद्योग, बेरोजगारी, सूखा और अकाल; राजस्थान की विभिन्न कल्याण योजनाएं और अधिनियम, विकास संस्थाएं, छोटे उद्यम, वित्तीय संस्थाएं और ग्रामीण विकास में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका; मनरेगा और विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन—ग्रामीण (वीबी-जी राम जी)। भारत की पंचवर्षीय योजनाएं, 1991 के आर्थिक सुधार और आरबीआई की मौद्रिक नीति इस सीनियर सेकेंडरी विषय का केंद्र नहीं हैं।
राजस्थान की अर्थव्यवस्था को तीन बड़े क्षेत्रों से समझें: कृषि और संबद्ध गतिविधियां, उद्योग और सेवाएं। आधिकारिक आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार 2025-26 में वर्तमान मूल्य पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद ₹18.75 लाख करोड़ अनुमानित है, जबकि 2024-25 में यह ₹17.01 लाख करोड़ था। वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय 2025-26 में ₹2,02,349 अनुमानित है। ये आंकड़े वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में इसलिए उपयोगी हैं क्योंकि ये अर्थव्यवस्था का आकार और वृद्धि-दिशा दोनों दिखाते हैं।
क्षेत्रीय बनावट भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है। 2025-26 में राजस्थान के सकल राज्य मूल्य वर्धन में कृषि क्षेत्र का योगदान 25.74%, उद्योग का 26.55% और सेवाओं का 47.71% है। कृषि क्षेत्र में फसल, पशुपालन, वानिकी और मत्स्य आते हैं। उद्योग में खनन, विनिर्माण, बिजली, गैस, जलापूर्ति, अन्य उपयोगी सेवाएं और निर्माण आते हैं। सेवाओं में व्यापार, होटल, परिवहन, संचार, वित्तीय सेवाएं, लोक प्रशासन और अन्य सेवाएं आती हैं। सीईटी के लिए इन आंकड़ों को राजस्थान की स्थितियों से जोड़ें: बड़ा शुष्क राज्य, असमान सिंचाई, मजबूत पशुधन आधार, खनिज संपदा, पर्यटन, हस्तशिल्प, बढ़ते एमएसएमई और सेवा क्षेत्र का विस्तार।
पूरा नोट खोलें
यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।
5 और खंड पूरे नोट में हैं
स्टडी पैक खोलें