राजस्थान के राज्य आयोग और जिला प्रशासन
मुख्य तथ्य
- राजस्थान लोक सेवा आयोग अनुच्छेद 315 से 323 के अंतर्गत संवैधानिक भर्ती निकाय है;
- राज्य सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत काम करता है और मुख्य रूप से लोक सूचना से जुड़ी दूसरी अपीलों और शिकायतों को देखता है।
- राज्य मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत बना वैधानिक अधिकार निकाय है;
मुख्य बिंदु
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वर्तमान CET वरिष्ठ माध्यमिक पाठ्यक्रम इस क्षेत्र में चार राजस्थान आयोगों को नाम से रखता है: राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग।
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राजस्थान लोक सेवा आयोग अनुच्छेद 315 से 323 के अंतर्गत संवैधानिक भर्ती निकाय है; यह परीक्षाएं कराता है और जहां परामर्श जरूरी हो, सेवा मामलों में सलाह देता है।
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राज्य निर्वाचन आयोग पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव कराता है; लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग के अधीन आते हैं।
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राज्य सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत काम करता है और मुख्य रूप से लोक सूचना से जुड़ी दूसरी अपीलों और शिकायतों को देखता है।
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राज्य मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत बना वैधानिक अधिकार निकाय है; यह लोक सेवकों से जुड़े मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में जांच और सिफारिश करता है।
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राज्य प्रशासन में राज्यपाल औपचारिक प्रमुख, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद वास्तविक राजनीतिक दिशा देने वाले, और मुख्य सचिव वरिष्ठ प्रशासनिक समन्वयक होते हैं।
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जिला प्रशासन का केंद्र जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट होता है, जो राजस्व, कानून-व्यवस्था सहयोग, चुनाव, आपदा, विकास समीक्षा और नागरिक सेवाओं का तालमेल करता है।
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स्थानीय स्वशासन और पंचायती राज इसी पाठ्यक्रम खंड का हिस्सा हैं: ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद और शहरी निकाय अपनी कानूनी पहचान रखते हैं, जबकि जिला प्रशासन उनके साथ समन्वय करता है।
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पाठ्यक्रम सीमा और पढ़ने का तरीका
यह विषय CET वरिष्ठ माध्यमिक के उस खंड में आता है जिसे राजस्थान के विशेष संदर्भ में भारतीय राजनीतिक व्यवस्था कहा गया है। इस स्तर पर राजस्थान से जुड़े नामित विषय हैं: राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, राज्य मुख्य सचिव, जिला प्रशासन, स्थानीय स्वशासन और पंचायती राज।
सबसे सुरक्षित पढ़ाई का तरीका है: आधार, काम और सीमा। पहले देखें कि निकाय संवैधानिक है या वैधानिक। फिर उसे उसके मुख्य काम से जोड़ें: भर्ती, स्थानीय चुनाव, सूचना तक पहुंच, मानवाधिकार संरक्षण, राज्य-स्तरीय समन्वय या जिला-स्तरीय सेवा। अंत में उसकी सीमा याद रखें। कोई आयोग अपने-आप न्यायालय नहीं बन जाता और कोई जिला अधिकारी निर्वाचित स्थानीय निकायों या न्यायपालिका का विकल्प नहीं होता।
दोहराव में वर्तमान वरिष्ठ माध्यमिक पाठ्यक्रम में नामित संस्थाओं और प्रशासनिक स्तरों को ही केंद्र में रखें। राजस्थान राजनीति-प्रशासन के अतिरिक्त निकाय अलग जगह पढ़े जा सकते हैं, पर वे इस विषय में सूचीबद्ध आयोगों, राज्य मुख्य सचिव, जिला प्रशासन और स्थानीय स्वशासन की जगह नहीं ले सकते।
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