मुख्य तथ्य

  • 1957 में बलवंत राय मेहता समिति ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था की सिफारिश की;
  • 2 अक्टूबर 1959 को जवाहरलाल नेहरू ने नागौर, राजस्थान में पंचायती राज का उद्घाटन किया; इससे राजस्थान पंचायती राज के औपचारिक आरंभ से सीधे जुड़ता है।
  • 24 अप्रैल 1993 से 73वाँ संविधान संशोधन प्रभावी हुआ; इसने पंचायतों के लिए भाग 9 और 11वीं अनुसूची जोड़ी।
  • 1 जून 1993 से 74वाँ संविधान संशोधन प्रभावी हुआ; इसने नगरपालिकाओं के लिए भाग 9क और 12वीं अनुसूची जोड़ी।
  • राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 राज्य में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद वाले ग्रामीण स्थानीय स्वशासन का प्रमुख कानून है।

मुख्य बिंदु

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    1957 में बलवंत राय मेहता समिति ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था की सिफारिश की; इसी से आधुनिक पंचायती राज की नीति-भूमि मजबूत हुई।

  2. 2

    2 अक्टूबर 1959 को जवाहरलाल नेहरू ने नागौर, राजस्थान में पंचायती राज का उद्घाटन किया; इससे राजस्थान पंचायती राज के औपचारिक आरंभ से सीधे जुड़ता है।

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    24 अप्रैल 1993 से 73वाँ संविधान संशोधन प्रभावी हुआ; इसने पंचायतों के लिए भाग 9 और 11वीं अनुसूची जोड़ी।

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    1 जून 1993 से 74वाँ संविधान संशोधन प्रभावी हुआ; इसने नगरपालिकाओं के लिए भाग 9क और 12वीं अनुसूची जोड़ी।

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    राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 राज्य में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद वाले ग्रामीण स्थानीय स्वशासन का प्रमुख कानून है।

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    जुलाई 1994 में राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 243K के तहत गठित हुआ; यह पंचायत और नगर निकाय चुनावों से जुड़ा संवैधानिक निकाय है।

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    पेसा कानून, 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में भाग 9 के प्रावधानों का विस्तार करता है और वहाँ ग्राम सभा की भूमिका को मजबूत करता है।

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    राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 राज्य के शहरी स्थानीय निकायों का प्रमुख कानून है।

  9. 9

    अनुच्छेद 243I पंचायतों और 243Y नगरपालिकाओं के लिए राज्य वित्त आयोग की समीक्षा और सिफारिशों से जुड़े हैं।

अर्थ और पाठ्यक्रम-सीमा

स्थानीय स्वशासन का अर्थ है कि राज्य सरकार से नीचे स्थानीय जरूरतों को स्थानीय प्रतिनिधियों के माध्यम से सँभालने वाली चुनी हुई संस्थाएँ काम करें। राजस्थान में इसका ग्रामीण पक्ष पंचायती राज है और शहरी पक्ष नगर निकाय हैं। सीनियर सेकेंडरी CET की तैयारी में परीक्षा की सीमा स्पष्ट रखें: स्थानीय स्वशासन, पंचायती राज, चुनाव, वित्त, काम और जवाबदेही को राजस्थान के पदनामों और संस्थाओं के साथ समझना है।

गाँव और शहर की समस्याएँ नागरिकों के सबसे पास की संस्था से बेहतर सँभलती हैं: सड़क, नाली, पेयजल, सफाई, रोशनी, अभिलेख, लाभार्थी चयन और स्थानीय योजना। ये निकाय चुने हुए होते हैं, पर वे संप्रभु सरकार नहीं हैं। वे संविधान, राज्य-कानून, राज्य निगरानी और उपलब्ध धन के अधीन काम करते हैं।

परीक्षा सूत्र: ग्रामीण स्थानीय स्वशासन के लिए पंचायत ढाँचा और शहरी स्थानीय स्वशासन के लिए नगरपालिका ढाँचा साथ-साथ पढ़ें। संवैधानिक ढाँचे और राजस्थान के राज्य-कानूनों को अलग पहचानें।

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