राजस्थान के विशेष संदर्भ में भारतीय राजनीतिक व्यवस्था
मुख्य तथ्य
- संविधान की सर्वोच्चता, संसदीय उत्तरदायित्व, केंद्र-राज्य शक्तियों का बंटवारा और न्यायिक समीक्षा सार्वजनिक शक्ति को संवैधानिक सीमा में रखते हैं।
- प्रस्तावना भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बताती है और न्याय, स्वतंत्रता, समानता व बंधुता का लक्ष्य रखती है।
- भाग 3 के मौलिक अधिकार न्यायालय से लागू कराए जा सकते हैं, जबकि भाग 4 के नीति-निदेशक तत्व शासन और कल्याणकारी नीति की दिशा देते हैं पर सीधे न्यायालय से ल...
- केंद्र में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं, प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते हैं और मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।
- संसद में राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा शामिल हैं तथा वह कानून, प्रतिनिधित्व, विचार-विमर्श और वित्तीय नियंत्रण के काम करती है।
मुख्य बिंदु
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संविधान की सर्वोच्चता, संसदीय उत्तरदायित्व, केंद्र-राज्य शक्तियों का बंटवारा और न्यायिक समीक्षा सार्वजनिक शक्ति को संवैधानिक सीमा में रखते हैं।
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प्रस्तावना भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बताती है और न्याय, स्वतंत्रता, समानता व बंधुता का लक्ष्य रखती है।
- 3
भाग 3 के मौलिक अधिकार न्यायालय से लागू कराए जा सकते हैं, जबकि भाग 4 के नीति-निदेशक तत्व शासन और कल्याणकारी नीति की दिशा देते हैं पर सीधे न्यायालय से लागू नहीं होते।
- 4
केंद्र में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं, प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते हैं और मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।
- 5
संसद में राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा शामिल हैं तथा वह कानून, प्रतिनिधित्व, विचार-विमर्श और वित्तीय नियंत्रण के काम करती है।
- 6
उच्चतम न्यायालय संवैधानिक विवादों का न्यायिक निर्णय करता है, जबकि भारत निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 324 में दिए गए चुनावों की व्यवस्था संभालता है।
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राजस्थान में राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख हैं, मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते हैं और मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।
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राजस्थान उच्च न्यायालय, राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग और राज्य मानव अधिकार आयोग के काम अलग हैं और एक-दूसरे के बदले नहीं किए जा सकते।
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मुख्य सचिव राज्य प्रशासन का समन्वय करते हैं, जबकि जिला प्रशासन कानून के अनुसार बनी सरकारी नीति को क्षेत्रीय क्रियान्वयन से जोड़ता है।
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पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण स्थानीय शासन, नगर निकाय शहरी स्थानीय शासन और ग्राम सभा गांव स्तर की सीधी भागीदारी का आधार हैं।
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संविधान की प्रकृति और उसका कामकाजी स्वरूप
भारतीय संविधान सार्वजनिक शक्ति का सर्वोच्च ढांचा है। वही संस्थाएं बनाता है, अधिकार बांटता है, नागरिक अधिकारों की रक्षा करता है और शासन के लक्ष्य तय करता है। इसलिए कोई कानून, सरकारी आदेश या प्रशासनिक कार्रवाई संवैधानिक सीमा से बाहर नहीं हो सकती। पद पर बैठे व्यक्ति की इच्छा नहीं, बल्कि संविधान और कानून शासन का आधार हैं।
भारत का संविधान लिखित है और इसमें संघीय तथा एकात्मक, दोनों तरह की विशेषताएं मिलती हैं। केंद्र और राज्यों के कानून बनाने के विषय बंटे हुए हैं, फिर भी राष्ट्रीय समन्वय में केंद्र की स्थिति अपेक्षाकृत मज़बूत है। यह व्यवस्था एक ही संवैधानिक ढांचे में चलती है और शक्ति-विवाद न्यायालय तक जा सकते हैं। संशोधन की अलग-अलग प्रक्रियाओं के कारण संविधान का कुछ भाग कठोर और कुछ भाग लचीला माना जाता है।
भारत में संसदीय शासन है। केंद्र में राष्ट्रपति और राज्य में राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख हैं, जबकि रोज़मर्रा की राजनीतिक जिम्मेदारी निर्वाचित मंत्रिपरिषद उठाती है। मंत्रिपरिषद को जनता द्वारा निर्वाचित सदन का विश्वास बनाए रखना होता है। गणराज्य में राष्ट्राध्यक्ष वंशानुगत शासक नहीं होता। परीक्षा में चार बातें अलग रखें: संविधान की सर्वोच्चता, सदन के प्रति मंत्रिपरिषद की जिम्मेदारी, केंद्र-राज्य शक्तियों का बंटवारा और न्यायिक समीक्षा।
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राष्ट्रपति से जुड़ा संवैधानिक उपबंध अनुच्छेद 74 और सामूहिक उत्तरदायित्व के साथ पढ़ा जाता है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देती है तथा लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी रहती है। इसलिए राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं और रोज़मर्रा की राजनीतिक जिम्मेदारी निर्वाचित सरकार उठाती है।
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