मुख्य तथ्य

  • सीनियर सेकेंडरी राजव्यवस्था खंड में संविधान की प्रकृति, प्रस्तावना, मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्व पहले आते हैं, फिर राजस्थान की संस्थाएँ आती हैं।
  • संघीय व्यवस्था में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद, संसद, सर्वोच्च न्यायालय और भारत निर्वाचन आयोग मूल संस्थाएँ हैं।
  • राजस्थान में राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख है, जबकि मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति राजनीतिक रूप से उत्तरदायी हैं।
  • राजस्थान में 200 सदस्यों वाली एकसदनीय विधान सभा है; प्रश्न, बजट, समितियाँ और विश्वास-परीक्षा उसके नियंत्रण के प्रमुख साधन हैं।
  • राजस्थान उच्च न्यायालय का उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में हुआ; अनुच्छेद 226 की रिट शक्ति परीक्षा के लिए खास बिंदु है।

मुख्य बिंदु

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    सीनियर सेकेंडरी राजव्यवस्था खंड में संविधान की प्रकृति, प्रस्तावना, मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्व पहले आते हैं, फिर राजस्थान की संस्थाएँ आती हैं।

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    संघीय व्यवस्था में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद, संसद, सर्वोच्च न्यायालय और भारत निर्वाचन आयोग मूल संस्थाएँ हैं।

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    राजस्थान में राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख है, जबकि मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति राजनीतिक रूप से उत्तरदायी हैं।

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    राजस्थान में 200 सदस्यों वाली एकसदनीय विधान सभा है; प्रश्न, बजट, समितियाँ और विश्वास-परीक्षा उसके नियंत्रण के प्रमुख साधन हैं।

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    राजस्थान उच्च न्यायालय का उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में हुआ; अनुच्छेद 226 की रिट शक्ति परीक्षा के लिए खास बिंदु है।

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    राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग के काम अलग-अलग हैं; इन्हें आपस में न मिलाएँ।

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    मुख्य सचिव राज्य प्रशासन का समन्वय करता है, जबकि जिला प्रशासन राज्य नीति को मैदानी स्तर पर नागरिकों तक पहुँचाता है।

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    पंचायती राज और नगरीय निकाय स्थानीय स्वशासन बनाते हैं; राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराता है।

राजव्यवस्था के लिए संवैधानिक आधार

सीनियर सेकेंडरी परीक्षा में राजव्यवस्था का आधार संविधान से शुरू होता है। संविधान सरकार की सबसे ऊँची कानूनी रूपरेखा है। इसकी प्रकृति को लिखित संविधान, संसदीय शासन, मजबूत संघीय ढांचा, स्वतंत्र न्यायपालिका, न्यायिक समीक्षा, मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व, वयस्क मताधिकार और संविधान संशोधन जैसी बातों से समझा जाता है। राजस्थान से जुड़े प्रश्नों में यही आधार राज्य सरकार, स्थानीय निकायों और आयोगों की भूमिका को समझाता है।

प्रस्तावना गणराज्य के बड़े आदर्श बताती है: न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता। भारत को प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में पढ़ना चाहिए। मौलिक अधिकार नागरिकों को राज्य की मनमानी से बचाते हैं और समानता, स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक-शैक्षिक अधिकार और संवैधानिक उपचार से जुड़े हैं। नीति निदेशक तत्व अदालत में मौलिक अधिकारों की तरह लागू नहीं कराए जाते, पर वे सामाजिक न्याय, जन स्वास्थ्य, शिक्षा, स्थानीय शासन और कमजोर वर्गों की नीतियों की दिशा तय करते हैं।

परीक्षा संकेत: मौलिक अधिकार राज्य शक्ति पर सीमा लगाते हैं; नीति निदेशक तत्व शासन को नीति-दिशा देते हैं; प्रस्तावना संविधान की मूल्य-दिशा बताती है।

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