मुख्य तथ्य

  • 2026 पाठ्यक्रम दायरा: यह वरिष्ठ माध्यमिक विषय केवल राजस्थान भूगोल के बिंदु “वन्यजीव, अभयारण्य और संरक्षण” के भीतर आता है।
  • 1972 का वन्यजीव संरक्षण अधिनियम अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, संरक्षण रिजर्व, सामुदायिक रिजर्व और संरक्षित प्रजातियों के लिए राष्ट्रीय कानूनी ढाँचा देता...
  • CET के लिए राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यानों की 5-नाम वाली सूची पढ़ें: रणथम्भौर, सरिस्का, केवलादेव, मरु राष्ट्रीय उद्यान और मुकुंदरा हिल्स।
  • वन विभाग के मौजूदा संरक्षित-क्षेत्र विवरण में राजस्थान के 5 टाइगर रिजर्व दिए हैं: रणथम्भौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली।
  • NTCA के अनुसार राजस्थान का रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व 2022 में और धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व 2023 में सूचीबद्ध हुआ।

मुख्य बिंदु

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    2026 पाठ्यक्रम दायरा: यह वरिष्ठ माध्यमिक विषय केवल राजस्थान भूगोल के बिंदु “वन्यजीव, अभयारण्य और संरक्षण” के भीतर आता है।

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    1972 का वन्यजीव संरक्षण अधिनियम अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, संरक्षण रिजर्व, सामुदायिक रिजर्व और संरक्षित प्रजातियों के लिए राष्ट्रीय कानूनी ढाँचा देता है।

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    CET के लिए राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यानों की 5-नाम वाली सूची पढ़ें: रणथम्भौर, सरिस्का, केवलादेव, मरु राष्ट्रीय उद्यान और मुकुंदरा हिल्स।

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    वन विभाग के मौजूदा संरक्षित-क्षेत्र विवरण में राजस्थान के 5 टाइगर रिजर्व दिए हैं: रणथम्भौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली।

  5. 5

    NTCA के अनुसार राजस्थान का रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व 2022 में और धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व 2023 में सूचीबद्ध हुआ।

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    1980 में जैसलमेर और बाड़मेर में मरु राष्ट्रीय उद्यान अधिसूचित हुआ; इसका उद्देश्य थार मरुस्थल और गोडावण आवास का संरक्षण है।

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    भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान 01-10-1981 को Ramsar स्थल बना और 1985 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ।

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    सांभर झील 23-03-1990 को Ramsar स्थल बनी; यह लवणीय आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी और जलपक्षियों के कारण महत्त्वपूर्ण है।

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    ISFR 2023 में राजस्थान का वन आवरण 16,548.21 वर्ग किमी है: 223.20 वर्ग किमी अति सघन, 4,237.41 वर्ग किमी मध्यम सघन और 12,087.60 वर्ग किमी खुला वन; 5,476.75 वर्ग किमी झाड़ीदार क्षेत्र अलग है।

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    राजस्थान जैव विविधता नियम, 2010 और राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड जैव विविधता अधिनियम, 2002 को राज्य-स्तर के जैव विविधता प्रबंधन से जोड़ते हैं।

पाठ्यक्रम दायरा और पढ़ने का ढाँचा

वर्तमान वरिष्ठ माध्यमिक CET पाठ्यक्रम में यह विषय राजस्थान भूगोल के ठीक इसी बिंदु में आता है: वन्यजीव, अभयारण्य और संरक्षण। इसलिए पढ़ाई राजस्थान के संरक्षित क्षेत्रों, आवासों, प्रमुख प्रजातियों, संरक्षण संस्थाओं और स्थानीय पारिस्थितिक मुद्दों तक सीमित रहनी चाहिए। जब तक कोई बात राजस्थान के उदाहरण को सीधे नहीं समझाती, तब तक भारत-भर की पर्यावरण थ्योरी या स्नातक-स्तर जैव विविधता बहस यहाँ नहीं लानी चाहिए।

राजस्थान का वन्यजीव भूगोल केवल घने जंगलों की कहानी नहीं है। यहाँ थार की घासभूमि, अरावली के पहाड़ी वन, शुष्क पर्णपाती क्षेत्र, चंबल के बीहड़, खारी झीलें, मौसमी आर्द्रभूमियाँ, गाँवों के तालाब, ओरण और साझा चरागाह मिलते हैं। परीक्षा के लिए हर संरक्षित क्षेत्र को तीन बातों से जोड़ें: स्थान, आवास और संरक्षण संबंध। केवलादेव का अर्थ भरतपुर की आर्द्रभूमि और पक्षी; रणथम्भौर का अर्थ सवाई माधोपुर का बाघ परिदृश्य; तालछापर का अर्थ चूरू की घासभूमि और कृष्णमृग; मरु राष्ट्रीय उद्यान का अर्थ जैसलमेर-बाड़मेर का मरुस्थल और गोडावण।

काम की बात सरल है: केवल नामों की सूची न रटें। हर महत्त्वपूर्ण क्षेत्र के लिए स्थल-आवास-प्रजाति की कड़ी बनाइए।

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