राजस्थान की खेती, पशुधन और डेयरी
मुख्य तथ्य
- CET वरिष्ठ माध्यमिक 2026 में यह विषय दायरे में है: राजस्थान अर्थव्यवस्था में राज्य विकास में कृषि और पशुपालन की भूमिका है, और राजस्थान भूगोल में पशुधन...
- राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को GSVA, रोजगार और ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण आधार मानती है, लेकिन पानी की कमी और जलवायु अ...
- 2025-26 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों ने वर्तमान कीमतों पर राजस्थान के GVA में 25.74% योगदान दिया;
- पशुधन गणना 2019 में राजस्थान का पशुधन 568.01 लाख और पोल्ट्री पक्षी 146.23 लाख दर्ज हुए।
- राजस्थान में देश के पशुधन का लगभग 10.60% और ऊंटों का 84.43% हिस्सा था;
मुख्य बिंदु
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CET वरिष्ठ माध्यमिक 2026 में यह विषय दायरे में है: राजस्थान अर्थव्यवस्था में राज्य विकास में कृषि और पशुपालन की भूमिका है, और राजस्थान भूगोल में पशुधन अलग से दिया गया है।
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राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को GSVA, रोजगार और ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण आधार मानती है, लेकिन पानी की कमी और जलवायु अनिश्चितता को भी रेखांकित करती है।
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2025-26 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों ने वर्तमान कीमतों पर राजस्थान के GVA में 25.74% योगदान दिया; इसी क्षेत्र के भीतर पशुधन का हिस्सा 49.35% और फसलों का हिस्सा 42.61% था।
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आर्थिक समीक्षा बाजरा, मूंगफली और मूंग को खरीफ आय के प्रमुख योगदानकर्ता, तथा गेहूँ, रेपसीड और सरसों, और चना को रबी आय के प्रमुख योगदानकर्ता बताती है।
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पशुधन गणना 2019 में राजस्थान का पशुधन 568.01 लाख और पोल्ट्री पक्षी 146.23 लाख दर्ज हुए।
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राजस्थान में देश के पशुधन का लगभग 10.60% और ऊंटों का 84.43% हिस्सा था; 2023-24 में राज्य ने भारत के दूध उत्पादन में 14.51% और ऊन उत्पादन में 47.53% योगदान दिया।
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दूध उत्पादन 2019-20 के 26,572 हजार टन से 2023-24 में 34,733 हजार टन हुआ; इसी अवधि में ऊन 144 लाख kg से 160 लाख kg हुआ।
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पाठ्यक्रम में स्थान: कृषि, पशुपालन और पशुधन
यह विषय CET वरिष्ठ माध्यमिक 2026 के दायरे में है, क्योंकि आधिकारिक वरिष्ठ माध्यमिक पाठ्यक्रम में राजस्थान की अर्थव्यवस्था के अंतर्गत 'राज्य के विकास में उद्योग, कृषि, पशुपालन और खनिज क्षेत्र की भूमिका' दी गई है और राजस्थान भूगोल में 'पशुधन' अलग बिंदु के रूप में दिया गया है। इसलिए इसे स्नातक-स्तर के कृषि विज्ञान की तरह नहीं, बल्कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था और भूगोल से जुड़े विषय की तरह पढ़ना चाहिए।
परीक्षा के लिए कृषि का अर्थ फसल, सिंचाई, वर्षा-निर्भरता, मंडी और ग्रामीण रोजगार से है। पशुपालन का अर्थ गोवंश, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट, दूध, ऊन, मांस, खाद, पशु-चिकित्सा और परिवार की आय-सुरक्षा से है। दोनों को जोड़ने वाली कड़ी चारा है: फसल-अवशेष पशुओं को भोजन देते हैं और पशु खेत को खाद तथा परिवार को नियमित नकद आय देते हैं।
सही पढ़ाई का तरीका यह है कि हर तथ्य को पानी, मिट्टी, जिला-पट्टी और आजीविका से जोड़ें। पश्चिमी सूखे जिले की फसल-पशुधन समझ नहर-सिंचित जिले या हाड़ौती पठार जैसी नहीं होगी।
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