राजस्थान की जलवायु, मिट्टियाँ और प्राकृतिक वनस्पति
मुख्य तथ्य
- 2026 वरिष्ठ माध्यमिक सिलेबस में यह विषय राजस्थान भूगोल के अंदर आता है: जलवायु दशाएँ, प्राकृतिक वनस्पति, प्रमुख मिट्टियाँ, वन संसाधन, वन्यजीव, अभयारण्य...
- 19 मई 2016 को IMD ने फलोदी, राजस्थान में 51.0 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया;
- ISFR 2023 के अनुसार राजस्थान का वन आवरण 16,548.21 वर्ग किमी है, जो राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का 4.84% है।
- भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान 1982 में राष्ट्रीय उद्यान बना और 1985 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ;
- जोधपुर के पास खेजड़ली सामुदायिक संरक्षण का प्रमुख उदाहरण है: 1730 में अमृता देवी और बिश्नोई ग्रामीणों का बलिदान खेजड़ी वृक्षों की रक्षा से जोड़ा जाता...
मुख्य बिंदु
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2026 वरिष्ठ माध्यमिक सिलेबस में यह विषय राजस्थान भूगोल के अंदर आता है: जलवायु दशाएँ, प्राकृतिक वनस्पति, प्रमुख मिट्टियाँ, वन संसाधन, वन्यजीव, अभयारण्य और संरक्षण।
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राजस्थान को केवल मरुस्थल कहकर नहीं पढ़ना चाहिए: पश्चिमी राजस्थान शुष्क से अर्ध-शुष्क है, जबकि पूर्व और दक्षिण में वर्षा तथा स्थलरूप के कारण नमी अधिक मिलती है।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून मुख्य वर्षा ऋतु देता है; पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली शीतकालीन वर्षा को मावठ कहा जाता है और यह रबी फसलों के लिए उपयोगी होती है।
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19 मई 2016 को IMD ने फलोदी, राजस्थान में 51.0 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया; IMD की 2016 वार्षिक रिपोर्ट इसे भारत का सबसे अधिक दर्ज तापमान बताती है।
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ISFR 2023 के अनुसार राजस्थान का वन आवरण 16,548.21 वर्ग किमी है, जो राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का 4.84% है।
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भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान 1982 में राष्ट्रीय उद्यान बना और 1985 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ; PIB इसके अक्टूबर 1981 रामसर अधिसूचना का भी उल्लेख करता है।
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जोधपुर के पास खेजड़ली सामुदायिक संरक्षण का प्रमुख उदाहरण है: 1730 में अमृता देवी और बिश्नोई ग्रामीणों का बलिदान खेजड़ी वृक्षों की रक्षा से जोड़ा जाता है।
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सिलेबस ढाँचा और जलवायु की मूल समझ
इस पाठ को 2026 CET वरिष्ठ माध्यमिक सिलेबस के अंदर ही पढ़ें। राजस्थान भूगोल के संबंधित बिंदु हैं: जलवायु दशाएँ, प्राकृतिक वनस्पति, प्रमुख मिट्टियाँ, राजस्थान के प्राकृतिक संसाधनों में वन संसाधन, और वन्यजीव, अभयारण्य तथा संरक्षण। इसलिए यहाँ राजस्थान की जलवायु, मिट्टियाँ, वनस्पति और संरक्षण-स्थल पढ़ने हैं; स्नातक-स्तर के भारत-व्यापी फसल, खनिज या आर्थिक भूगोल में नहीं जाना है।
राजस्थान की जलवायु को केवल “मरुस्थलीय जलवायु” कह देना अधूरा है। पश्चिमी राजस्थान समुद्र से दूर, थार मरुस्थल के पास और कम प्रभावी मानसूनी वर्षा वाला क्षेत्र है, इसलिए वहाँ गर्मी और सूखापन अधिक दिखता है। पूर्व, दक्षिण-पूर्व और दक्षिणी पहाड़ी पट्टी अपेक्षाकृत अधिक नम हैं। जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और चूरू शुष्क पश्चिम के उदाहरण हैं; जयपुर, अजमेर और अलवर अर्ध-शुष्क संक्रमण क्षेत्र में रखे जा सकते हैं; कोटा, बारां, झालावाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और माउंट आबू अपेक्षाकृत नम किनारा दिखाते हैं।
अरावली इस क्रम को समझाने की मुख्य रेखा है। इसकी दिशा मोटे तौर पर दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व है। अरब सागर शाखा की मानसूनी हवाएँ कई बार इसके लगभग समानांतर चलती हैं, इसलिए पश्चिमी राजस्थान में तेज पर्वतीय वर्षा नहीं बनती। पूर्वी मैदानी भाग, हाड़ौती और दक्षिणी राजस्थान की ओर नमी बढ़ती है। CET के लिए क्रम याद रखें: पश्चिम में कम वर्षा, पूर्व और दक्षिण-पूर्व में अधिक मानसूनी सहारा, और जलवायु से मिट्टी, वनस्पति तथा खेती जुड़ती है।
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