मुख्य तथ्य

  • CET वरिष्ठ माध्यमिक में इस टॉपिक को आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के भीतर रखें; पूरे मानसून-तंत्र की व्याख्या न बनाएं।
  • जलवायु को केवल जोखिम की पृष्ठभूमि की तरह जोड़ें, जैसे बाढ़, सूखा, लू, चक्रवात, बिजली गिरना, भूस्खलन और बादल फटना।
  • अच्छा उत्तर हर जोखिम को प्रभावित क्षेत्र, चेतावनी, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्वास से जोड़ता है।
  • बाढ़ के उत्तर में भारी वर्षा, नदी का उफान, बांध से पानी छोड़ना, जलनिकासी, निकासी, साफ पानी और बीमारी से बचाव जोड़ें।
  • सूखा और लू के उत्तर में जल-संरक्षण, स्थानीय भंडारण, फसल और पशुधन देखभाल, छाया, पानी पीना और काम के समय में बदलाव जोड़ें।

मुख्य बिंदु

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    CET वरिष्ठ माध्यमिक में इस टॉपिक को आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के भीतर रखें; पूरे मानसून-तंत्र की व्याख्या न बनाएं।

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    जलवायु को केवल जोखिम की पृष्ठभूमि की तरह जोड़ें, जैसे बाढ़, सूखा, लू, चक्रवात, बिजली गिरना, भूस्खलन और बादल फटना।

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    अच्छा उत्तर हर जोखिम को प्रभावित क्षेत्र, चेतावनी, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्वास से जोड़ता है।

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    बाढ़ के उत्तर में भारी वर्षा, नदी का उफान, बांध से पानी छोड़ना, जलनिकासी, निकासी, साफ पानी और बीमारी से बचाव जोड़ें।

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    सूखा और लू के उत्तर में जल-संरक्षण, स्थानीय भंडारण, फसल और पशुधन देखभाल, छाया, पानी पीना और काम के समय में बदलाव जोड़ें।

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    चक्रवात के उत्तर में तटीय जोखिम, तेज हवा, भारी वर्षा, तूफानी ज्वार, मछुआरों की चेतावनी, निकासी और तट के बाद की सुरक्षा पर ध्यान दें।

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    जलवायु परिवर्तन को लंबे समय में जोखिम बढ़ाने वाले कारक की तरह लिखें, हर मौसम घटना का अपने-आप कारण बताने की तरह नहीं।

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    राजस्थान के लिए लू, सूखा-प्रवण क्षेत्र, जल-संचयन, तेज बारिश में अचानक बाढ़ का खतरा और पशुधन सुरक्षा उपयोगी जोड़ हैं।

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    परीक्षा-सुरक्षित ढाँचा है: जोखिम -> प्रभावित क्षेत्र -> चेतावनी -> तैयारी -> प्रतिक्रिया -> राहत और पुनर्वास।

वरिष्ठ माध्यमिक दायरा

CET वरिष्ठ माध्यमिक में यह पाठ भारत के भूगोल से आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के जरिए जुड़ता है। इसे मानसून के काम करने का अलग अध्याय नहीं बनाना है। यहाँ जलवायु की उपयोगी पृष्ठभूमि इतनी है कि मौसम की दशाएँ जोखिम बना सकती हैं, और भूगोल बताता है कि नुकसान कहाँ ज्यादा हो सकता है।

शुरुआत स्थान से करें। नदी-मैदान और निचली बस्तियों में बाढ़ की तैयारी चाहिए। सूखे क्षेत्रों में सूखा और पानी की योजना चाहिए। तटीय क्षेत्रों में चक्रवात और तूफानी ज्वार की तैयारी चाहिए। पहाड़ियों में भूस्खलन और बादल फटने की तैयारी चाहिए। गरम मैदानों में लू की तैयारी चाहिए। वन, झीलें, बांध, सड़कें, स्कूल, अस्पताल और बस्तियाँ भी जिला तैयारी को प्रभावित करते हैं।

परीक्षा में ध्यान रखने वाला सवाल व्यावहारिक है: कौन-सा जोखिम हो सकता है, कौन प्रभावित होगा, कौन-सी चेतावनी उपलब्ध है, घटना से पहले और घटना के दौरान लोगों को क्या करना चाहिए, और राहत तथा पुनर्वास कैसे होना चाहिए? यही इस टॉपिक को वरिष्ठ माध्यमिक पाठ्यक्रम के भीतर रखता है।

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