कला, स्थापत्य, मेले, त्योहार, लोक संगीत और नृत्य
मुख्य तथ्य
- 1459 में राव जोधा ने जोधपुर बसाया और मेहरानगढ़ की शुरुआत की, जिससे मारवाड़ की राठौड़ सत्ता को नया पहाड़ी आधार मिला।
- राणा कुम्भा कुम्भलगढ़ और चित्तौड़गढ़ के विजय स्तम्भ से जुड़े हैं; राजस्थान पर्यटन विजय स्तम्भ का निर्माण-काल 1440 से 1448 बताता है।
- 1588 में राजा राय सिंह ने बीकानेर का जूनागढ़ किला बनवाया, जो राजस्थान के प्रमुख समतल किलों में गिना जाता है।
- 1727 में सवाई जय सिंह द्वितीय ने जयपुर बसाया और कछवाहा सत्ता को पुराने आमेर से नियोजित परकोटे वाले शहर की ओर ले गए।
- 1799 में सवाई प्रताप सिंह ने जयपुर में हवा महल बनवाया; स्थापत्य के प्रश्नों में यह जयपुर का महत्त्वपूर्ण स्मारक है।
मुख्य बिंदु
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1459 में राव जोधा ने जोधपुर बसाया और मेहरानगढ़ की शुरुआत की, जिससे मारवाड़ की राठौड़ सत्ता को नया पहाड़ी आधार मिला।
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राणा कुम्भा कुम्भलगढ़ और चित्तौड़गढ़ के विजय स्तम्भ से जुड़े हैं; राजस्थान पर्यटन विजय स्तम्भ का निर्माण-काल 1440 से 1448 बताता है।
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1588 में राजा राय सिंह ने बीकानेर का जूनागढ़ किला बनवाया, जो राजस्थान के प्रमुख समतल किलों में गिना जाता है।
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1727 में सवाई जय सिंह द्वितीय ने जयपुर बसाया और कछवाहा सत्ता को पुराने आमेर से नियोजित परकोटे वाले शहर की ओर ले गए।
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1799 में सवाई प्रताप सिंह ने जयपुर में हवा महल बनवाया; स्थापत्य के प्रश्नों में यह जयपुर का महत्त्वपूर्ण स्मारक है।
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UNESCO की ‘राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग’ श्रृंखला में चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, रणथम्भौर, गागरोन, आमेर और जैसलमेर शामिल हैं।
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कालबेलिया लोक गीत और नृत्य इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की आधिकारिक अमूर्त-विरासत सूची में दर्ज हैं।
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शिल्प-स्थान-तकनीक संबंध याद रखें: थेवा-प्रतापगढ़-काँच पर सोना; ब्लू पॉटरी-जयपुर-क्वार्ट्ज आधारित बर्तन; मोलेला-टेराकोटा पट्टिकाएँ; सांगानेरी और बगरू-हाथ-छपाई।
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लोकदेवता और सम्प्रदाय में देवता, स्थान और सांस्कृतिक रूप को साथ याद करें: रामदेवजी-रामदेवरा, गोगाजी-गोगामेड़ी, पाबूजी और देवनारायणजी-फड़-भोपा, नाथद्वारा-श्रीनाथजी पिछवाई।
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भाषा, बोलियाँ, साहित्य और कला-संस्कृति के व्यक्तित्व वरिष्ठ माध्यमिक पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं; हर नाम को उसकी सही भूमिका से जोड़कर याद रखें।
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दुर्ग, महल और रक्षात्मक स्थापत्य
राजस्थान के स्थापत्य को उसके उद्देश्य, स्थान और उसे बनवाने वाले शासक के साथ पढ़ें। चित्तौड़गढ़ मेवाड़ की प्रतिष्ठा का दुर्ग है और सिसोदिया इतिहास, घेराबंदी, विजय स्तम्भ तथा राणा कुम्भा के निर्माण कार्यों से जुड़ा है। राजस्थान पर्यटन विजय स्तम्भ को महाराणा कुम्भा का विजय-स्मारक बताता है, जिसका निर्माण 1440 से 1448 के बीच हुआ। राणा कुम्भा से जुड़ा कुम्भलगढ़ अरावली क्षेत्र का रणनीतिक दुर्ग था। रणथम्भौर चौहान परंपरा और बाद में सल्तनत से हुए संघर्षों से जुड़ा है, जबकि UNESCO की श्रृंखला में गागरोन की पहचान पहाड़ी और जल से घिरे दुर्ग के रूप में है।
हर प्रमुख किला ऊँची पहाड़ी पर नहीं है। बीकानेर का जूनागढ़ 1588 में राजा राय सिंह ने बनवाया था। मज़बूत दीवारों, द्वारों, महलों और दरबार के कक्षों वाला यह एक प्रमुख समतल किला है। जोधपुर का मेहरानगढ़ 1459 में राव जोधा ने बनवाना शुरू किया था और यह राठौड़ों की पहाड़ी दुर्ग परंपरा को दिखाता है। जैसलमेर का किला भाटियों के मरुस्थलीय क्षेत्र से जुड़ा है और ऐसे जीवित किले के रूप में जाना जाता है जहाँ रक्षा, बस्ती और व्यापार का इतिहास साथ मिलता है। जयपुर के पास आमेर एक महल-दुर्ग है; उसके आँगन, द्वार, झील के पास का स्थान और शाही कक्ष उतने ही महत्त्वपूर्ण हैं जितनी उसकी सैन्य दीवारें।
वरिष्ठ माध्यमिक परीक्षा के लिए हर दुर्ग या स्मारक को एक क्षेत्र, एक राजवंश या शासक और एक स्थापत्य विशेषता से जोड़ें। चित्तौड़गढ़-विजय स्तम्भ-मेवाड़, कुम्भलगढ़-अरावली की रक्षा, जूनागढ़-समतल किला-बीकानेर, आमेर-माओटा झील-कछवाहा और जैसलमेर-मरुस्थल का जीवित किला खास तौर पर याद रखें।
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मॉडल उत्तर
गागरोन की पहचान नदी से सुरक्षित दुर्ग के रूप में है। यहाँ प्राकृतिक भू-आकृति रक्षा का हिस्सा बनती है; सुरक्षा केवल दीवारों पर निर्भर नहीं रहती। यही बात इसे वन से घिरी पहाड़ी वाले रणथम्भौर और मरुस्थलीय जैसलमेर से अलग करती है। इसलिए अच्छे उत्तर में केवल जिला या राजवंश नहीं, बल्कि गागरोन का जल और भू-आकृति से संबंध लिखना चाहिए।
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