मुख्य तथ्य

  • नशीले पदार्थ का दुरुपयोग तब माना जाता है जब कोई व्यक्ति दवा, शराब, तंबाकू या अवैध पदार्थ को चिकित्सकीय जरूरत, निर्धारित मात्रा या सुरक्षित सामाजिक व्य...
  • उपयोग से दुरुपयोग, हानिकारक उपयोग, निर्भरता और लत तक बात बढ़ सकती है, पर यह रास्ता अपने आप तय नहीं होता;
  • सामान्य उदाहरणों में तंबाकू और निकोटीन उत्पाद, शराब, कैनाबिस उत्पाद, अफीम-जैसे दर्दनिवारक पदार्थ, शांतिदायक दवाएं, सूंघकर लिए जाने वाले पदार्थ, उत्तेज...
  • परीक्षा के लिए उपयोगी वर्ग हैं अवसादक, उत्तेजक, विभ्रमकारी, अफीम-जैसे दर्दनिवारक पदार्थ, सूंघकर लिए जाने वाले पदार्थ, निकोटीन उत्पाद और दवाओं का दुरुप...
  • युवाओं में जोखिम साथियों के दबाव, जिज्ञासा, तनाव, आसान उपलब्धता, कमजोर निगरानी और अनदेखी भावनात्मक परेशानी से बढ़ सकता है।

मुख्य बिंदु

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    नशीले पदार्थ का दुरुपयोग तब माना जाता है जब कोई व्यक्ति दवा, शराब, तंबाकू या अवैध पदार्थ को चिकित्सकीय जरूरत, निर्धारित मात्रा या सुरक्षित सामाजिक व्यवहार से बाहर इस तरह प्रयोग करे कि स्वास्थ्य, पढ़ाई, परिवार, सुरक्षा या कानून पर असर पड़े।

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    उपयोग से दुरुपयोग, हानिकारक उपयोग, निर्भरता और लत तक बात बढ़ सकती है, पर यह रास्ता अपने आप तय नहीं होता; सहनशीलता और नशा छोड़ने पर होने वाले लक्षण शरीर के अनुकूलन के चेतावनी संकेत हैं।

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    सामान्य उदाहरणों में तंबाकू और निकोटीन उत्पाद, शराब, कैनाबिस उत्पाद, अफीम-जैसे दर्दनिवारक पदार्थ, शांतिदायक दवाएं, सूंघकर लिए जाने वाले पदार्थ, उत्तेजक पदार्थ और बिना चिकित्सकीय जरूरत ली गई दवाएं शामिल हैं।

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    परीक्षा के लिए उपयोगी वर्ग हैं अवसादक, उत्तेजक, विभ्रमकारी, अफीम-जैसे दर्दनिवारक पदार्थ, सूंघकर लिए जाने वाले पदार्थ, निकोटीन उत्पाद और दवाओं का दुरुपयोग; वर्गीकरण से असर और जोखिम समझने में मदद मिलती है।

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    युवाओं में जोखिम साथियों के दबाव, जिज्ञासा, तनाव, आसान उपलब्धता, कमजोर निगरानी और अनदेखी भावनात्मक परेशानी से बढ़ सकता है।

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    चेतावनी संकेतों को समूह में पढ़ना चाहिए: पढ़ाई गिरना, गुप्त व्यवहार, मूड बदलना, आंखें लाल या पानीदार होना, असामान्य गंध, पैसे गायब होना, जोखिम वाले मित्र और स्वस्थ गतिविधियों में रुचि कम होना।

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    रोकथाम सही जानकारी, परिवार का सहारा, विद्यालयी परामर्श, मना करने का कौशल, खेल और शौक, शुरुआती रेफरल और समुदाय की भागीदारी से मजबूत होती है।

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    भारत का प्रमुख मादक-द्रव्य कानून मादक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 है; जन-सहायता में NAPDDR, नशा मुक्त भारत अभियान, नशामुक्ति सेवाएं और हेल्पलाइन 14446 भी याद रखने योग्य हैं।

अवधारणा: उपयोग से लत तक

नशीला पदार्थ वह है जो मूड, सोच, निर्णय, व्यवहार या शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को बदल सकता है। वह पदार्थ वैध हो सकता है, जैसे तंबाकू या शराब; नियंत्रित दवा हो सकती है, जैसे कुछ शांतिदायक दवाएं या दर्दनिवारक; या अवैध पदार्थ हो सकता है, जैसे हेरोइन या अवैध कैनाबिस उत्पाद। जन-स्वास्थ्य की दृष्टि से असली मुद्दा पदार्थ का नाम भर नहीं, बल्कि उसका नुकसानदेह ढंग से बार-बार प्रयोग है, जिससे स्वास्थ्य, पढ़ाई, परिवार, पैसा, सुरक्षा या कानून-पालन प्रभावित हो।

उपयोग का अर्थ है सीमित और वैध संदर्भ में लेना, जैसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेना। दुरुपयोग तब होता है जब वही दवा अधिक मात्रा में, किसी और की पर्ची से, शराब के साथ मिलाकर या गलत कारण से ली जाए। हानिकारक उपयोग में नुकसान दिखने लगता है। निर्भरता में शरीर या मन पदार्थ के बिना सामान्य महसूस नहीं करता। लत या व्यसन में व्यक्ति नुकसान जानते हुए भी नियंत्रण खो देता है और तीव्र चाह उसे पढ़ाई, परिवार और स्वास्थ्य से ऊपर लगने लगती है।

सहनशीलता में पहले जैसा असर पाने के लिए मात्रा बढ़ानी पड़ती है, या वही मात्रा कम असर देती है। नशा छोड़ने पर होने वाले लक्षण पदार्थ घटाने या बंद करने पर आने वाली शारीरिक या मानसिक असहजता हैं; पदार्थ के अनुसार बेचैनी, पसीना, कंपकंपी, नींद न आना, घबराहट, चिड़चिड़ापन, शरीर दर्द, मिचली या उलझन दिख सकती है। इसलिए नशा केवल “बुरी आदत” नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, व्यवहार, परिवार और समाज से जुड़ी समस्या है।

CET में उपयोग, दुरुपयोग, निर्भरता, लत, सहनशीलता और नशा छोड़ने पर होने वाले लक्षणों का अंतर साफ रखना है.

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