नागरिक कर्तव्य: मूल कर्तव्य और नैतिक मूल्य
मुख्य तथ्य
- RSSB CET स्नातक 2026 में यह विषय समसामयिक घटनाएं एवं नागरिक कर्तव्य के अंतर्गत आता है;
- मूल कर्तव्य भारत के संविधान के भाग 4-क, अनुच्छेद 51A में दिए गए हैं; यह अनुच्छेद इस विषय का स्थिर परीक्षा-आधार है।
- 1950 के मूल संविधान में मूल कर्तव्य नहीं थे; 1976 में 42वें संविधान संशोधन से स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश के बाद 10 कर्तव्य जोड़े गए।
- 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 ने खंड (k) जोड़ा, जिसमें माता-पिता या अभिभावक का कर्तव्य है कि वे 6 से 14 वर्ष के बच्चे को शिक्षा का अवसर दें।
- आज अनुच्छेद 51A में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें संविधान का सम्मान, राष्ट्रीय एकता, सद्भाव, विरासत, पर्यावरण, वैज्ञानिक सोच, सार्वजनिक संपत्ति, उत्क...
मुख्य बिंदु
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RSSB CET स्नातक 2026 में यह विषय समसामयिक घटनाएं एवं नागरिक कर्तव्य के अंतर्गत आता है; इसलिए नागरिक कर्तव्य, मूल कर्तव्य और नैतिक मूल्य सीधे पाठ्यक्रम में हैं।
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मूल कर्तव्य भारत के संविधान के भाग 4-क, अनुच्छेद 51A में दिए गए हैं; यह अनुच्छेद इस विषय का स्थिर परीक्षा-आधार है।
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1950 के मूल संविधान में मूल कर्तव्य नहीं थे; 1976 में 42वें संविधान संशोधन से स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश के बाद 10 कर्तव्य जोड़े गए।
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86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 ने खंड (k) जोड़ा, जिसमें माता-पिता या अभिभावक का कर्तव्य है कि वे 6 से 14 वर्ष के बच्चे को शिक्षा का अवसर दें।
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आज अनुच्छेद 51A में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें संविधान का सम्मान, राष्ट्रीय एकता, सद्भाव, विरासत, पर्यावरण, वैज्ञानिक सोच, सार्वजनिक संपत्ति, उत्कृष्टता और बाल शिक्षा शामिल हैं।
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मूल कर्तव्य गैर-न्यायोचित हैं: वे संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं, लेकिन अनुच्छेद 51A अपने-आप नागरिक को सीधा अदालती उपचार नहीं देता।
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मौलिक अधिकार संवैधानिक उपचारों से लागू कराए जा सकते हैं, जबकि नीति-निदेशक तत्व राज्य की नीति को दिशा देते हैं और अनुच्छेद 37 के अनुसार अदालत से लागू नहीं कराए जा सकते।
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ईमानदारी, सहिष्णुता, सत्यनिष्ठा, कानून का सम्मान, महिलाओं की गरिमा, पर्यावरण-सुरक्षा और सार्वजनिक जिम्मेदारी जैसे नैतिक मूल्य नागरिक कर्तव्यों को रोजमर्रा के व्यवहार में बदलते हैं।
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पाठ्यक्रम में स्थान और नागरिक कर्तव्य का अर्थ
CET स्नातक 2026 में यह विषय आधिकारिक ब्लॉक समसामयिक घटनाएं एवं नागरिक कर्तव्य के अंतर्गत आता है। संबंधित पाठ्यक्रम बिंदु हैं: नागरिक कर्तव्य, मूल कर्तव्य और नैतिक मूल्य। इसलिए परीक्षा में सीधे संवैधानिक तथ्य भी पूछे जा सकते हैं और जिम्मेदार नागरिकता के व्यावहारिक उदाहरण भी। यहां लंबी कानूनी बहस नहीं, बल्कि स्नातक स्तर की साफ नागरिक समझ जरूरी है।
नागरिक कर्तव्य वे जिम्मेदारियां हैं जिन्हें नागरिक संविधान, समाज और राष्ट्र के प्रति निभाता है। अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करते हैं, लेकिन कर्तव्य बताते हैं कि उस स्वतंत्रता का उपयोग जिम्मेदारी से कैसे किया जाए। किसी व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो सकती है, पर नागरिक समझ मांग करती है कि वह स्वतंत्रता नफरत, अफवाह या हिंसा में न बदले। कोई व्यक्ति सड़क, स्कूल, अस्पताल, कार्यालय, पार्क और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर सकता है, लेकिन नागरिक कर्तव्य इन साझा संसाधनों की देखभाल मांगता है।
राजस्थान के उदाहरणों में जल-संरक्षण, बिना लालच के मतदान, सार्वजनिक स्थान को साफ रखना, सरकारी कार्यालय में कतार का सम्मान, यातायात नियमों का पालन और स्कूल या पंचायत की संपत्ति को नुकसान न पहुंचाना रोजमर्रा के नागरिक कर्तव्य हैं।
मुख्य बात: अधिकार नागरिक को सुरक्षा और अवसर देते हैं; कर्तव्य उस स्वतंत्रता को अनुशासन, सार्वजनिक हित और दूसरों के सम्मान से जोड़ते हैं।
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