मुख्य तथ्य

  • ईमेल में संदेश पहले भेजने वाले सर्वर से आगे जाता है और फिर प्राप्तकर्ता तक पहुंचता है;
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ने इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर को कानूनी मान्यता दी;
  • 1 जुलाई 2015 को शुरू हुए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने नागरिकों के लिए उपयोगिता के रूप में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मांग पर शासन और सेवाएं, तथा डिजिटल सशक...

मुख्य बिंदु

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    इंटरनेट नेटवर्कों का वैश्विक नेटवर्क है, जिसमें TCP/IP के नियमों से उपकरणों, सर्वरों और सेवाओं के बीच डेटा चलता है।

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    वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट की केवल एक सेवा है; ईमेल, फ़ाइल ट्रांसफर, क्लाउड स्टोरेज, संदेश, वीडियो बैठक और डिजिटल भुगतान भी इंटरनेट पर चलते हैं।

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    IP पता नेटवर्क पर उपकरण की पहचान करता है, जबकि DNS पढ़े जाने योग्य डोमेन नाम को IP पते में बदलता है।

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    ईमेल में संदेश पहले भेजने वाले सर्वर से आगे जाता है और फिर प्राप्तकर्ता तक पहुंचता है; SMTP भेजने में, POP3 या IMAP प्राप्त करने और सिंक करने में काम आते हैं।

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    साइबर सुरक्षा डेटा की गोपनीयता, शुद्धता और उपलब्धता बचाती है; फिशिंग, मालवेयर, रैनसमवेयर, कमजोर पासवर्ड और असुरक्षित सार्वजनिक वाई-फाई सामान्य खतरे हैं।

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    सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ने इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर को कानूनी मान्यता दी; CERT-In निर्देश और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 बाद के महत्त्वपूर्ण साइबर और डेटा-शासन संदर्भ हैं।

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    1 जुलाई 2015 को शुरू हुए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने नागरिकों के लिए उपयोगिता के रूप में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मांग पर शासन और सेवाएं, तथा डिजिटल सशक्तिकरण को मुख्य आधार बनाया।

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    राजस्थान में ई-मित्र और SSO राज्य-स्तरीय ई-सेवाएं हैं: ई-मित्र नागरिक सेवाएं और उपयोगिता भुगतान देता है, जबकि SSO कई सरकारी सेवाओं के लिए एक लॉगिन पहचान देता है।

इंटरनेट की मूल समझ

इंटरनेट दुनिया भर के कंप्यूटर नेटवर्कों का आपसी नेटवर्क है। किसी एक संस्था के पास पूरा इंटरनेट नहीं होता; अलग-अलग नेटवर्क मानकों और प्रोटोकॉल के सहारे जुड़े रहते हैं। परीक्षा की दृष्टि से इंटरनेट और वर्ल्ड वाइड वेब को अलग समझना जरूरी है। वेब वेबसाइटों और वेब पेजों की सेवा है, जिसे आम तौर पर ब्राउजर में HTTP या HTTPS से खोला जाता है। इंटरनेट उससे बड़ा ढांचा है; उसी पर ईमेल, फ़ाइल ट्रांसफर, क्लाउड स्टोरेज, इंटरनेट प्रोटोकॉल से चलने वाली वॉइस सेवा, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-लर्निंग, ई-गवर्नेंस पोर्टल, वीडियो स्ट्रीमिंग और संदेश सेवाएं भी चलती हैं।

इंटरनेट पर डेटा पैकेटों में चलता है। कोई संदेश, चित्र या फ़ाइल छोटे पैकेटों में टूटती है, राउटर उन्हें आगे भेजते हैं और प्राप्तकर्ता की तरफ वे फिर जुड़ते हैं। TCP क्रम और त्रुटि-जांच के सहारे भरोसेमंद डिलीवरी में मदद करता है, जबकि IP पता और रूटिंग संभालता है। यह पैकेट-स्विचिंग मॉडल पुराने टेलीफोन के सर्किट-स्विचिंग मॉडल से अलग है, जिसमें एक कॉल के लिए अलग रास्ता आरक्षित रहता था। CET के लिए यह अंतर उपयोगी है, क्योंकि इससे समझ आता है कि इंटरनेट एक साथ कई तरह का ट्रैफिक कैसे संभाल पाता है।

राजस्थान का सरल उदाहरण लें: नागरिक ई-मित्र कियोस्क या मोबाइल सेवा से बिल भुगतान करता है। उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस आसान दिख सकता है, पर पीछे इंटरनेट कनेक्शन, सर्वर, प्रमाणीकरण, डेटाबेस और सुरक्षित भुगतान चैनल साथ काम करते हैं।

मुख्य समझ: इंटरनेट बुनियादी ढांचा है; वेब और दूसरी ऑनलाइन सेवाएं उसी पर चलने वाले अनुप्रयोग हैं।

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