मुख्य तथ्य

  • कार्यालयी हिंदी का मूल नियम है: शब्द सुंदर नहीं, सटीक होना चाहिए; एक ही आशय के लिए पूरे पत्र या प्रारूप में एक ही पारिभाषिक शब्द रखें।
  • प्रारूपण शुरू करने से पहले 7 बातें तय करें: प्रेषक, प्राप्तकर्ता, विषय, संदर्भ, तथ्य, अपेक्षित कार्रवाई और संलग्नक।
  • औपचारिक पत्र का क्रम सामान्यतः कार्यालय शीर्ष, दिनांक, प्राप्तकर्ता, विषय, संबोधन, मुख्य भाग, समापन, हस्ताक्षर और संलग्नक सूचना होता है।
  • सूचना, परिपत्र, ज्ञापन और आदेश अलग दस्तावेज हैं: सूचना जानकारी देती है, परिपत्र समान निर्देश फैलाता है, ज्ञापन विषय दर्ज करता है और आदेश निर्णय लागू क...
  • सामान्य त्रुटि चेतावनी: आवेदन की विनम्र भाषा को आदेश में और आदेश की निर्देशात्मक भाषा को आवेदन में न मिलाएँ;

मुख्य बिंदु

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    कार्यालयी हिंदी का मूल नियम है: शब्द सुंदर नहीं, सटीक होना चाहिए; एक ही आशय के लिए पूरे पत्र या प्रारूप में एक ही पारिभाषिक शब्द रखें।

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    प्रारूपण शुरू करने से पहले 7 बातें तय करें: प्रेषक, प्राप्तकर्ता, विषय, संदर्भ, तथ्य, अपेक्षित कार्रवाई और संलग्नक।

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    औपचारिक पत्र का क्रम सामान्यतः कार्यालय शीर्ष, दिनांक, प्राप्तकर्ता, विषय, संबोधन, मुख्य भाग, समापन, हस्ताक्षर और संलग्नक सूचना होता है।

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    सूचना, परिपत्र, ज्ञापन और आदेश अलग दस्तावेज हैं: सूचना जानकारी देती है, परिपत्र समान निर्देश फैलाता है, ज्ञापन विषय दर्ज करता है और आदेश निर्णय लागू करता है।

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    सामान्य त्रुटि चेतावनी: आवेदन की विनम्र भाषा को आदेश में और आदेश की निर्देशात्मक भाषा को आवेदन में न मिलाएँ; प्रारूप, अधिकार-स्तर और विनम्रता दस्तावेज के प्रकार से मेल खाने चाहिए।

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    पत्र के मुख्य भाग का सूत्र है: आरंभिक संदर्भ + आवश्यक तथ्य + माँगी गई या निर्देशित कार्रवाई; भावुक पृष्ठभूमि और सजावटी प्रशंसा छोड़ दें।

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    पत्र-लेखन में विषय-पंक्ति संक्षिप्त पर पूरी होनी चाहिए; अस्पष्ट विषय से पूरी रचना कमजोर हो जाती है।

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    अंतिम जाँच में पदनाम, नाम, फाइल संख्या, दिनांक, संलग्नक, वर्तनी और कार्रवाई योग्य वाक्य अवश्य देखें।

कार्यालयी हिंदी का स्वरूप

कार्यालयी हिंदी वह हिंदी है जो सरकारी, अर्द्धसरकारी और संस्थागत कामकाज में पत्र, आवेदन, सूचना, प्रतिवेदन, आदेश, कार्यवृत्त और नियमित पत्राचार के रूप में इस्तेमाल होती है। इसका लक्ष्य साहित्यिक प्रभाव डालना या सामान्य बोलचाल अपनाना नहीं, बल्कि काम को स्पष्ट रूप से आगे बढ़ाना है। CET के स्नातक स्तर पर इस विषय में अभ्यर्थी से यह अपेक्षा होती है कि वह भाषा की शुद्धता के साथ सही दस्तावेज-प्रकार पहचाने, सटीक कार्यालयी शब्द चुने, तथ्यों को व्यवस्थित करे और स्पष्ट औपचारिक स्वर बनाए रखे। इसलिए यह विषय केवल व्याकरण नहीं है; यह भाषा, प्रक्रिया और व्यवहार का संयुक्त अध्ययन है।

कार्यालयी हिंदी सामान्य बोलचाल से अलग इसलिए है क्योंकि इसमें पद, अधिकार, उत्तरदायित्व और अभिलेख का महत्व होता है। अच्छा कार्यालयी प्रारूप चार प्रश्नों का उत्तर देता है: कौन लिख रहा है, किसे लिख रहा है, किस विषय पर लिख रहा है और आगे क्या अपेक्षित है। यह अपेक्षा अनुरोध, अनुमति, निर्देश, अनुस्मारक, स्पष्टीकरण, अनुमोदन, अस्वीकृति, अग्रेषण टिप्पणी या बैठक के अभिलेख के रूप में हो सकती है। राजस्थान के संदर्भ में जिला शिक्षा कार्यालय यदि महाविद्यालयों से नामांकन आँकड़े मँगाए, तो भाषा में कार्यालय, माँगा गया आँकड़ा, प्रारूप, अंतिम तिथि और अनुपालन के लिए जिम्मेदार अधिकारी साफ होना चाहिए। सम्मानपूर्ण भाषा जरूरी है, पर अत्यधिक विनम्रता निर्देश को छिपा नहीं देनी चाहिए।

मुख्य बात यह है कि कार्यालयी हिंदी तब सही है जब वह किसी आधिकारिक कार्रवाई, अभिलेख या उत्तर को स्पष्ट कर दे।

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