मुख्य तथ्य

  • हिंदी में शब्द-भेद का परीक्षण काम के आधार पर होता है: संज्ञा व्यक्ति, स्थान, वस्तु या भाव का नाम बताती है; सर्वनाम संज्ञा का स्थान लेता है;
  • वाक्य को पहले कर्ता, कर्म और क्रिया से जाँचें: कर्ता कार्य करने वाला या अनुभव करने वाला होता है, कर्म वह है जिस पर कार्य का प्रभाव पड़ता है, और क्रिया...
  • काल और अवस्था को साथ पढ़ना चाहिए: वर्तमान, भूत और भविष्य समय बताते हैं, जबकि सामान्य, अपूर्ण और पूर्ण रूप कार्य की रीति या पूर्णता बताते हैं।
  • वाच्य कथन का केंद्र बदलता है: कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान होता है, कर्मवाच्य में कर्म प्रधान होता है, और भाववाच्य में सामान्य कर्म-केंद्र के बिना क्रि...
  • कारक संज्ञा का क्रिया से संबंध बताता है; प्रमुख संबंध कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन हैं।

मुख्य बिंदु

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    हिंदी में शब्द-भेद का परीक्षण काम के आधार पर होता है: संज्ञा व्यक्ति, स्थान, वस्तु या भाव का नाम बताती है; सर्वनाम संज्ञा का स्थान लेता है; विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है; क्रिया कार्य, अवस्था या घटना व्यक्त करती है।

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    वाक्य को पहले कर्ता, कर्म और क्रिया से जाँचें: कर्ता कार्य करने वाला या अनुभव करने वाला होता है, कर्म वह है जिस पर कार्य का प्रभाव पड़ता है, और क्रिया काल, अवस्था, भाव, लिंग और वचन के संकेत देती है।

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    काल और अवस्था को साथ पढ़ना चाहिए: वर्तमान, भूत और भविष्य समय बताते हैं, जबकि सामान्य, अपूर्ण और पूर्ण रूप कार्य की रीति या पूर्णता बताते हैं।

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    वाच्य कथन का केंद्र बदलता है: कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान होता है, कर्मवाच्य में कर्म प्रधान होता है, और भाववाच्य में सामान्य कर्म-केंद्र के बिना क्रिया या अवस्था प्रधान होती है।

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    कारक संज्ञा का क्रिया से संबंध बताता है; प्रमुख संबंध कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन हैं।

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    आधुनिक हिंदी में परसर्ग कारक के व्यावहारिक संकेत हैं: "ने", "को", "से", "के लिए", "का", "की", "के", "में", "पर" तथा "हे" और "अरे" जैसे संबोधन-सूचक शब्द कारक पहचानने में मदद करते हैं, पर संदर्भ निर्णायक रहता है।

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    समास के प्रश्नों में ठीक वर्गीकरण चाहिए: बहुव्रीहि किसी तीसरी वस्तु का बोध कराता है, कर्मधारय में विशेषण और संज्ञा उसी वस्तु से जुड़े रहते हैं, तत्पुरुष में कारक-संबंध होता है, और द्वंद्व दो समान पदों को जोड़ता है।

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    व्याकरण के बहुविकल्पीय प्रश्नों में शब्द का नाम बताने से पहले दिए गए वाक्य में उसका काम पहचानें; वही रूप वाक्य-कार्य बदलने पर अलग भेद में आ सकता है।

CET स्नातक स्तर पर हिंदी व्याकरण का दायरा

CET के स्नातक स्तर में हिंदी व्याकरण का उद्देश्य केवल परिभाषाएँ याद कराना नहीं है। 2026 के स्नातक स्तर पाठ्यक्रम में सामान्य हिन्दी के अंतर्गत संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रिया-विशेषण, कारक और अव्यय दिए गए हैं; इसी खंड में संधि, समास, उपसर्ग, प्रत्यय, शब्द-शुद्धि, वाक्य-शुद्धि, मुहावरे, लोकोक्तियाँ और कार्यालयी पत्रों का ज्ञान भी शामिल है। प्रश्न सामान्यतः भाषा की संरचना, वाक्य में शब्दों की भूमिका, शुद्ध प्रयोग और अर्थ-भेद को परखते हैं। इसलिए तैयारी में शब्द-भेद, काल, वाच्य और कारक को अलग-अलग अध्याय मानकर पढ़ना पर्याप्त नहीं है; इन्हें वाक्य-निर्माण की परस्पर जुड़ी व्यवस्था की तरह समझना पड़ता है। एक छोटा वाक्य भी संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण, परसर्ग, काल और कारक के कई संकेत साथ लेकर चलता है।

स्नातक स्तर पर अपेक्षा यह रहती है कि अभ्यर्थी सामान्य विद्यालयी नियमों से आगे बढ़कर अपवाद, संदर्भ और अर्थ-सूक्ष्मता पहचान सके। उदाहरण के लिए "तेज" कभी विशेषण हो सकता है, जैसे "तेज हवा चली", और कभी संज्ञा-सदृश प्रयोग में आ सकता है, जैसे "उसके चेहरे का तेज अलग था"। इसी तरह "ने" दिखते ही उत्तर रटकर नहीं लगाना चाहिए; वाक्य की क्रिया, कर्ता की भूमिका और सकर्मकता को साथ देखना चाहिए।

इस अध्याय को पढ़ते समय हर नियम को उदाहरण-वाक्य में परखें। राजस्थान से जुड़े सरल वाक्य, जैसे "अभ्यर्थी ने जयपुर में आवेदन जमा किया", कारक, काल और क्रिया-संबंध समझाने के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

मुख्य बात यह है कि व्याकरण को शब्द-सूची नहीं, वाक्य को सही पढ़ने की विधि मानकर चलें।

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