रेखाएँ, कोण, त्रिभुजों की सर्वांगसमता, त्रिकोणमितीय अनुपात और ऊँचाई-दूरी
मुख्य तथ्य
- किसी बिंदु के चारों ओर बने सभी कोणों का योग 360° होता है, सीधी रेखा पर बने कोणों का योग 180° होता है, और शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं।
- रैखिक युग्म में 2 आसन्न कोण होते हैं जिनकी साझा न होने वाली भुजाएँ सीधी रेखा बनाती हैं; इसलिए उनका योग हमेशा 180° होता है।
- समानांतर रेखाओं को कोई तिर्यक रेखा काटे तो संगत कोण बराबर, एकांतर अंतः कोण बराबर और सह-अंतः कोणों का योग 180° होता है।
- त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° और चतुर्भुज का 360° होता है; n भुजाओं वाली सीधी रेखाओं से बनी आकृति का कोण-योग (n - 2) × 180° है।
मुख्य बिंदु
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किसी बिंदु के चारों ओर बने सभी कोणों का योग 360° होता है, सीधी रेखा पर बने कोणों का योग 180° होता है, और शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं।
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रैखिक युग्म में 2 आसन्न कोण होते हैं जिनकी साझा न होने वाली भुजाएँ सीधी रेखा बनाती हैं; इसलिए उनका योग हमेशा 180° होता है।
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समानांतर रेखाओं को कोई तिर्यक रेखा काटे तो संगत कोण बराबर, एकांतर अंतः कोण बराबर और सह-अंतः कोणों का योग 180° होता है।
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त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° और चतुर्भुज का 360° होता है; n भुजाओं वाली सीधी रेखाओं से बनी आकृति का कोण-योग (n - 2) × 180° है।
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सर्वांगसम त्रिभुज आकार और माप दोनों में बराबर होते हैं; तीन-भुजा, दो-भुजा-बीच-का-कोण, दो-कोण-भुजा और समकोण-कर्ण-भुजा मान्य कसौटियाँ हैं, पर तीन-कोण केवल समरूपता देता है।
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समकोण त्रिभुज में साइन θ = सामने वाली भुजा/कर्ण, कोसाइन θ = सटी हुई भुजा/कर्ण और टैन θ = सामने वाली भुजा/सटी हुई भुजा होता है।
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ऊँचाई-दूरी के प्रश्न में पहले समकोण त्रिभुज बनाएं, उन्नयन या अवनमन कोण चिह्नित करें, फिर वही अनुपात चुनें जिसमें पूछा गया माप हो।
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CET में आम गलतियाँ कोण-जोड़ी गलत पहचानने, समरूपता को सर्वांगसमता मानने या ऊँचाई और क्षैतिज दूरी को मिलाने से होती हैं।
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किसी बिंदु पर रेखाएँ और कोण
कोण तब बनता है जब 2 किरणें एक ही बिंदु से निकलती हैं। उस सामान्य बिंदु को शीर्ष और किरणों को कोण की भुजाएँ माना जाता है। इस हिस्से में CET का उद्देश्य लंबा प्रमाण नहीं, बल्कि सही पहचान है: प्रश्न सीधी रेखा का है, पूरे घुमाव का है, सामने-सामने बने कोणों का है या आसन्न कोणों का?
सीधा कोण 180° का होता है। सरल भाषा में, जब कोई किरण आधा चक्कर घूमकर सीधी रेखा बना दे, तो सीधा कोण बनता है। यदि कोई बिंदु एक सीधी रेखा पर पड़ा है, तो उस बिंदु पर एक ओर से दूसरी ओर बना कोण 180° होगा। इसी सीधी रेखा पर उसी बिंदु के पास बने छोटे-छोटे कोणों का कुल योग भी 180° होगा।
पूर्ण कोण 360° का होता है। यह किसी बिंदु के चारों ओर 1 पूरा चक्कर दिखाता है। यदि किसी बिंदु के चारों ओर बिना खाली जगह के कई कोण बने हैं, तो उनका योग 360° होगा। उदाहरण: किसी बिंदु पर 4 कोण 70°, 95°, 110° और x° हैं। तब x = 360 - (70 + 95 + 110) = 85°।
आसन्न कोणों का शीर्ष समान होता है, 1 भुजा समान होती है और उनके अंदरूनी भाग आपस में नहीं चढ़ते। यदि 2 कोणों में बीच की किरण समान भुजा है और दोनों कोण उस किरण के अलग-अलग ओर हैं, तो वे आसन्न कोण हैं। रैखिक युग्म आसन्न कोणों का खास रूप है। इसमें साझा न होने वाली भुजाएँ सीधी रेखा बनाती हैं, इसलिए दोनों कोणों का योग 180° होता है। यदि रैखिक युग्म में 1 कोण 124° है, तो दूसरा 56° होगा।
शीर्षाभिमुख कोण तब बनते हैं जब 2 रेखाएँ एक-दूसरे को काटती हैं। सामने-सामने वाले कोण बराबर होते हैं, पास-पास वाले नहीं। यदि 2 रेखाएँ किसी बिंदु पर कटती हैं और 1 कोण 65° है, तो ठीक सामने वाला कोण भी 65° होगा। उसके साथ लगे दोनों कोण 180 - 65 = 115° होंगे। बहुविकल्पीय प्रश्न में यदि एक्स आकार की रेखाएँ दिखें, तो पहले बराबर शीर्षाभिमुख कोण पहचानें, फिर सीधी रेखा वाले 180° का उपयोग करें।
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