मुख्य तथ्य

  • लाभ और हानि प्रतिशत क्रय मूल्य पर निकाले जाते हैं; छूट प्रतिशत अंकित मूल्य पर निकाला जाता है, इसलिए पहले आधार तय करना जरूरी है।
  • अंकित मूल्य, छूट और विक्रय मूल्य एक मूल्य-श्रृंखला बनाते हैं; हर प्रतिशत अपने वर्तमान आधार पर लगेगा, सीधे जोड़ने-घटाने से उत्तर बिगड़ता है।
  • उलटे लाभ-हानि प्रश्नों में अंतिम विक्रय मूल्य से मूल क्रय मूल्य दोबारा बनाना पड़ता है; विक्रय मूल्य से लाभ प्रतिशत घटाना गलत आधार देता है।
  • सप्लाई से पहले या उसी समय इनवॉइस में दर्ज व्यापारिक छूट घटाने के बाद बचे कर-योग्य मूल्य पर GST निकाला जाता है;
  • गलत बाट या कम मात्रा वाले प्रश्नों में वास्तविक मात्रा की लागत और बताई गई मात्रा की प्राप्ति की तुलना करनी होती है, इसलिए बताई गई इकाई का मूल्य समान द...

मुख्य बिंदु

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    लाभ और हानि प्रतिशत क्रय मूल्य पर निकाले जाते हैं; छूट प्रतिशत अंकित मूल्य पर निकाला जाता है, इसलिए पहले आधार तय करना जरूरी है।

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    अंकित मूल्य, छूट और विक्रय मूल्य एक मूल्य-श्रृंखला बनाते हैं; हर प्रतिशत अपने वर्तमान आधार पर लगेगा, सीधे जोड़ने-घटाने से उत्तर बिगड़ता है।

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    उलटे लाभ-हानि प्रश्नों में अंतिम विक्रय मूल्य से मूल क्रय मूल्य दोबारा बनाना पड़ता है; विक्रय मूल्य से लाभ प्रतिशत घटाना गलत आधार देता है।

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    सप्लाई से पहले या उसी समय इनवॉइस में दर्ज व्यापारिक छूट घटाने के बाद बचे कर-योग्य मूल्य पर GST निकाला जाता है; खरीदार से लिया गया कर अपने आप व्यापारी का लाभ नहीं होता।

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    गलत बाट या कम मात्रा वाले प्रश्नों में वास्तविक मात्रा की लागत और बताई गई मात्रा की प्राप्ति की तुलना करनी होती है, इसलिए बताई गई इकाई का मूल्य समान दिखने पर भी लाभ बन सकता है।

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    कई वस्तुओं के प्रश्नों में पहले देखें कि क्रय मूल्य बराबर हैं या विक्रय मूल्य बराबर; दोनों स्थितियों के कुल परिणाम अलग होते हैं।

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    CET विकल्प अक्सर आधार-भ्रम, प्रतिशत-बिंदु के भ्रम और जल्दी गोल करने की गलती पर बनते हैं; उत्तर चुनने से पहले मूल्य-श्रृंखला लिखें।

आधार पहचानना: क्रय मूल्य, अंकित मूल्य और विक्रय मूल्य

लाभ-हानि के अधिकांश प्रश्न कठिन इसलिए नहीं होते कि गणना लंबी है, बल्कि इसलिए होते हैं कि आधार गलत पकड़ लिया जाता है। क्रय मूल्य वह राशि है जिस पर वस्तु खरीदी गई। यदि प्रश्न में बेचने से पहले परिवहन, पैकिंग, मरम्मत या ढुलाई खर्च दिया हो, तो उसे क्रय मूल्य में जोड़ा जाएगा, क्योंकि वही वस्तु को बेचने योग्य बनाता है। विक्रय मूल्य वह वास्तविक राशि है जो ग्राहक से ली गई। अंकित मूल्य वह मूल्य है जो वस्तु पर लिखा या घोषित किया गया। छूट अंकित मूल्य में दी गई कमी है।

यदि विक्रय मूल्य क्रय मूल्य से अधिक है, तो अंतर लाभ है; यदि विक्रय मूल्य क्रय मूल्य से कम है, तो अंतर हानि है। लाभ प्रतिशत = लाभ × 100 ÷ क्रय मूल्य, और हानि प्रतिशत = हानि × 100 ÷ क्रय मूल्य। उदाहरण के लिए किसी वस्तु का क्रय मूल्य ₹800 और विक्रय मूल्य ₹920 है। लाभ ₹120 है, इसलिए लाभ प्रतिशत 120 × 100 ÷ 800 = 15 प्रतिशत होगा। इसी वस्तु को ₹720 में बेचने पर हानि ₹80 होगी और हानि प्रतिशत 10 प्रतिशत होगा।

छूट का आधार अलग है। यदि अंकित मूल्य ₹1000 और विक्रय मूल्य ₹850 है, तो छूट ₹150 है और छूट प्रतिशत 15 प्रतिशत होगा। लेकिन ₹850 पर व्यापारी को लाभ हुआ या हानि, यह क्रय मूल्य से तुलना करने पर ही पता चलेगा। CET में विकल्प अक्सर इसी आधार-भ्रम पर बनाए जाते हैं।

पहली पंक्ति में ही आधार लिखें: लाभ-हानि क्रय मूल्य पर, छूट अंकित मूल्य पर।

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